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नवजोत कौर पर तहसीन पूनावाला का पलटवार, बोले-जब हसबैंड-वाइफ भाजपा के नहीं हुए तो कांग्रेस के क्या होंगे?

पुणे, 17 फरवरी (आईएएनएस)। राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर पूर्व कांग्रेस नेता नवजोत कौर सिद्धू के बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि दोनों हसबैंड-वाइफ भाजपा के नहीं हुए तो कांग्रेस के क्या होंगे?
नवजोत कौर पर तहसीन पूनावाला का पलटवार, बोले-जब हसबैंड-वाइफ भाजपा के नहीं हुए तो कांग्रेस के क्या होंगे?

पुणे, 17 फरवरी (आईएएनएस)। राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर पूर्व कांग्रेस नेता नवजोत कौर सिद्धू के बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि दोनों हसबैंड-वाइफ भाजपा के नहीं हुए तो कांग्रेस के क्या होंगे?

तहसीन पूनावाला ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि ये जो दोनों हसबैंड-वाइफ की टीम है, उनको मैं बंटी-बबली कहता हूं। नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी भाजपा के नहीं हुए, जबकि भाजपा ने इन्हें सब कुछ दिया, तो ये कांग्रेस के क्या होंगे? नवजोत कौर सिद्धू जिन शब्दों का प्रयोग कर रही हैं, उन्हें बंद करना चाहिए। कांग्रेस ने उन्हें इतनी रिस्पेक्ट दी। विपक्ष के नेता के खिलाफ इस तरह के शब्दों का प्रयोग करना, मुझे लगता है कि यह उनकी संस्कृति दिखाता है। मैं फिर से कहता हूं कि बंटी-बबली की टीम को देश के सभी लोग पहचानते हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस वंदे मातरम का विरोध नहीं कर रही है। वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत बनाने वाली कांग्रेस पार्टी थी। कांग्रेस के सभी सत्रों में वंदे मातरम गीत गाया था। भाजपा के सांसद और विधायक हैं। सभी को लाइन में खड़ा होकर वंदे मातरम कहने के लिए दीजिए। भाजपा के लोगों को खुद वंदे मातरम नहीं आता है और यह कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाते हैं।

कर्नाटक का जिक्र करते हुए तहसीन पूनावाला ने कहा कि हाईकमान को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दोनों कैंप के लोग एक दूसरे पर कुछ न बोलें। साथ ही जल्द से जल्द फैसला करना चाहिए कि कर्नाटक के अंदर क्या परिवर्तन करना है।

राहुल गांधी को लेकर नवजोत कौर सिद्धू ने कहा कि मैं राहुल गांधी को समझ नहीं पाती, क्योंकि वह अभी उस स्तर पर नहीं पहुंचे हैं, जहां वे सभी के साथ समान व्यवहार करें और बातचीत के लिए खुले रहें। वे अभी भी गांधी परिवार की मानसिकता से बंधे हुए लगते हैं, जहां उनके पास उन लोगों को सुनने का समय नहीं है जो वास्तव में उनके शुभचिंतक हैं और उन्हें मार्गदर्शन देने की कोशिश कर रहे हैं। अगर किसी से मिलने में आठ महीने लग जाते हैं, तो मुझे लगता है कि यह सही नहीं है।

--आईएएनएस

डीकेएम/वीसी

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