एमपीएससी ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक पर संदीप देशपांडे ने सरकार को घेरा, कहा-किसे बचाना चाहती है सरकार
मुंबई, 26 अगस्त (आईएएनएस)। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) द्वारा आयोजित ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद उसे रद्द कर दिया गया है। इस मामले को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता संदीप देशपांडे ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
संदीप देशपांडे ने कहा, "पीएम मोदी पिछले एक महीने से कह रहे हैं कि वे पेपर लीक के मामले को लेकर बहुत गंभीर हैं और उन्होंने संसद में एक नया नियम भी पास किया है कि ऐसे मामलों से बहुत सख्ती से निपटा जाएगा। अब, जब महाराष्ट्र में एमपीएससी ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा का पेपर लीक हुआ है और पुलिस जांच में भी यह माना गया है कि लीक हुआ था, जिसमें परीक्षा से दो दिन पहले ही किसी को प्रश्न-पत्र मिल गया था, तो मेरा सवाल यह है कि जब आपने मान लिया है कि पेपर लीक हुआ था और परीक्षा से पहले पेपर किसी के पास था, तो एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई।"
उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, "सरकार एफआईआर क्यों दर्ज नहीं कर रही है? जब शुरुआती जांच में यह बात साबित हो गई है, तो आप एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कर रहे हैं? आप किसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं? क्या इन पेपर लीक मामलों में सरकारी एजेंसियों की कोई मिलीभगत है? इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए।"
वहीं, महाराष्ट्र में मराठी भाषा के मुद्दे पर भी मनसे नेता ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मनसे मराठी भाषा को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है। देशपांडे ने बताया, "कुछ दिन पहले, मुझे लगता है दो या तीन दिन पहले, हमने हिंदी बोलने वाले ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों के लिए क्लास आयोजित की थी। लगभग 5,000 ऑटो-रिक्शा मालिक हमारे पास आए और परीक्षा दी। हमने उन्हें मराठी सिखाई।"
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, "भारतीय जनता पार्टी ने कुछ ऐसे तत्व खड़े किए हैं जो 'मराठी मानुष' और दूसरी भाषाएं बोलने वाले लोगों के बीच साफ तौर पर बंटवारा पैदा करना चाहते हैं। मुझे लगता है कि इसके पीछे उनका यही मकसद है। हम उनकी इन चालों में नहीं फंसने वाले हैं। 95 प्रतिशत ऑटो रिक्शा चलाने वाले लोग मराठी सीखने के लिए तैयार हैं, केवल कुछ लोग हैं जो इसे सीखना नहीं चाहते हैं।"
इसके अलावा, मुंबई में एक कॉन्ट्रैक्टर की आत्महत्या के मामले पर भी संदीप देशपांडे ने राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र में स्थिति बहुत दुखद है। आप महाराष्ट्र के विकास की बात तो करते हैं, लेकिन जो लोग विकास का काम कर रहे हैं, उन्हें पैसे नहीं मिल रहे हैं। महाराष्ट्र कभी आर्थिक रूप से मजबूत और स्वतंत्र राज्य हुआ करता था। अगर आप कॉन्ट्रैक्टरों को भुगतान नहीं करेंगे, तो विकास के काम कैसे होंगे?"
--आईएएनएस
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