मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने से पहले एसआईआर की सच्चाई सामने आए, जांच के लिए बने आयोग: डॉ. कृष्णासामी
कोयंबटूर, 25 सितंबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु की क्षेत्रीय पार्टी पुथिया तमिलगम के अध्यक्ष डॉ. के. कृष्णासामी ने विपक्ष द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए जारी प्रेस नोटिस को बेहद गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने एसआईआर की सच्चाई जनता के सामने लाने की बात कही और इसके असली तथ्यों का पता लगाने के लिए एक आयोग का गठन करने की मांग की।
डॉ. के. कृष्णासामी ने कहा, "तमिलनाडु के जाने-माने उद्योगपति जिम बिरामणी को लगभग दो हफ्ते पहले बाल शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद उनके आसपास, उनकी गतिविधियों को छिपाने में इतने सारे लोगों की संलिप्तता के बारे में बहुत सारी खबरें चल रही हैं। यह घटना लगभग दो साल या उससे भी पुरानी बताई जा रही है। किसी भी पीड़ित बच्चे की ओर से कोई सीधी शिकायत नहीं थी। सबूतों की कमी के कारण मामला बंद भी कर दिया गया था। अब कुछ लोग सामने आए हैं और उन्होंने खुलकर कहा है कि कुछ गलत व्यवहार हुआ था और उन्होंने इसे छिपाने की कोशिश की।"
उन्होंने कहा कि 10 मिनट में करोड़ों-करोड़ों रुपए की रिश्वत देकर इस घटना को छुपाया गया। वह 82 साल के बुजुर्ग हैं। इस मामले में कई सवाल हैं। मामले में शांति और उनके पति भी शामिल हैं, उन्हें भी गिरफ्तार किया गया है। इसलिए इस मामले की बड़े पैमाने पर जांच होनी चाहिए। यहां हमें केवल कुछ सोशल मीडिया या यूट्यूब पर दिखाई देने वाली खबरों पर ही नहीं जाना चाहिए। क्योंकि जो कुछ भी हुआ है, अगर वह सचमुच हुआ है, तो दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
डॉ. के. कृष्णासामी ने कहा कि उन्हें बुक किया जाना चाहिए। जो भी शामिल हैं, उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए और तुरंत आरोप तय करने चाहिए लेकिन इस संबंध में पिछले एक हफ्ते से आपसी आरोप-प्रत्यारोप का खेल चल रहा था। मौजूदा सरकार के मंत्रियों ने इस घटना को छिपाने के लिए पिछली सरकार पर आरोप लगाया।
हीरा मणि मामले में पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन के बयान पर उन्होंने कहा कि उन्हें केवल पुलिस रिपोर्ट पर भरोसा करना होगा। उन्हें केवल पुलिस रिपोर्ट पर ही भरोसा करना होगा। हमें नहीं पता कि मामला बंद करने के लिए राजनीतिक दबाव था या नहीं, या पुलिस ने वास्तव में यह रिपोर्ट दी है। तो यह सब अब जनता के सामने लाया जाना चाहिए। हम दो साल पहले जो कुछ भी हुआ उसके बारे में कुछ नहीं कह सकते।
उन्होंने कहा कि तो वह मेरा इसलिए है क्योंकि मुझे लगता है कि आज एक विशेष जांच दल का गठन किया गया है। इसलिए मुझे लगता है कि उस दल को इस मामले के इर्द-गिर्द की सभी तथ्यों को उजागर करने के लिए गहराई से जांच करनी चाहिए।
एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए डॉ. कृष्णासामी ने कहा कि स्थानीय निकायों और संस्थानों में 6774 का ऑडिट आपत्तियां देखीं, स्थानीय निकाय के वित्त प्रबंधन में बहुत सारी खामियां रही हैं। हमने पहले ही यह सार्वजनिक बैठकों में कई बार उल्लेख किया है, इसलिए इस ऑडिट को ध्यान में रखते हुए उन्हें एक श्वेत पत्र जारी करना चाहिए कि ये भ्रष्टाचार है और किस तरह से स्थानीय निकाय को 6000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। सरकार को नहीं, बल्कि अगर किसी ने जानबूझकर ऐसा किया है तो अगर इसका सबूत है तो उन्हें दंडित किया जाना चाहिए।
विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए जारी प्रेस नोटिस को लेकर उन्होंने कहा कि भारत के चुनाव आयोग से जारी किए गए हैं। यह एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है। भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने से पहले, सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए। इसलिए, यह पता लगाने के लिए एक आयोग होना चाहिए कि असली तथ्य क्या है जो एसआईआर (एसआईआर) में हुआ है। अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ने किसी के पक्ष में कुछ भी गलत किया है, तो उसे जनता के सामने लाना होगा। इसलिए सभी राजनीतिक दलों के साथ फिर से जांच होनी चाहिए।
--आईएएनएस
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