नौ वर्ष की आयु में एनसीसी में शामिल हुए थे सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी
नई दिल्ली, 14 जनवरी (आईएएनएस)। भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी नौ वर्ष की आयु में एनसीसी में शामिल हुए थे। आर्मी चीफ का कहना है कि उसके बाद तो पता ही नहीं लगा कि जिंदगी कैसे चली गई। उन्हें अभी भी ऐसा ही लगता है कि वह एनसीसी में ही हैं। बुधवार को यह जानकारी स्वयं सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने एनसीसी कैडेट्स को दी।
एनसीसी कैडेट्स से मुलाकात के दौरान थल सेनाध्यक्ष ने यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि कैडेट्स को देखकर आज भी अपने पुराने दिन याद आ जाते हैं। इस दौरान सेना प्रमुख ने अनुशासन, दृढ़ता, परिश्रम और नेतृत्व जैसे मूल्यों को चरित्र निर्माण तथा जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करने की आधारशिला बताया। दरअसल, वह बुधवार को नई दिल्ली में एनसीसी कैडेट्स के बीच मौजूद रहे। सेनाध्यक्ष ने कैडेट्स के साथ बातचीत कर उनका उत्साहवर्धन किया। उ
उन्होंने कैडेट्स को प्रेरित करते हुए कहा कि ये अनुशासन, दृढ़ता व परिश्रम सरीखे मूल्य न केवल सैन्य जीवन में, बल्कि प्रत्येक क्षेत्र में सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इस दौरान उन्होंने चयनित उपलब्धि प्राप्त कैडेट्स को सम्मानित भी किया। सेनाध्यक्ष ने कैडेट्स के साथ अपने व्यक्तिगत जीवन-यात्रा के अनुभव साझा करते हुए युवाओं को प्रेरणा दी। थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी एवं आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष सुनीता द्विवेदी ने सेना भवन में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेट्स का स्वागत किया।
इस अवसर पर कैडेट्स से संवाद करते हुए सेनाध्यक्ष ने राष्ट्र निर्माण में एनसीसी की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह संगठन राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने में निरंतर योगदान दे रहा है। जनरल द्विवेदी ने अनुशासन, दृढ़ता, परिश्रम और नेतृत्व जैसे मूल्यों को चरित्र निर्माण तथा जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करने की आधारशिला बताया। उन्होंने कैडेट्स को प्रेरित करते हुए कहा कि ये मूल्य न केवल सैन्य जीवन में, बल्कि प्रत्येक क्षेत्र में सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इस दौरान उन्होंने चयनित उपलब्धि प्राप्त कैडेट्स को सम्मानित किया और अपने व्यक्तिगत जीवन-यात्रा के अनुभव साझा करते हुए युवाओं को प्रेरणा दी।
आर्मी चीफ ने कैडेट्स से भारत के शाश्वत मूल्यों को आत्मसात करने और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में श्रेष्ठता के लिए सतत प्रयास करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान कैडेट्स को भारतीय सेना के वीरता पुरस्कार विजेताओं एवं उत्कृष्ट खिलाड़ियों से संवाद का अवसर भी मिला। इनमें परमवीर चक्र से सम्मानित सूबेदार मेजर एवं मानद लेफ्टिनेंट संजय कुमार तथा ओलंपियन सूबेदार होकाटो सेमा और नायब सूबेदार जैस्मिन शामिल थे। उनके अनुभवों और उपलब्धियों ने कैडेट्स के भीतर आकांक्षा, संकल्प और राष्ट्रसेवा की भावना को और प्रबल किया।
गौरतलब है कि मंगलवार को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने दिल्ली कैंट स्थित राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के गणतंत्र दिवस शिविर (आरडीसी) का दौरा किया था। उन्होंने इस मौके पर एनसीसी कैडेट्स और अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा था कि यह उनके लिए गर्व का विषय है कि वे लगातार चौथी बार आरडीसी शिविर में उपस्थित हुए हैं। उन्होंने कैडेट्स के उच्च मानकों, अनुशासन और उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि हर वर्ष उनमें नई ऊर्जा और देशभक्ति की भावना देखने को मिलती है। युवाओं के लिए विजन और संकल्प के महत्व पर जोर देते हुए सीडीएस ने कहा था कि यदि आप सही मार्ग चुनते हैं, तो सही लक्ष्य तक अवश्य पहुंचते हैं और आज सही रास्ता चुनना अत्यंत आवश्यक है।
--आईएएनएस
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