नरेंद्र मोदी के इजराइल दौरे का दूसरा दिन, वीडियो में जाने याद वाशेम में दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजराइल दौरे का आज दूसरा दिन है। गुरुवार सुबह उन्होंने यरूशलम स्थित होलोकॉस्ट मेमोरियल याद वाशेम पहुंचकर नाजी शासन के दौरान मारे गए लगभग 60 लाख यहूदियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने स्मारक परिसर में पुष्पांजलि अर्पित की और विजिटर्स बुक में संदेश भी लिखा।
याद वाशेम को दुनिया भर में होलोकॉस्ट की स्मृति और मानवता के खिलाफ हुए अपराधों की याद दिलाने वाले प्रमुख स्मारकों में गिना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी का यहां जाना भारत और इजराइल के ऐतिहासिक संबंधों तथा मानवाधिकारों के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से प्रस्तावित है। इस बैठक में दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों, पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, भारत और इजराइल के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर विशेष जोर रहेगा।
दौरे के इस अहम दिन में रक्षा क्षेत्र में सहयोग सबसे बड़ा एजेंडा माना जा रहा है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच एक बड़ी डिफेंस डील पर सहमति बन सकती है। भारत पहले से ही इजराइल से ड्रोन, रडार सिस्टम और मिसाइल तकनीक खरीदता रहा है। ऐसे में इस बार उन्नत मिसाइल डिफेंस सिस्टम और नई पीढ़ी की सैन्य तकनीक पर चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दोपहर से पहले प्रधानमंत्री मोदी इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। इस उच्चस्तरीय बैठक में रक्षा सहयोग, मिसाइल डिफेंस सिस्टम, साइबर सुरक्षा और एडवांस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में साझेदारी पर फोकस रहने की उम्मीद है। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच पहले ही कई दौर की बातचीत हो चुकी है, जिससे समझौतों को अंतिम रूप देने का रास्ता साफ हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और इजराइल के बीच रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। भारत इजराइल को एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है, खासकर हाई-टेक डिफेंस सिस्टम और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में। वहीं इजराइल के लिए भारत एक बड़ा और स्थिर बाजार है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां और भू-राजनीतिक तनाव बढ़े हुए हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच मजबूत रणनीतिक तालमेल क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। दौरे के दूसरे दिन की इन बैठकों और संभावित समझौतों पर न केवल भारत और इजराइल, बल्कि वैश्विक समुदाय की भी नजर बनी हुई है।

