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मृदा स्वास्थ्य कार्ड से किसानों को संतुलित खाद इस्तेमाल करने में मदद, खेती की लागत घटाने पर जोर

मृदा स्वास्थ्य कार्ड से किसानों को संतुलित खाद इस्तेमाल करने में मदद, खेती की लागत घटाने पर जोर
मृदा स्वास्थ्य कार्ड से किसानों को संतुलित खाद इस्तेमाल करने में मदद, खेती की लागत घटाने पर जोर

यमुनानगर, 2 सितंबर (आईएएनएस)। हरियाणा के यमुनानगर में केंद्र सरकार की मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के जरिए किसानों को खेत की मिट्टी की जांच के आधार पर उसमें मौजूद पोषक तत्वों की जानकारी दी जा रही है। इससे किसानों को फसल की जरूरत के अनुसार संतुलित मात्रा में खाद और उर्वरकों के इस्तेमाल की सलाह मिल रही है, जिससे खेती की लागत कम करने और उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल रही है।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड के तहत मिट्टी की जांच कर यह पता लगाया जाता है कि खेत में कौन-कौन से पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं और किन तत्वों की कमी है। इसके आधार पर किसानों को उनकी फसल के अनुसार उर्वरकों के इस्तेमाल की जानकारी दी जाती है।

यमुनानगर के सॉयल टेस्टिंग जगाधरी में एनालिटिकल एसोसिएट योगेश ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि यहां मिट्टी के 12 पैरामीटर की जांच की जाती है, जिनमें पीएच, ईसी, ऑर्गेनिक कार्बन, नाइट्रोजन, बोरॉन, सल्फर, फॉस्फोरस, जिंक, मैंगनीज, आयरन और कॉपर शामिल हैं। मिट्टी की जांच से किसानों को पता चलता है कि कौन से पोषक तत्व कम या अधिक हैं और उसी के अनुसार उर्वरकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि कई बार मिट्टी में कुछ पोषक तत्व पहले से पर्याप्त मात्रा में मौजूद होते हैं, ऐसे में किसानों को उन्हें दोबारा डालने की जरूरत नहीं होती। बिना जांच के किसान अनावश्यक रूप से उर्वरकों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे आर्थिक नुकसान के साथ मिट्टी की सेहत भी प्रभावित हो सकती है। पीएच से मिट्टी के अम्लीय या क्षारीय होने का पता चलता है, जबकि ईसी मिट्टी में नमक की मात्रा को दर्शाता है। नाइट्रोजन, सल्फर, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्व मैक्रोन्यूट्रिएंट्स हैं, जबकि जिंक, मैंगनीज, आयरन, कॉपर और बोरॉन माइक्रोन्यूट्रिएंट्स में शामिल हैं।

योगेश ने बताया कि पौधों में फलों के फटने जैसी समस्या बोरॉन की कमी का संकेत हो सकती है, जबकि पत्तियों का पीला या लाल होना जिंक की कमी से जुड़ा हो सकता है। मिट्टी की जांच के बाद किसानों को उनकी जमीन में मौजूद पोषक तत्वों की स्थिति के आधार पर जानकारी दी जाती है और प्रति एकड़ आवश्यक मात्रा में उर्वरक इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। यह पूरी जानकारी मृदा स्वास्थ्य कार्ड में उपलब्ध कराई जाती है। कृषि और मृदा परीक्षण विभाग की ओर से हर साल जागरूकता शिविर लगाए जाते हैं। विभाग की टीमें ब्लॉक स्तर पर गांवों में जाकर मिट्टी की जांच, खेती की लागत कम करने और मिट्टी की सेहत बनाए रखने के बारे में जागरूक करती हैं।

वहीं, यमुनानगर के जिला कृषि अधिकारी आदित्य डबास ने कहा कि हर वर्ष विभाग को जिले में खेतों की मिट्टी की जांच के लिए लक्ष्य दिया जाता है। किसान खुद भी नमूने लेकर आते हैं, जबकि विभाग के ग्राम स्तर के कर्मचारी और अधिकारी भी खेतों से नमूने एकत्र करते हैं। मिट्टी की जांच का मुख्य उद्देश्य खेत की सेहत का पता लगाना है। लगातार एक ही तरह की फसल लेने और फसल चक्र के कारण मिट्टी में कुछ आवश्यक पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। यमुनानगर में गेहूं, धान, गन्ना और कुछ क्षेत्रों में सरसों के अलावा पॉपलर की खेती भी होती है।

उन्होंने कहा कि किसान पारंपरिक तौर पर डीएपी, यूरिया और जिंक का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन मिट्टी में मौजूद अन्य पोषक तत्वों और उनकी वास्तविक जरूरत का पता मिट्टी की जांच के बाद ही चल सकता है। इसके आधार पर यह तय किया जा सकता है कि किस फसल में कितनी मात्रा में कौन-सा उर्वरक इस्तेमाल करना है। पिछले साल यमुनानगर में 1,10,158 मिट्टी के नमूने प्राप्त हुए थे। इन सभी नमूनों की प्रयोगशाला में जांच की गई और किसानों को उनकी मिट्टी की रिपोर्ट यानी मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराया गया।

--आईएएनएस

डीकेएम/एबीएम

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