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महिला आरक्षण बिल के विरोध से विपक्ष को ही नुकसान: बैजयंत पांडा

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। महिला आरक्षण बिल को लेकर सदन में चर्चा चल रही है। एक तरफ जहां विपक्ष के लोग तरह-तरह के आरोप लगा रहे हैं, तो वहीं सरकार में शामिल सांसद इस बिल का समर्थन कर रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद कह रहे हैं। सदन में चल रहे घटनाक्रम और महिला आरक्षण बिल पर की जा रही बयानबाजी को लेकर संसद परिसर में कई नेताओं ने अपनी बात रखी है।
महिला आरक्षण बिल के विरोध से विपक्ष को ही नुकसान: बैजयंत पांडा

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। महिला आरक्षण बिल को लेकर सदन में चर्चा चल रही है। एक तरफ जहां विपक्ष के लोग तरह-तरह के आरोप लगा रहे हैं, तो वहीं सरकार में शामिल सांसद इस बिल का समर्थन कर रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद कह रहे हैं। सदन में चल रहे घटनाक्रम और महिला आरक्षण बिल पर की जा रही बयानबाजी को लेकर संसद परिसर में कई नेताओं ने अपनी बात रखी है।

महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष के हंगामे पर भाजपा सांसद बैजयंत पांडा ने कहा कि इससे विपक्ष को ही नुकसान होगा। यह ऐतिहासिक बिल है। यह कोई तोहफा नहीं बल्कि महिलाओं का हक है। इसका समर्थन करने में सभी का फायदा है और विरोध करने पर नुकसान ही होगा। सभी राजनीतिक दलों को मिलकर इस बिल को पास करवाना चाहिए।

एम.के. स्टालिन द्वारा दिए गए बयान को लेकर उन्होंने कहा कि वे बेवजह परिसीमन को लेकर आरोप लगा रहे हैं। परिसीमन की जो प्रक्रिया है, उसी के तहत किया जा रहा है। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अमित शाह ने आश्वासन दिया है कि किसी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा।

वहीं भाजपा सांसद भोला सिंह ने भी आईएएनएस से बात की और कहा कि विपक्ष नहीं चाहता कि यह बिल पास हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी से अपील की थी कि वे इस बिल का समर्थन करें।

राहुल गांधी के बयान पर उन्होंने कहा कि पिछले 12 साल में एसटी/एससी, संविधान और अंबेडकर जी को मोदी सरकार ने खूब सम्मान दिया है। कांग्रेस वालों को यह नहीं भूलना चाहिए कि जब पहली बार राष्ट्रपति चुनने का मौका मिला, तो एससी समाज के रामनाथ कोविंद को चुना गया और दूसरी बार आदिवासी समाज की महिला को चुना गया। विजयंत पांडा ने कहा कि कांग्रेस सिर्फ वोट लेती रही है और गुमराह करती रही है।

शिरोमणि अकाली दल की सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने कहा कि 2023 में ही यह बिल पास हो गया था, लेकिन यह अब तक कानून नहीं बन पाया, क्योंकि विपक्ष पहले कह रहा था कि जनगणना और परिसीमन को शामिल मत किया जाए, लेकिन सरकार ने उनकी बात नहीं मानी। हैरानी की बात यह है कि अब यही सरकार संशोधन लेकर आ रही है। संविधान कहता है कि जनगणना के आधार पर ही परिसीमन हो सकता है। अब ये कहते हैं कि संविधान को ही बदल दो कि परिसीमन कितना होगा, यह कमीशन नहीं बल्कि हम खुद ही तय कर लेंगे।

उन्होंने कहा कि सीटों को बढ़ाने की संख्या किस आधार पर तय की गई, इस पर कोई जवाब नहीं है। इन्हें बताना चाहिए कि ये कौन सी जनगणना लागू कर रहे हैं। गृह मंत्री भाषण में आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन अदालत में जब मामला जाएगा तो बिल में जो लिखा गया है, उसी को माना जाएगा। ऐसे में बिल में स्पष्ट रूप से लिखा जाना चाहिए था।

--आईएएनएस

एएमटी/वीसी

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