कुदरत का कहर: शिमला में खिसके पहाड़, उत्तर प्रदेश में नदियां उफान पर; बिहार के दो जिलों में बाढ़ से हाहाकार
देश के कई हिस्सों में सितंबर के आखिरी दिनों में बारिश ने एक बार फिर मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के कई इलाकों में भारी बारिश के चलते जलभराव, बाढ़ और लैंडस्लाइड की स्थिति बनी हुई है। कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानी भी बढ़ गई है।सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई हिस्सों में देखने को मिला है। वहीं बिहार में भी नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कई गांवों को प्रभावित किया है। दूसरी ओर पहाड़ी राज्यों में बारिश के साथ भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं।
यूपी में बारिश से बिगड़े हालात
उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से हुई बारिश के बाद कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। गोंडा और बदायूं में छोटे पुलों के ऊपर से पानी बहने की तस्वीरें सामने आई हैं। कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
बारिश और आंधी से प्रदेश में पिछले दो दिनों में 63 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। वहीं कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। कुशीनगर में दो गांवों के करीब 1,400 परिवार प्रभावित बताए गए हैं।
लखनऊ के भी कुछ इलाकों में भारी जलभराव देखने को मिला। कई जगह घरों और दुकानों में पानी घुस गया, जबकि कुछ गलियों में काफी ज्यादा पानी जमा हो गया।
हालांकि, मौसम विभाग के 28 सितंबर के अपडेट में उत्तर प्रदेश के दोनों उपखंडों के लिए उस दिन कोई चेतावनी नहीं दिखाई गई है। इससे संकेत मिलता है कि सबसे ज्यादा बारिश वाला दौर कुछ इलाकों में गुजर चुका है, हालांकि स्थानीय जलभराव और नदी के बढ़े जलस्तर का असर बना रह सकता है।
हिमाचल में 100 फीट से ज्यादा ऊंचा पहाड़ गिरा
हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में सोमवार सुबह लैंडस्लाइड की बड़ी घटना सामने आई। रोहड़ू के छोहारा ब्लॉक में जंगलिख पुल के पास पहाड़ का बड़ा हिस्सा सड़क पर आ गिरा।
बताया गया कि 100 फीट से ज्यादा ऊंचा पहाड़ करीब 25 से 26 सेकेंड तक गिरता रहा। मलबा सड़क पर आने के बाद गांव की आवाजाही प्रभावित हो गई।
पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के दौरान ऐसे इलाकों में लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ जाता है। प्रशासन और स्थानीय लोगों के लिए सड़क खोलना और आवाजाही सुरक्षित करना चुनौती बना हुआ है।
बिहार में भी बाढ़ का असर
नेपाल से गंडक नदी में पानी छोड़े जाने के बाद बिहार के पश्चिम चंपारण और सुपौल समेत कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है।
गंडक नदी में सोमवार को पीक डिस्चार्ज करीब 5.43 लाख क्यूसेक तक पहुंचने की जानकारी सामने आई। बिहार के 11 प्रखंडों में 82 हजार से ज्यादा लोगों के प्रभावित होने की रिपोर्ट है। कोसी और सोन नदी के जलस्तर में भी बढ़ोतरी पर नजर रखी जा रही है।
सुपौल में भारी बारिश के बाद कई सड़कों पर दो से तीन फीट तक पानी भरने की तस्वीरें सामने आईं। ऐसे में ग्रामीण और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को आवाजाही में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
छत्तीसगढ़ में बाढ़ और रेलवे ट्रैक को नुकसान
छत्तीसगढ़ में लगातार बारिश का असर कई इलाकों में दिखाई दे रहा है। दंतेवाड़ा के पास इंद्रावती नदी में बाढ़ के कारण 12 लोग फंस गए थे। इन लोगों को भारतीय वायुसेना ने हेलिकॉप्टर की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला।
जानकारी के मुताबिक, ये लोग डोंगाघाट गांव के पास नदी किनारे बनी एक कच्ची झोपड़ी की छत पर फंसे थे। पानी बढ़ने के कारण वहां खतरा बढ़ गया था। इसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सभी को सुरक्षित निकाला गया।
वहीं, मल्लीगुड़ा और छत्रीपुट रेलवे स्टेशनों के बीच लैंडस्लाइड के कारण रेलवे ट्रैक को भी नुकसान पहुंचा। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ हिस्सों में पटरियां हवा में लटकी दिखाई दीं। इसके चलते इस रूट पर ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ है।
केदारनाथ मार्ग पर लैंडस्लाइड, 1500 श्रद्धालु सुरक्षित निकाले गए
उत्तराखंड में लगातार बारिश के बीच केदारनाथ यात्रा मार्ग पर भी लैंडस्लाइड की घटना सामने आई। चिरबासा के पास रास्ते में मलबा और बड़े पत्थर आने के कारण करीब 1,500 श्रद्धालु फंस गए थे।
SDRF, NDRF और DDRF की संयुक्त टीमों ने अभियान चलाकर श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला और उन्हें गौरीकुंड की ओर पहुंचाया। लगातार पत्थर गिरने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान भी खतरा बना हुआ था।
IMD के 28 सितंबर के अपडेट में उत्तराखंड के लिए उस दिन भारी बारिश की चेतावनी दी गई थी, जबकि अगले दिनों के लिए फिलहाल ऐसी चेतावनी नहीं दिखाई गई है।
मध्य प्रदेश में भी बारिश का असर
मध्य प्रदेश के जबलपुर, सागर, शहडोल और रीवा संभाग में पिछले दिनों बारिश का असर देखने को मिला। उमरिया समेत कई इलाकों में नदियों का जलस्तर बढ़ा है।
वहीं, राज्य में मानसून की विदाई का दौर भी शुरू होने वाला है। मौसम विभाग के भोपाल केंद्र के अनुसार आने वाले दिनों में प्रदेश के किसी जिले में भारी या अति भारी बारिश की संभावना नहीं बताई गई है।
राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी अलर्ट
राजस्थान के कई जिलों में सोमवार को तेज हवा और बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया था। श्रीगंगानगर में सुबह आंधी के साथ बूंदाबांदी हुई, जिससे कुछ समय के लिए दिन में अंधेरा जैसा माहौल बन गया।
छत्तीसगढ़ के कई जिलों में भी तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना जताई गई। रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव समेत कई इलाकों में मौसम में बदलाव देखने को मिला।
देशभर में बारिश से क्या स्थिति?
कुल मिलाकर उत्तर भारत से लेकर मध्य भारत और पहाड़ी राज्यों तक बारिश का असर अलग-अलग रूप में दिखाई दे रहा है। कहीं नदियों का जलस्तर बढ़ा है तो कहीं सड़कें और रेलवे ट्रैक प्रभावित हुए हैं। पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड और लगातार पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ है।
फिलहाल राहत और बचाव टीमें प्रभावित इलाकों में सक्रिय हैं। खासकर नदी किनारे, निचले इलाकों और पहाड़ी सड़कों पर लोगों को मौसम और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी पर नजर रखने की जरूरत है।

