नकल में शामिल विद्यार्थियों के अभिभावकों को बुलाकर उनसे करें संवाद: राज्यपाल
लखनऊ, 9 जनवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में राजभवन में आयोजित एक बैठक में आज डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ द्वारा डिजिटल एग्जामिनेशन इकोसिस्टम के संबंध में विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया गया।
प्रस्तुतिकरण के दौरान विश्वविद्यालय द्वारा अवगत कराया गया कि परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष एवं सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से परीक्षा कक्षों में सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से विश्वविद्यालय के कमांड सेंटर से लाइव मॉनिटरिंग की जाती है। राज्यपाल ने कहा कि नकल में संलिप्त पाए जाने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को बुलाकर उनसे संवाद किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अतिरिक्त उत्तर पुस्तिकाओं पर बारकोडिंग और बायोमेट्रिक आधारित उपस्थिति सत्यापन सहित अनेक तकनीकी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। यह भी जानकारी दी गई कि सभी परीक्षा केंद्रों से प्राप्त उत्तर पुस्तिकाओं को विश्वविद्यालय में स्कैन किया जाता है, जिससे उत्तर पुस्तिकाओं में किसी भी प्रकार के परिवर्तन की संभावना न रहे। राज्यपाल ने परीक्षा व्यवस्था, प्रश्न पत्रों की समयबद्ध तैयारी, परीक्षा समय-सारिणी, परीक्षा केंद्रों पर पर्यवेक्षकों की तैनाती, परीक्षा संचालन, मूल्यांकन प्रक्रिया तथा समय पर परिणाम घोषित किए जाने के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
राज्यपाल ने कहा कि नकल में संलिप्त पाए जाने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को बुलाकर उनसे संवाद किया जाना चाहिए तथा यह समझने का प्रयास किया जाना चाहिए कि किन परिस्थितियों में विद्यार्थी इस प्रकार के कृत्य के लिए विवश हुए। संवाद बच्चों को सही दिशा देने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने गुजरात के अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि दसवीं एवं बारहवीं के परीक्षा परिणाम घोषित होने के पश्चात कुछ छात्र असफलता के कारण आत्महत्या जैसे विचारों से ग्रस्त हो गए थे।
उन्होंने स्वयं विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से संवाद कर उत्तर पुस्तिकाएं मंगवाईं, जिनमें कई स्थानों पर कुछ भी लिखा नहीं था। उन्होंने अभिभावकों को विद्यालय जाकर शिक्षकों से चर्चा करने तथा बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करने की सलाह दी। राज्यपाल ने कहा कि उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के दौरान जहां गलती हो, वहीं स्पष्ट रूप से अंकन किया जाना चाहिए, जिससे उत्तर पुस्तिकाओं की पुनः जांच कराने वाले विद्यार्थी अपनी कमियों को समझ सकें।
उन्होंने अभिभावकों को भी बच्चों की शैक्षणिक स्थिति के प्रति संवेदनशील बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि बच्चों की रुचि के अनुसार विषयों का चयन एवं आवश्यक कौशल विकसित किया जाना चाहिए, क्योंकि रुचि के क्षेत्र में बच्चे बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं। उत्तर पुस्तिकाओं की मूल्यांकन प्रक्रिया पर विशेष जोर देते हुए राज्यपाल ने कहा कि उत्तर पुस्तिकाओं की जांच अत्यंत सावधानीपूर्वक की जानी चाहिए तथा गलत मूल्यांकन पाए जाने पर आर्थिक दंड का प्रावधान होना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि पीजी स्तर के विद्यार्थियों से भी सीमित संख्या में निचली कक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कराया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उत्तर पुस्तिकाओं का आकलन करें कि विद्यार्थी औसतन कितने पृष्ठ लिखते हैं। उसी औसत से पृष्ठों की संख्या निर्धारित करें, इससे अनावश्यक पृष्ठों की बर्बादी रुकेगी तथा आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त पृष्ठ उपलब्ध कराने के संबंध में भी सुझाव दिए।
प्रस्तुतिकरण के दौरान विश्वविद्यालय द्वारा शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार, मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने तथा परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ करने हेतु किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी गई। राज्यपाल ने संबंधित बिंदुओं पर आवश्यक सुझाव देते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देशित किया कि विद्यार्थियों के हित में मूल्यांकन प्रणाली को और अधिक प्रभावी, निष्पक्ष एवं तकनीक आधारित बनाया जाए।
--आईएएनएस
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