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निर्मला सीतारमण ने एनआईसीडीआईटी बैठक की अध्यक्षता की, औद्योगिक कॉरिडोर में निवेश और उत्पादन तेज करने पर दिया जोर

निर्मला सीतारमण ने एनआईसीडीआईटी बैठक की अध्यक्षता की, औद्योगिक कॉरिडोर में निवेश और उत्पादन तेज करने पर दिया जोर
निर्मला सीतारमण ने एनआईसीडीआईटी बैठक की अध्यक्षता की, औद्योगिक कॉरिडोर में निवेश और उत्पादन तेज करने पर दिया जोर

नई दिल्ली, 17 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को नई दिल्ली में नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट एंड इम्प्लीमेंटेशन ट्रस्ट यानी एनआईसीडीआईटी की शीर्ष निगरानी समिति की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम एनआईसीडीपी के तहत चल रही परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई और औद्योगिक कॉरिडोर विकास के अगले चरण की प्राथमिकताएं तय की गईं।

बैठक में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी समेत कई राज्यों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। वर्चुअल माध्यम से केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल भी जुड़े।

सीतारमण ने कहा कि एनआईसीडीपी भारत सरकार की उस रणनीति का अहम स्तंभ है जिसका उद्देश्य मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार, लॉजिस्टिक्स में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और विश्व-स्तरीय औद्योगिक इकोसिस्टम बनाना है। उन्होंने जोर दिया कि अब काम सिर्फ परियोजनाओं की मंजूरी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बुनियादी ढांचे का समय पर निर्माण, भूमि आवंटन, निवेश लाना और उत्पादन शुरू करना प्राथमिकता होनी चाहिए।

उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे जमीन, कनेक्टिविटी, यूटिलिटी, कानूनी मंजूरी और प्रोजेक्ट एसपीवी की शक्तियों से जुड़ी अड़चनें तुरंत दूर करें। वित्त मंत्री ने कहा कि मौजूदा उपलब्ध जमीन और बुनियादी ढांचे की इन्वेंट्री खत्म होने से पहले ही अगली पाइपलाइन तैयार रखनी होगी। इसके लिए पीएम गतिशक्ति के जरिए एकीकृत योजना और निवेशक-अनुकूल भूमि आवंटन को लगातार अपनाने की जरूरत है।

उन्होंने यह भी कहा कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ मजदूरों के लिए आवास, स्वास्थ्य, कौशल विकास, सार्वजनिक परिवहन जैसी सामाजिक सुविधाएं भी जरूरी हैं।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाओं को तेज गति और नतीजों के साथ लागू किया जाए। उन्होंने 'प्लग-एंड-प्ले' बुनियादी ढांचे वाले ऐसे औद्योगिक इकोसिस्टम बनाने का आह्वान किया जो निवेशकों के लिए पूरी तरह तैयार हों। इसमें फ्लैटेड फैक्ट्रियां, वर्कर हाउसिंग और सहायक आर्थिक-सामाजिक ढांचा शामिल हो।

गोयल ने भाव्या और भविष्य के औद्योगिक विकास को पीएम गतिशक्ति के अनुरूप एकीकृत क्षेत्र-विकास दृष्टिकोण से जोड़ने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से मिल रहे अवसरों का फायदा उठाकर देश-और सेक्टर-आधारित औद्योगिक एन्क्लेव विकसित किए जाएं। निवेशकों तक पहुंचने के लिए विशेष अभियान और औद्योगिक नोड्स की बेहतर मार्केटिंग जरूरी है।

बैठक में भाव्या योजना की भी समीक्षा हुई। इसका लक्ष्य पूरे देश में 100 निवेश-तैयार, प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क बनाना है। पहले दौर में मंजूरी के लिए प्रस्तावित 20 प्रोजेक्ट के लिए राज्यों से 87 आवेदन मिले हैं। इससे स्कीम में राज्यों की गहरी दिलचस्पी दिखती है।

अब तक एनआईसीडीपी के तहत 13 राज्यों और 7 औद्योगिक कॉरिडोर में 20 परियोजनाएं मंजूर हैं। इनमें धोलेरा, शेंद्रा-बिडकिन, ग्रेटर नोएडा और विक्रम उद्योगपुरी जैसी चार औद्योगिक स्मार्ट सिटी उत्पादन चरण में पहुंच चुकी हैं। अगस्त 2024 में मंजूर 12 परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है।

आंकड़ों के अनुसार अब तक लगभग 5,348 एकड़ में 469 प्लॉट आवंटित किए जा चुके हैं। इनसे करीब 2.21 लाख करोड़ रुपए के निवेश और 1.29 लाख लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है। 134 यूनिट उत्पादन में हैं और 95 यूनिट निर्माणाधीन हैं।

सर्बानंद सोनोवाल ने औद्योगिक कॉरिडोर को राष्ट्रीय जलमार्गों से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जलमार्ग कॉरिडोर विकास की रीढ़ बन सकते हैं। साथ ही नॉर्थ-ईस्ट राज्यों में मजबूत कनेक्टिविटी और संसाधनों वाले क्षेत्रों में औद्योगिक बुनियादी ढांचा विकसित करने की जरूरत बताई।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष लाहिड़ी ने कहा कि राज्य सरकारें प्रोजेक्ट एसपीवी को योजना, विकास और नगरपालिका संबंधी पर्याप्त शक्तियां दें ताकि निर्णय तेजी से हों और निवेशक-अनुकूल माहौल बने।

बैठक के अंत में शीर्ष निगरानी समिति ने तय किया कि आगे की प्रगति सिर्फ बने ढांचे से नहीं, बल्कि कितनी जल्दी निवेश आए, उत्पादन शुरू हो, और रोजगार सृजित हो, इससे मापी जाएगी।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी

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