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न विजन, न सकारात्मक एजेंडा, देश को भ्रमित कर रहे राहुल गांधी: बांसुरी स्वराज

न विजन, न सकारात्मक एजेंडा, देश को भ्रमित कर रहे राहुल गांधी: बांसुरी स्वराज
न विजन, न सकारात्मक एजेंडा, देश को भ्रमित कर रहे राहुल गांधी: बांसुरी स्वराज

नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास न तो कोई स्पष्ट विजन है और न ही कोई सकारात्मक एजेंडा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी निराधार और बेतुकी बातें करके देश को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के महिला सशक्तिकरण संबंधी दावों पर सवाल खड़े किए।

बांसुरी स्वराज ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के पास न तो विजन है और न ही सकारात्मक एजेंडा, इसीलिए वह बेतुकी बातें करके देश को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। मैं उन्हें याद दिलाना चाहती हूं कि पीएम मोदी वह नेता हैं जिन्होंने विकसित भारत की नींव को सुदृढ़ करने के लिए महिलाओं के नेतृत्व में विकास को महत्व दिया है।

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री जनधन योजना में 50 प्रतिशत से अधिक महिलाओं के बैंक खाते खुले हैं। मुद्रा योजना के तहत दो-तिहाई ऋण महिला उद्यमियों को दिए गए हैं। दस करोड़ से अधिक महिलाओं को धुएं भरी जिंदगी से आजादी उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त सिलेंडर देकर पीएम मोदी ने दिलाई है। रक्षा क्षेत्र में एनडीए का पहला कैडेट बैच, जो ग्रेजुएट हुआ है, वह पीएम मोदी के कार्यकाल में हुआ है।

उन्होंने यह भी कहा कि आज स्टार्टअप की दुनिया में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है, जहां 48 प्रतिशत स्टार्टअप में महिलाएं मुख्य भूमिका में हैं। यह सब इसलिए संभव है क्योंकि पीएम मोदी 'महिला सशक्तिकरण' को सिर्फ एक राजनीतिक जुमला नहीं मानते हैं। उन्होंने राजनीति में महिला सशक्तिकरण के लिए लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया।

उन्होंने राहुल गांधी से सीधा सवाल पूछा कि अगर आप राजनीति में महिलाओं का सशक्तिकरण चाहते हैं और महिला सशक्तिकरण को लेकर इतनी गुहार लगाते हैं, तो आपने नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू क्यों नहीं होने दिया? आपने उस विधेयक को सदन में क्यों गिरा दिया था?

उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी के लिए महिला सशक्तिकरण सिर्फ एक जुमला है। वह नहीं चाहते हैं कि महिलाएं निर्णय लेने में स्वतंत्र बनें और नेतृत्वकारी भूमिकाओं में आएं। वह महिलाओं की भूमिका को मतदान केंद्र तक सिर्फ एक मतदाता के रूप में सीमित रखना चाहते हैं।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

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