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नाइजर से आतंकियों के चंगुल से वापस लौटे झारखंड के 5 मजदूरों ने पीएम मोदी का जताया आभार, घरों में उत्‍सव

गिरिडीह, 15 जनवरी (आईएएनएस)। नाइजर में आतंकवादियों के चंगुल से मुक्त होकर झारखंड लौटे पांच मजदूरों की सकुशल घर वापसी से गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड सहित पूरे इलाके में खुशी और राहत का माहौल है।
नाइजर से आतंकियों के चंगुल से वापस लौटे झारखंड के 5 मजदूरों ने पीएम मोदी का जताया आभार, घरों में उत्‍सव

गिरिडीह, 15 जनवरी (आईएएनएस)। नाइजर में आतंकवादियों के चंगुल से मुक्त होकर झारखंड लौटे पांच मजदूरों की सकुशल घर वापसी से गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड सहित पूरे इलाके में खुशी और राहत का माहौल है।

बगोदर प्रखंड के दोन्दोलो गांव के रहने वाले ये सभी मजदूर करीब आठ महीने पहले रोजगार की तलाश में नाइजर गए थे, जहां वे एक ट्रांसमिशन लाइन परियोजना में कार्यरत थे। काम के दौरान ही आतंकवादियों ने उनका अपहरण कर लिया था। इस घटना की खबर मिलते ही उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था और परिजन लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की कामना कर रहे थे।

अपहरण की सूचना मिलते ही भारत सरकार का विदेश मंत्रालय पूरी तरह सक्रिय हो गया। विदेश मंत्रालय ने नाइजर सरकार और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा और मजदूरों की रिहाई के लिए कूटनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर हरसंभव प्रयास किए। करीब आठ महीने और 11 दिनों तक चले अथक प्रयासों के बाद आखिरकार सभी मजदूरों को आतंकवादियों के चंगुल से सुरक्षित मुक्त करा लिया गया। भारत लौटने के बाद जब वे अपने पैतृक गांव पहुंचे तो परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े और पूरे गांव में जश्न का माहौल देखने को मिला।

मजदूरों ने आईएएनएस से बातचीत में आपबीती साझा करते हुए बताया कि अपहरण के बाद उनका जीवन बेहद कठिन और भयावह रहा। हर दिन अनिश्चितता, डर और मानसिक पीड़ा के बीच गुजरा, लेकिन इस दौरान उन्हें यह विश्वास बना रहा कि भारत सरकार उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मजदूरों ने कहा कि केंद्र सरकार, विदेश मंत्रालय, झारखंड सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों के कारण ही आज वे सुरक्षित अपने वतन और परिवार के बीच लौट सके हैं।

वापस लौटे मजदूरों ने विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि विदेश में फंसे भारतीय नागरिकों के लिए सरकार जिस संवेदनशीलता, तत्परता और प्रतिबद्धता के साथ काम करती है, यह घटना उसका जीवंत उदाहरण है। मजदूरों की सुरक्षित वापसी से न केवल उनके परिवारों को राहत मिली है, बल्कि पूरे क्षेत्र में यह भरोसा भी मजबूत हुआ है कि संकट की घड़ी में सरकार अपने नागरिकों के साथ मजबूती से खड़ी रहती है।

मजदूर परिवार के सदस्यों ने भी सरकार और प्रशासन के प्रति आभार जताया। परिजनों ने कहा कि सरकार के प्रयासों के कारण ही परिवार में फिर से खुशियां लौटी हैं और अब वे पर्व-त्योहार सुकून और आनंद के साथ मना पाएंगे। मजदूर राजू कुमार की मां ने बेटे के घर लौटने पर अत्यंत खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इतने लंबे इंतजार और चिंता के बाद बेटे को सुरक्षित देखकर मन को बड़ी शांति मिली है।

वापस लौटे मजदूर राजू कुमार ने कहा कि आतंकियों के चंगुल से निकालकर सुरक्षित अपने देश वापस लाने के लिए वे केंद्र सरकार के आभारी हैं। वतन वापसी के बाद परिवार से मिल पाना उनके लिए सबसे बड़ी खुशी है। उन्होंने बताया कि उनके लौटने से पूरे परिवार और रिश्तेदारों में खुशी का माहौल है।

वहीं, मजदूर फलजीत महतो ने बताया कि वे नाइजर काम करने गए थे, लेकिन आतंकियों द्वारा अपहरण किए जाने के बाद जीवन पूरी तरह बदल गया था। केंद्र सरकार और झारखंड सरकार के संयुक्त प्रयासों से करीब आठ महीने बाद वे अपने देश लौट सके। उन्होंने कहा कि भारत की धरती पर कदम रखते ही उन्हें अपार खुशी और सुकून का एहसास हुआ।

फलजीत महतो की बहन उमा भारती ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि भाई के घर वापस आने से परिवार में उत्सव जैसा माहौल है। भाई के लापता होने के बाद पूरे घर में सन्नाटा और चिंता छा गई थी। नेताओं, विधायकों और सरकार के निरंतर प्रयासों से आज यह शुभ दिन देखने को मिला है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।

वापस लौटे मजदूर संजय महतो ने भी अपनी सुरक्षित वतन वापसी के लिए भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि उनके देश लौटने से परिवार में फिर से खुशियां लौट आई हैं। संजय महतो की पत्नी सोनी देवी ने कहा कि पति की सुरक्षित वापसी से बच्चे बेहद खुश हैं और अब मकर संक्रांति का पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बीते आठ महीनों की पीड़ा और परेशानी को शब्दों में बयां कर पाना आसान नहीं है, लेकिन आज परिवार के चेहरे पर जो मुस्कान है, वही सबसे बड़ी राहत है।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी

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