मुंबई में कैप्टन स्मित के सम्मान में लगे बिलबोर्ड, इजरायली दूत बोले- सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलना चाहिए
मुंबई, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। इजरायल के महावाणिज्यदूत (मध्य पश्चिम भारत) याविन रेवाच ने कैप्टन स्मित की बहादुरी को सलाम किया है। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि आज मुंबई में बिलबोर्ड लगाकर कैप्टन स्मित के साहस के लिए उन्हें सम्मान दिया गया।
उन्होंने कहा कि गंभीर चोटों के बावजूद कैप्टन ने इजरायली यात्रियों की जान बचाई और हाईजैक की कोशिश को नाकाम किया। मुझे लगता है कि उनकी बहादुरी के लिए उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलना चाहिए।
महावाणिज्यदूत याविन रेवाच ने कहा कि हमारे लिए यह बहुत जरूरी था कि हम इजरायल सरकार और इजरायल के लोगों की ओर से कैप्टन स्मित की असाधारण बहादुरी के लिए दिल से उनका शुक्रिया अदा करें और उन्हें सम्मान दें। इसी वजह से हमने मुंबई में अलग-अलग जगहों और बड़े-बड़े बिलबोर्ड पर एक जन-जागरूकता अभियान शुरू करने का फैसला किया, ताकि उनकी बहादुरी के लिए व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद किया जा सके।
रेवाच ने कहा कि कैप्टन स्मित के हाथों और गर्दन पर गंभीर चोटें लगी थीं, इसके बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोला और इजरायली यात्रियों को अंदर जाने दिया, जिसके बाद उन्होंने ओमान के उस हमलावर को काबू में किया, जिसे ‘आतंकवादी’ बताया जा रहा है। इसलिए हम उनकी बहादुरी के लिए उन्हें सम्मानित करना चाहते थे।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले, हमें ओमान, यूएई और अमीराती अधिकारियों पर भरोसा है कि वे इस मामले की गहराई से जांच करेंगे और पता लगाएंगे कि आखिर वास्तव में क्या हुआ था। मेरे हिसाब से जो सबूत सामने हैं, उनसे यह साफ लगता है कि ओमानी पायलट ने कथित तौर पर आतंकी कार्रवाई करने, विमान को हाईजैक करने और उसमें सवार सभी यात्रियों के साथ उसे क्रैश करने की कोशिश की।
उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि कैप्टन स्मित ने जो किया, वह वाकई बहादुरी और साहस का काम था। मैं फिर इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि गर्दन और हाथों में गंभीर चोट लगने के बावजूद वह रेंगते हुए आगे बढ़े, कॉकपिट खोला और इजरायली लोगों को अंदर मौजूद आतंकवादी पर काबू पाने का मौका दिया। मुझे लगता है कि सबसे पहले हमें उनके ठीक होने पर ध्यान देना चाहिए। हमारी उम्मीद है कि वह पूरी तरह स्वस्थ हों और सुरक्षित अपने घर भारत लौटें। उसके बाद मुझे लगता है कि उनकी बहादुरी के लिए उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया जाना उचित होगा।
--आईएएनएस
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