नेपाल में बुधवार की सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। तिब्बत से आए जलसैलाब ने नेपाल के रसुवा और धाडिंग जिलों में गाड़ियां, सड़कें, पुल और टावर तक बहा दिए। अधिकारियों के मुताबिक, सुबह करीब 9 बजे भोटेकोशी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने के बाद यह बाढ़ आई। इसका असर रसुवा और धाडिंग के अलावा काठमांडू के पास स्थित नुवाकोट जिले में भी देखने को मिला।
अचानक आई इस बाढ़ के बाद सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए नेपाल की सेना ने 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं। त्रिशूली में मिलिट्री सेंटर को अस्थायी अस्पताल में बदल दिया गया है।
नेपाल में बुधवार सुबह क्या हुआ?
तिब्बत से निकलने वाली भोटेकोशी नदी का पानी सुबह करीब 9 बजे अचानक बढ़ने लगा और कुछ ही देर में यह तेज सैलाब में बदल गया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में बाढ़ का पानी बेहद तेजी से बहता हुआ दिखाई दे रहा है, जो अपने रास्ते में आने वाली चीजों को बहा ले गया।
सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा जिला है, जो काठमांडू से करीब 125 किलोमीटर दूर है। बागमती प्रांत के पुलिस प्रवक्ता एसएसपी राजेंद्र प्रसाद धमाला के मुताबिक, अब तक 16 शव बरामद किए गए हैं। इनमें रसुवा में 1, नुवाकोट में 9 और धाडिंग में 6 शव मिले हैं।
उत्तरी रसुवा में एक बॉर्डर पोस्ट पर तैनात सेना के 4 जवान लापता हैं। रसुवा कस्टम ऑफिस के 14 कर्मचारी भी संपर्क से बाहर हैं। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, नेपाल पुलिस के 32 जवानों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है।
द हिमालयन टाइम्स के अनुसार, नुवाकोट में त्रिशूली बाजार के पास करीब 60 घर बाढ़ में बह गए हैं, जबकि दो पुलों को भी नुकसान पहुंचा है।
नेपाल टूरिज्म बोर्ड के मुताबिक, कुल 384 पर्यटक लापता हैं, जिनमें 291 विदेशी नागरिक हैं। लापता लोगों में 105 भारतीय भी शामिल हैं।
लगातार बढ़ रहा बाढ़ का खतरा
भोटेकोशी नदी तिब्बत से निकलती है। नेपाल के फ्लड फोरकास्टिंग डिविजन के मुताबिक, तिब्बत की ओर से आई बाढ़ बुधवार दोपहर तक धाडिंग जिले के गल्छी इलाके तक पहुंच गई थी।
अधिकारियों ने त्रिशूली नदी के किनारे रहने वाले लोगों को निचले इलाकों और बाजारों से दूर जाकर सुरक्षित ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने की सलाह दी है। भोटेकोशी आगे जाकर त्रिशूली नदी में मिलती है, जिससे मध्य नेपाल के कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
न बारिश, न बादल फटा, फिर कैसे आई बाढ़?
नेपाल में अचानक आई इस बाढ़ की वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, रसुवा में इतनी बारिश नहीं हुई थी कि इस तरह का सैलाब आ सके। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि तिब्बत में भारी बारिश, एवलांच या ग्लेशियल झील के फटने की वजह से अचानक पानी का बहाव बढ़ा।
काठमांडू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और क्लाइमेट रिसर्चर रिजन भक्त कायस्थ के मुताबिक, शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि एक एवलांच ने ल्हेंडे नदी का रास्ता रोक दिया था। इसके बाद अचानक पानी का दबाव बढ़ने से भोटेकोशी नदी में तेज बाढ़ आ सकती है।
अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, बुधवार सुबह 8:37 बजे तिब्बत के इलाके में 4.4 तीव्रता का भूकंप भी आया था। हालांकि, भूकंप और बाढ़ के बीच सीधा संबंध अभी साबित नहीं हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह पता लगाने में कुछ दिन लग सकते हैं कि कहीं कोई ग्लेशियल झील तो नहीं फटी थी। इससे पहले 8 जुलाई 2025 को भी भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आई थी, जिसे ल्हेंडे नदी में ग्लेशियल झील फटने से जोड़ा गया था।
हाइड्रोलॉजी और मौसम विभाग ने भी तिब्बत या नेपाल के ऊपरी इलाकों में ग्लेशियल झील के फटने की आशंका जताई है। बाढ़ के अचानक आने का पैटर्न भी इस ओर इशारा करता है कि नदी के ऊपरी हिस्से में पानी को रोकने वाली कोई प्राकृतिक बाधा अचानक टूटी होगी।
क्या भारत पर भी है खतरा?
भोटेकोशी नदी तिब्बत से निकलती है और आगे चलकर त्रिशूली नदी में मिलती है। सहायक नदियों के जरिए इसका पानी आगे गंडक नदी प्रणाली तक पहुंचता है, जिसका असर बिहार में भी पड़ सकता है।
इसी खतरे को देखते हुए बिहार सरकार ने अधिकारियों को अलर्ट रहने और नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन को कहा गया है कि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में लोगों को समय पर सूचना दी जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।
फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन अगले 24 से 48 घंटे महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। नेपाल से आने वाले अतिरिक्त पानी के कारण अगर गंडक और दूसरी नदियों का जलस्तर बढ़ता है, तो उत्तर बिहार के सीमाई इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

