नवरात्रि सनातन संस्कृति, नारी सम्मान और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक: महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव
हरिद्वार, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। शारदीय नवरात्रि के अंतिम दिन महानवमी पर देश के अलग-अलग हिस्सों में मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना की जा रही है। इस अवसर पर हरिद्वार के महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने कहा कि नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठान का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, आत्मबल, सकारात्मकता और संकल्प शक्ति को जागृत करने का अवसर है।
महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए रामनवमी, नवरात्रि और कन्या पूजन के सनातन धर्म में विशेष महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि नवदुर्गा की नौ शक्तियां मनुष्य को जीवन में साहस, संयम और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि नवरात्रि के नौ दिन साधना, आराधना और आत्मचिंतन के माध्यम से व्यक्ति को अपनी आंतरिक शक्ति पहचानने का संदेश देते हैं। यह पर्व नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने के साथ जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा भी देता है।
उन्होंने कहा, "हिंदू संस्कृति में नवरात्रि के त्योहार का विशेष महत्व है। यह दिव्य नारी शक्ति के नौ रूपों पर केंद्रित है। इन ऊर्जाओं को अपने दैनिक जीवन में शामिल करने से हम अधिक सशक्त और दृढ़निश्चयी बनते हैं, साथ ही ईश्वर, महिलाओं और माताओं के प्रति हमारी संवेदनशीलता और भक्ति गहरी होती है।"
महामंडलेश्वर ने कहा, "यह त्योहार आत्म-शुद्धि, मानसिक स्पष्टता और आध्यात्मिक जागृति का समय है। यह नई पीढ़ी को महिलाओं का सम्मान करने का संदेश देता है। साल में दो बार मनाए जाने वाले इन नौ दिनों के उत्सव के माध्यम से महिलाओं का सम्मान करके समाज में एक नई चेतना और शक्ति का संचार होता है।"
महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने कहा कि कन्या पूजन नारी शक्ति के प्रति श्रद्धा, सम्मान और संवेदनशीलता का प्रतीक है। सनातन परंपरा में कन्या को देवी स्वरूप मानकर उसकी पूजा करना मातृशक्ति के महत्व को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि नारी परिवार व समाज की आधारशिला है और उसके सम्मान व गरिमा की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। नवरात्रि का पर्व देश के पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता में एकता का संदेश देता है। ऐसे पर्व सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के साथ देश की सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
--आईएएनएस
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