एमएसपी से लेकर किसानों पर दर्ज एफआईआर तक, सरवन सिंह पंधेर ने पंजाब सरकार को घेरा
चंडीगढ़, 13 अगस्त (आईएएनएस)। किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) के नेता सरवन सिंह पंधेर ने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर किसानों से किए गए वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाते हुए आंदोलन को फिर तेज करने का ऐलान किया है। पंधेर ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले किसानों के हित में कई वादे किए थे। अब उन वादों को पूरा करने का समय आ गया है। उन्होंने विशेष रूप से फसलों की खरीद, किसानों-मजदूरों की कर्जमाफी, आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों की वापसी और सिंधू-खनौरी आंदोलन के दौरान घायल हुए लोगों को मुआवजा देने की मांग उठाई।
पंधेर ने कहा कि किसान मजदूर मोर्चा ने इन मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति तैयार की है। इसके तहत 31 अगस्त को पंजाब में जिला उपायुक्त (डीसी) कार्यालयों के सामने एक दिवसीय धरना दिया जाएगा। यदि सरकार ने इसके बाद भी मांगों पर बातचीत नहीं की तो 14 सितंबर से पांच दिनों तक मंत्रियों के घेराव का कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसके बाद भी समाधान नहीं निकला तो रेल रोकने जैसे अगले कदम पर विचार किया जाएगा।
सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने सत्ता संभालने से पहले किसानों के हित में कई वादे किए थे। अब सरकार को उन वादों को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। सिंधू और खनौरी बॉर्डर पर चले किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आंदोलन मुख्य रूप से केंद्र सरकार के खिलाफ था, लेकिन पंजाब सरकार ने भी आंदोलन के दौरान किसानों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया। आंदोलन के दौरान किसानों के सामान को नुकसान पहुंचाया गया और कई लोग घायल हुए। किसान संगठनों की ओर से केंद्र सरकार के सामने लंबे समय से एमएसपी की कानूनी गारंटी और किसान-मजदूरों की कर्जमाफी की मांग रखी जा रही है। ऐसे में पंजाब सरकार से उनकी मांग अलग है कि राज्य सरकार अपने चुनावी वादों के मुताबिक किसानों की फसलों की खरीद सुनिश्चित करे।
पंधेर ने कहा कि भगवंत मान सरकार ने सत्ता में आने से पहले 23 फसलों की खरीद का वादा किया था। उन्होंने भगवंत मान के एक पुराने इंटरव्यू का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया था कि वे अपनी फसल लेकर आएं और सरकार खरीद की व्यवस्था करेगी। अब किसान मजदूर मोर्चा पहले चरण में पांच फसलों की सरकारी खरीद की मांग उठाएगा। इनमें मूंग, बासमती, मक्का, आलू और सरसों शामिल हैं। यदि इन फसलों की सरकारी खरीद सुनिश्चित होती है तो किसानों को बाजार में उचित मूल्य मिलने का भरोसा बढ़ेगा और उन्हें अपनी उपज कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान कई किसान और मजदूर घायल हुए और कुछ लोगों की मौत भी हुई। उन्होंने मांग की कि आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों के परिवारों को नौकरी और मुआवजा दिया जाए। साथ ही, घायल हुए 450 से अधिक युवाओं, किसानों और मजदूरों को भी मुआवजा दिए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इनमें पुलिस केस के अलावा रेलवे और पराली से जुड़े मामलों को भी शामिल किया जाना चाहिए। लंबे आंदोलन के बाद सरकार को किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा कर उन्हें वापस लेने की दिशा में कदम उठाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने पंजाब के पानी के बंटवारे से जुड़े विवाद को भी आंदोलन की मांगों में शामिल किया।
उन्होंने कहा कि राज्यों के बीच पानी के विवाद का समाधान रिपेरियन सिद्धांत के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड के अधिकार क्षेत्र को लेकर भी पंजाब के हितों को प्राथमिकता देने की मांग रखी। पंजाब से जुड़े जल संसाधनों पर राज्य के अधिकार और हितों को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। पंधेर ने पिछले वर्ष पंजाब में आई बाढ़ से हुए नुकसान का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बाढ़ से किसानों और आम लोगों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ, लेकिन उनके मुताबिक राज्य सरकार की ओर से प्रभावित लोगों को अपेक्षित मुआवजा नहीं मिला। किसान मजदूर मोर्चा बाढ़ प्रभावित परिवारों के मुआवजे का मुद्दा भी सरकार के सामने मजबूती से उठाएगा।
बातचीत के दौरान पंधेर ने राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर होने वाले कार्यक्रम का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त को प्रस्तावित घेराव के कार्यक्रम को किसान मजदूर मोर्चा समर्थन देगा। उन्होंने कहा कि जिन राजनीतिक कैदियों ने कानून के तहत दी गई सजा से अधिक समय जेल में बिताया है, उनके मामलों पर मानवीय आधार पर विचार किया जाना चाहिए और उन्हें रिहा किया जाना चाहिए।
किसान मजदूर मोर्चा ने पंजाब सरकार के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने की भी घोषणा की है। पंधेर ने कहा कि 25 अगस्त से गांव-गांव पोस्टर अभियान शुरू किया जाएगा। इस अभियान के जरिए सरकार से किए गए वादों को पूरा करने और किसानों से जुड़े मुद्दों को जनता के बीच उठाया जाएगा। इसके बाद 31 अगस्त को जिला स्तर पर धरने का कार्यक्रम होगा। 31 अगस्त के धरने के बाद यदि सरकार ने बातचीत नहीं की या मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की, तो किसान मजदूर मोर्चा 14 सितंबर से पांच दिनों तक मंत्रियों के घेराव का कार्यक्रम शुरू करेगा। इसके बाद भी सरकार की ओर से कोई समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा और रेल रोकने जैसे कदम उठाने पर निर्णय लिया जाएगा।
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर नांदेड़ साहिब में हुए हमले को लेकर भी सरवन सिंह पंधेर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है और वह फिलहाल पूरे घटनाक्रम को देखकर ही कोई अंतिम राय बनाएंगे। पंधेर ने कहा कि जब भी पंजाब में चुनाव करीब आते हैं, तो राज्य के भाईचारे और सामाजिक माहौल को प्रभावित करने वाली घटनाएं सामने आती हैं। यदि किसी राजनीतिक नेता पर हमला होता है तो इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि हमले के पीछे कौन था और उसका उद्देश्य क्या था।
जगतार सिंह हवारा को पैरोल दिए जाने की मांग और मुख्यमंत्री भगवंत मान और रवनीत सिंह बिट्टू की ओर से कथित सिफारिशों पर भी पंधेर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी राजनीतिक कैदी को अपनी बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल की जरूरत है और उसके परिवार की ओर से मानवीय आधार पर मांग की गई है, तो इस पर सकारात्मक निर्णय लिया जाना चाहिए। लंबे समय से जेल में बंद राजनीतिक कैदियों के मामलों पर भी सरकार को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
--आईएएनएस
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