'मुस्लिम लीग की सोच से प्रभावित होकर कांग्रेस ने लिया फैसला,' सीडब्ल्यूसी पर वीएचपी का हमला
नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। कांग्रेस वर्किंग कमेटी द्वारा वंदे मातरम के सिर्फ दो पद गाने के फैसले पर सियासत गरमा गई है। वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इसे 1937 की 'मुस्लिम लीग की सोच' से जोड़ा और कहा कि बाकी पदों में मंदिर, धर्म, दुर्गा जैसे शब्द होने के कारण कांग्रेस को पीड़ा है। वहीं, बंकिमचंद्र चटर्जी के वंशज और भाजपा विधायक सौमित्र चटर्जी ने कानूनी कदम उठाने की बात कही। इंडियन सूफी फाउंडेशन ने भी कहा कि कानून के खिलाफ काम करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्लयूसी) के वंदे मातरम के सिर्फ दो पद गाने के फैसले पर वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, "उन्होंने वही दोहराया है जो 1937 में हुआ था। आखिरकार, मुस्लिम लीग की सोच से प्रभावित होकर और देश विरोध की पराकाष्ठा तक ले जाकर उन्होंने वंदे मातरम को फिर से काट दिया है। क्या आप जानते हैं कि बाकी पद क्यों हटा दिए गए? क्योंकि उन छंदों में विद्या, वाणी, मंदिर, सार, धर्म और दुर्गा जैसे शब्द हैं, जो भारतीय संस्कृति, परंपराओं, राष्ट्रीय मूल्यों और इसकी पुरानी विरासत को दिखाते हैं।"
उन्होंने कहा कि ऐसे शब्दों के कारण कांग्रेस को जो पीड़ा हो रही है, वो बहुत ही चिंतनीय है। हालांकि, ये विरोध नया नहीं है। आजकल पार्टी की डोर विदेश महिला के हाथों में है और फिर तुष्टीकरण की नीति। आखिरकार जिहादियों को कुछ करना है। कांग्रेस को अपने अंतरमन में फिर से विचार करना चाहिए और देश के लोगों को कांग्रेस के झांसे में नहीं आना चाहिए। अब ये कानून का रूप ले चुका है। कोई इनके चक्कर में न आए। अगर वंदे मातरम का अपमान किया, चाहे वो कांग्रेसी हों या कोई और, उसे जेल जाना ही पड़ेगा।
स्वतंत्रता सेनानी प्रवीण छाबड़ा ने कहा, "आज ‘वंदे मातरम’ आम लोगों और हर नागरिक के सामने एक सवाल बन गया है। यह एक महान राष्ट्रीय गीत और एक क्रांतिकारी गीत है। क्रांतिकारियों ने इससे प्रेरणा ली और यह एक शक्तिशाली ताकत बन गया था। पूरे देश में वंदे मातरम के नाम पर गोलियां चल पड़ीं, ना जाने कितने शहीद हो गए। उस पवित्र गीत को लेकर जब विधान परिषद बना तो हमारा राष्ट्रीय गीत कौन सा होगा? हमारा राष्ट्र एजेंडा क्या होगा? ऐसे-ऐसे कई प्रश्न पूछे गए। इन प्रश्नों पर विचार करने वाले कौन लोग थे? वही लोग थे, जिन्होंने आजादी के संघर्ष में भाग लिया, जो तपे हुए सेनानी थे, उन सेनानियों ने इसपर गहराई से विचार किया।"
वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस पार्टी में चल रहे विवाद पर बंकिम चंद्र चटर्जी के वंशज और भाजपा विधायक सौमित्र चटर्जी ने कहा, "सर्कस में जोकर रहता है, जो ध्यान खींचता है। वैसे ही देश में कुछ गंभीर हो रहा होता है तो ये नाटक कर रहे हैं। अगर कोई नाटक करेगा तो हम क्या करेंगे। ये तो भारत है, लेकिन कानून हमारे साथ है।"
उन्होंने यह भी कहा, "हम कानूनी कदम उठाएंगे। मुझे अपने परिवार से बात करनी है। मैं अपनी पार्टी से भी बात करूंगा। उसके बाद हम कानूनी कदम उठाएंगे, लेकिन अगर कोई कानूनी कदम उठाना है, तो वह परिवार उठाएगा—हम यही चाहते हैं। सबसे ऊपर हम पार्टी से भी बात करेंगे।"
उन्होंने आगे कहा, "कांग्रेस एक पार्टी है; वो सीडब्ल्यूसी में कुछ भी करें, हमें क्या। लेकिन अगर भारत में रहना है तो भारतीय कानून के दायरे में काम करना होगा।"
स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में हुई घटना पर इंडियन सूफी फाउंडेशन के नेशनल प्रेसिडेंट सूफी कशिश वारसी ने कहा, "पॉलिटिकल लोग बिना राजनीति के कुछ नहीं करते। वे वोट बैंक के लालच में ऐसा करते हैं। अगर सोनिया गांधी ने देश के कानून के खिलाफ काम किया है तो यह गलत है, और मैं इसकी निंदा करता हूं।"
उन्होंने आगे कहा कि दूसरी बात हर राष्ट्रवादी को कानून पास होने के बाद उसका पालन करना चाहिए। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनके साथी जिम्मेदार हैं। अगर सोनिया ने देश के कानून के खिलाफ कुछ किया है तो देश में सरकार है, और वह क्या सोचती है और क्या एक्शन लेना चाहिए, यह सरकार पर निर्भर करता है।
--आईएएनएस
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