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NCR की बदलेगी सूरत: सिंगापुर मॉडल पर बसेंगे 5 नए स्मार्ट शहर, जानें कनेक्टिविटी का पूरा प्लान

NCR की बदलेगी सूरत: सिंगापुर मॉडल पर बसेंगे 5 नए स्मार्ट शहर, जानें कनेक्टिविटी का पूरा प्लान

दिल्ली-NCR में बढ़ती आबादी, ट्रैफिक और शहरों पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए हरियाणा सरकार बड़े स्तर पर शहरी विकास की तैयारी कर रही है। सरकार की योजना कुंडली-मानेसर-पलवल यानी KMP एक्सप्रेसवे के आसपास 5 नए ग्रीनफील्ड स्मार्ट शहर विकसित करने की है। इन शहरों को आधुनिक सुविधाओं और बेहतर कनेक्टिविटी के साथ विकसित करने की योजना है।

KMP एक्सप्रेसवे बनेगा नए शहरों की विकास धुरी

हरियाणा सरकार की प्रस्तावित योजना के तहत करीब 135 किलोमीटर लंबे KMP एक्सप्रेसवे के दोनों ओर पांच नए शहर विकसित किए जाएंगे। इस पूरे प्रोजेक्ट को 'पंचग्राम' नाम दिया गया है।सरकार का लक्ष्य इन शहरों को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित करना है। इसके लिए साल 2041 की संभावित आबादी और आने वाले वर्षों में आवास, परिवहन, रोजगार और शहरी सुविधाओं की जरूरतों को ध्यान में रखा जा रहा है।

क्या है पंचग्राम प्रोजेक्ट?

पंचग्राम प्रोजेक्ट के लिए हरियाणा सरकार ने पंचग्राम विकास प्राधिकरण के गठन की प्रक्रिया शुरू की है। इस अथॉरिटी के जरिए नए शहरों की प्लानिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास से जुड़े कामों को आगे बढ़ाने की योजना है।सरकार इन शहरों को सिर्फ रिहायशी इलाके के तौर पर नहीं, बल्कि आवास, उद्योग, रोजगार, परिवहन और आधुनिक शहरी सुविधाओं वाले नए अर्बन सेंटर के रूप में विकसित करना चाहती है।

सिंगापुर की तर्ज पर विकसित होंगे शहर

हरियाणा सरकार के मुताबिक, पंचग्राम के तहत बनने वाले पांचों शहरों में आधुनिक और व्यवस्थित शहरी सुविधाओं पर जोर दिया जाएगा। यहां स्मार्ट ड्रेनेज सिस्टम, अंडरग्राउंड यूटिलिटी नेटवर्क, आधुनिक वेस्ट मैनेजमेंट, ग्रीन एरिया और बेहतर सार्वजनिक स्थान विकसित करने की योजना है।हरियाणा के उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह ने भी KMP एक्सप्रेसवे के दोनों ओर सिंगापुर की तर्ज पर पांच नए शहर विकसित करने की योजना का उल्लेख किया है। सरकार का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल सिंगापुर जाकर वहां के शहरी विकास मॉडल का अध्ययन करने की तैयारी में है।

कनेक्टिविटी होगी प्रोजेक्ट की बड़ी खासियत

इन नए शहरों को दिल्ली और NCR के प्रमुख हिस्सों से जोड़ने के लिए कई स्तर पर कनेक्टिविटी विकसित करने की योजना है।

KMP एक्सप्रेसवे: करीब 135 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे इन शहरों के लिए मुख्य परिवहन कॉरिडोर की भूमिका निभाएगा।

मेट्रो नेटवर्क: भविष्य में दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद के मौजूदा मेट्रो नेटवर्क को इन नए शहरों तक विस्तार देने की योजना है।

नमो भारत/RRTS: हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी के जरिए इन इलाकों को दिल्ली-NCR के प्रमुख क्षेत्रों से जोड़ने की योजना पर भी जोर दिया जा रहा है।

गुरुग्राम-पंचगांव मेट्रो: प्रस्तावित करीब 35.25 किलोमीटर लंबे मेट्रो कॉरिडोर में 28 स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिससे इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी और मजबूत हो सकती है।

दिल्ली-NCR पर कम हो सकता है आबादी का दबाव

दिल्ली और NCR के प्रमुख शहरों में लगातार बढ़ती आबादी के कारण आवास, ट्रैफिक और इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में नए शहर विकसित होने से आसपास के क्षेत्रों में नए आवासीय विकल्प उपलब्ध कराने की कोशिश होगी।

सरकार की योजना के मुताबिक, इन शहरों में नए उद्योग और रोजगार केंद्र भी विकसित किए जाएंगे। इससे लोगों को रोजगार के लिए सिर्फ गुरुग्राम, नोएडा या दिल्ली जैसे मौजूदा बड़े शहरों पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो सकती है।

2030 तक 10 नई IMT बनाने का लक्ष्य

पंचग्राम प्रोजेक्ट के साथ हरियाणा सरकार औद्योगिक विकास पर भी फोकस कर रही है। सरकार ने 2030 तक 10 नई इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप यानी IMT विकसित करने का लक्ष्य रखा है।

बताया गया है कि इनमें से पांच IMT को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि तीन प्रस्तावित IMT सीधे KMP कॉरिडोर से जुड़ी होंगी। इससे नए शहरों के आसपास उद्योग, कारोबार और रोजगार के नए अवसर विकसित करने की योजना को भी गति मिल सकती है।

क्यों खास है पंचग्राम प्रोजेक्ट?

  • KMP एक्सप्रेसवे के आसपास 5 नए शहर विकसित करने की योजना
  • 2041 की संभावित आबादी को ध्यान में रखकर प्लानिंग
  • सिंगापुर की तर्ज पर आधुनिक शहरी विकास का लक्ष्य
  • स्मार्ट ड्रेनेज और अंडरग्राउंड यूटिलिटी नेटवर्क
  • बेहतर सार्वजनिक परिवहन और ग्रीन स्पेस
  • मेट्रो और नमो भारत कनेक्टिविटी की योजना
  • नए उद्योग और रोजगार केंद्र विकसित करने पर फोकस
  • 2030 तक 10 नई IMT विकसित करने का लक्ष्य

कुल मिलाकर, पंचग्राम प्रोजेक्ट को दिल्ली-NCR के आसपास भविष्य के नए अर्बन हब तैयार करने की बड़ी योजना के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, शहरों की अंतिम लोकेशन, विकास का विस्तृत प्लान और अलग-अलग इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की टाइमलाइन सरकार की आगे की मंजूरी और योजना पर निर्भर करेगी।

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