नैनीताल के गांवों में ड्रोन से हो रहा भूमि सर्वेक्षण, रामनगर की चार क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक से शुरू हुई सीमांकन प्रक्रिया
रामनगर, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तराखंड में भूमि सर्वेक्षण और राजस्व अभिलेखों को अधिक पारदर्शी एवं सटीक बनाने के लिए अब आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। इसी क्रम में नैनीताल जिले के रामनगर क्षेत्र में ड्रोन और डीजीपीएस (डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) तकनीक की मदद से भूमि सर्वेक्षण अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत पंपापुरी, दुर्गापुरी, कौशल्यापुरी और भरतपुरी क्षेत्रों में भूमि गणना और सीमांकन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
राजस्व परिषद उत्तराखंड की पहल पर नैनीताल और हरिद्वार जिलों के चयनित गांवों में यह विशेष सर्वेक्षण कराया जा रहा है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग (सर्वे ऑफ इंडिया), देहरादून की टीम आधुनिक उपकरणों और ड्रोन तकनीक के माध्यम से भूमि की सटीक जानकारी जुटाने में लगी हुई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में घनी आबादी और जटिल भौगोलिक परिस्थितियों के कारण भूमि बंदोबस्त, चकबंदी और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े मामलों में लंबे समय से कई तरह की समस्याएं सामने आती रही हैं। ऐसे में सरकार ने भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और राजस्व रिकॉर्ड को व्यवस्थित एवं अद्यतन बनाने के उद्देश्य से आधुनिक तकनीक आधारित सर्वेक्षण शुरू किया है।
रामनगर तहसील में पीएनजीपीजी महाविद्यालय परिसर से चारों क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया गया। इन इलाकों में भूमि गणना और सर्वेक्षण की मांग स्थानीय लोगों द्वारा लंबे समय से उठाई जा रही थी। लोगों का मानना है कि सर्वे पूरा होने के बाद भूमि स्वामित्व और सीमांकन से जुड़े कई विवादों का समाधान संभव हो सकेगा।
रामनगर के उपजिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान ने बताया कि भरतपुरी, पंपापुरी और कौशल्यापुरी क्षेत्र में भूमि गणना की मांग लंबे समय से की जा रही थी। ये नॉन-जेडी भूमि की श्रेणी में आते हैं, जिनमें विभिन्न प्रकार की जमीन शामिल है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भूमि गणना की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन वर्ष 1948 के बाद के कुछ पुराने सर्वे रिकॉर्ड और तकनीकी चुनौतियों के कारण कार्य में कठिनाइयां आ रही थीं।
उन्होंने बताया कि इसके बाद मामले को जिलाधिकारी के माध्यम से राजस्व परिषद के समक्ष रखा गया, जिसके बाद सर्वे ऑफ इंडिया को सर्वेक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई। अब विशेषज्ञ टीम क्षेत्र में पहुंचकर भूमि से संबंधित आंकड़े एकत्र कर रही है और विस्तृत सर्वेक्षण कर रही है।
आधुनिक तकनीक के जरिए किए जा रहे इस सर्वेक्षण से भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने, राजस्व रिकॉर्ड को दुरुस्त करने और स्थानीय लोगों की वर्षों पुरानी समस्याओं के समाधान की उम्मीद बढ़ गई है। अब लोगों की नजर सर्वेक्षण की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे भूमि संबंधी मामलों में राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
--आईएएनएस
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