जब मुसलमान राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति बन सकते हैं तो मेयर क्यों नहीं: वारिस पठान
मुंबई, 5 जनवरी (आईएएनएस)। एआईएमआईएम के नेता वारिस पठान ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के महापौर को लेकर दिए बयान पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जब देश का राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति मुसलमान बन सकते हैं तो मुसलमान मेयर क्यों नहीं बन सकता।
मुंबई में वारिस पठान ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि ताज्जुब है कि संविधान की शपथ लेकर देवेंद्र फडणवीस सीएम बने हैं, लेकिन वे संविधान को नहीं मानते। संविधान में कहां लिखा है कि महापौर सिर्फ एक खास धर्म या भाषा का ही बनेगा? संविधान एकता और बराबरी की बात करता है। मुंबई का मेयर मुसलमान क्यों नहीं बन सकता? हिजाब पहनने वाली मुस्लिम महिला मेयर क्यों नहीं बन सकती? मैंने तो भारत के मुसलमानों की बात की है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति बन सकते हैं तो मुसलमान मेयर क्यों नहीं बन सकता? सीएम असंवैधानिक बातें कर रहे हैं। आपके पास विकास का कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए ध्यान भटकाने के लिए ऐसी बातें करते हैं। प्रदूषण से लोगों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है, आधे घंटे की बारिश में मुंबई ठप हो जाती है। ड्रेनेज सिस्टम पर क्या काम किया गया, यह बताइए।
वारिस पठान ने कहा कि लव जिहाद का अर्थ बताइए। सदन के अंदर चर्चा नहीं करना चाहते? किन राज्यों में कितने मामले आए, डेटा क्यों नहीं जाहिर करते? कानून के हिसाब से एक युवक-युवती शादी करते हैं, तो क्या दिक्कत है? भाजपा नेताओं ने मुसलमानों से शादी की, क्या इसे लव जिहाद कहते हैं? बॉलीवुड में भी ऐसा हुआ, क्या वो लव जिहाद है?
उन्होंने ठाकरे बंधुओं के घोषणापत्र पर कहा कि मैंने घोषणापत्र नहीं देखा है। वक्त मिलेगा तो देखूंगा, फिर इस पर कहूंगा। इतने वर्षों से सत्ता में थे, कौन सा काम किया? बीएमसी को बेहाल बना दिया।
नेता वारिस पठान ने दिल्ली दंगों के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज करने पर कहा कि हम कानून का पालन करते हैं और सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं। पांच लोगों को जमानत मिली है, जबकि उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत खारिज कर दी गई है।
उन्होंने कहा कि एक साल तक जमानत नहीं मिलेगी, थोड़ी कठिनाई होगी। हम लोग तो चाहते हैं कि इनका ट्रायल जल्द शुरू हो और ये लोग भी जल्द बाहर आएं। उन्होंने कहा कि आंकड़े देखें तो मुसलमानों को ज्यादा जेल में डाला गया है, जिनकी कोई सुनवाई नहीं होती। कोर्ट को कानून बनाना चाहिए, जिससे बेल मिलनी चाहिए। केजरीवाल को भी बेल मिली थी, तो इन्हें भी अपने हक में बेल मिलनी चाहिए।
--आईएएनएस
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