म्यांमार से सुपारी तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की कार्रवाई, चम्फाई में नौ स्थानों पर छापेमारी
आइजोल, 5 जून (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने म्यांमार से कथित रूप से की जा रही सूखी सुपारी की तस्करी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मिजोरम के चम्फाई जिले में बड़ी कार्रवाई की है।
केंद्रीय एजेंसी ने जिले के नौ अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि इस मामले में 970 करोड़ रुपए से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है।
ईडी के आइजोल उप-क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से की गई इस कार्रवाई में उन व्यापारियों और अन्य लोगों के घरों और कारोबारी प्रतिष्ठानों की तलाशी ली गई, जिन पर तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने का संदेह है। एजेंसी के अनुसार, यह जांच अगस्त 2024 में दर्ज केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की प्राथमिकी के आधार पर की जा रही है। यह प्राथमिकी गुवाहाटी उच्च न्यायालय के निर्देश पर दर्ज की गई थी।
जांच में सामने आया है कि म्यांमार से सूखी सुपारी को कथित रूप से बिना वैध सीमा शुल्क अनुमति के मिजोरम के जोखावथर और चम्फाई मार्ग से भारत लाया जाता था। ईडी के मुताबिक, तस्करी की गई सुपारी को तियाउ नदी के रास्ते भारतीय सीमा तक पहुंचाया जाता था, जहां स्थानीय लोग उसे प्राप्त करते थे। इसके बाद माल को चम्फाई में संग्रहित किया जाता था और फिर असम सीमा के पास वैरेंगटे भेजा जाता था।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क को असम के सिलचर में रहने वाले कुछ व्यापारियों और वित्तीय सहयोगियों का समर्थन प्राप्त था। माल को वैध दिखाने के लिए कथित तौर पर फर्जी बागान प्रमाणपत्र और सीमा शुल्क से जुड़े जाली दस्तावेजों का उपयोग किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2021 से 2024 के बीच माल के परिवहन के लिए 337 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य के वस्तु एवं सेवा कर से जुड़े फर्जी ई-वे बिल तैयार किए गए।
ईडी के अनुसार, परिवहन और अन्य व्यवस्थाओं के लिए स्थानीय लोगों को प्रति किलोग्राम दो से 15 रुपए तक का कमीशन दिया जाता था। एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि जब्त माल को छुड़ाने के लिए कई बार ऐसे आयात दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, जिनका मामले से कोई संबंध नहीं था।
बैंक खातों की जांच में वर्ष 2013 से 2025 के बीच 970 करोड़ रुपए से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। ईडी का मानना है कि यह राशि कथित अवैध कारोबार से अर्जित की गई हो सकती है। छापेमारी के दौरान संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, कारोबारी रिकॉर्ड, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं। एजेंसी का कहना है कि इन सामग्रियों की जांच के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
--आईएएनएस
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