नालंदा में ज्ञान और सहयोग का नया पुल, दक्षिण पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र का हुआ उद्घाटन
नालंदा, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। नालंदा यूनिवर्सिटी में साउथईस्ट एशियन स्टडीज सेंटर का उद्घाटन हो चुका है। यह सेंटर भारत और दक्षिण-पूर्वी एशिया के बीच सेतु का काम करेगा। यहां से नई नीतियां तैयार होंगी, अकादमिक प्रोग्राम चलेंगे, सांस्कृतिक आदान-प्रदान होगा और दोनों क्षेत्रों के नागरिकों और विद्वानों के बीच समझ बढ़ेगी।
जानकारी के अनुसार, विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) श्री पी. कुमारन ने 31 मार्च को नालंदा यूनिवर्सिटी में साउथईस्ट एशियन स्टडीज सेंटर को आधिकारिक रूप से शुरू किया। इस दौरान उद्घाटन समारोह में कई एंबेसडर, हाइ कमिश्नर, नालंदा यूनिवर्सिटी के पार्टनर देशों के प्रतिनिधि, विभिन्न विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर और यूनिवर्सिटी के फैकल्टी मौजूद थे।
यह सेंटर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल का नतीजा है। उन्होंने इस सेंटर की स्थापना का ऐलान अक्टूबर 2025 में कुआलालंपुर में हुए 22वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन के दौरान किया था। उनका उद्देश्य भारत और दक्षिण-पूर्वी एशिया के बीच अकादमिक, सांस्कृतिक और नीतिगत रिश्तों को और मजबूत करना था। अब इसका आधिकारिक रूप से उद्घाटन कर दिया गया है।
सेंटर का काम सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रहेगा। इसे दस रिसर्च क्लस्टर्स के रूप में तैयार किया गया है। इसमें जलवायु परिवर्तन, समुद्री अध्ययन, ट्रेड, विरासत, पब्लिक हेल्थ, माइग्रेशन, डिजिटल कोऑपरेशन और अंतरराष्ट्रीय संबंध जैसे विषय शामिल हैं। यानी यह सेंटर हर तरह के मुद्दों पर रिसर्च और समझ बढ़ाने का काम करेगा।
इस सेंटर का मकसद है कि यह आसियान-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी कार्य योजना (2026–2030) के लिए एक ज्ञान साझेदार के रूप में काम करे। यह सेंटर न सिर्फ रिसर्च, बल्कि पॉलिसी बनाने और दो क्षेत्रों के बीच सहयोग बढ़ाने में भी मदद करेगा।
नालंदा यूनिवर्सिटी का यह नया सेंटर सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि भारत और दक्षिण-पूर्वी एशिया के बीच दोस्ती, सहयोग और साझा ज्ञान का पुल है। आने वाले वर्षों में यह सेंटर भारत की विदेश नीति, रिसर्च और सांस्कृतिक कनेक्शन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।
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