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बिहार के वैशाली में मातम: गंगा में नाव डूबने से 13 लोगों की दर्दनाक मौत, आपदा के बीच मिसाल बनी 15 साल की बच्ची!

बिहार के वैशाली में मातम: गंगा में नाव डूबने से 13 लोगों की दर्दनाक मौत, आपदा के बीच मिसाल बनी 15 साल की बच्ची!

बिहार के वैशाली जिले में गंगा नदी में हुए दर्दनाक नाव हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इस दुर्घटना में 13 बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है। कई परिवारों की खुशियां मातम में बदल गईं। लेकिन इस त्रासदी के बीच 17 साल की चांदनी की बहादुरी की कहानी भी सामने आई है, जिसने अपनी जान की परवाह किए बिना तीन बच्चों को बचाने की कोशिश की और उनकी जान बचाई। हालांकि, वह अपनी बहन को नहीं बचा सकी। 

कैसे हुआ दर्दनाक हादसा?

यह घटना मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 की रात वैशाली जिले के राघोपुर इलाके में रामपुर श्यामचंद गांव के पास हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, नाव पर सवार बच्चे गंगा पार करके एक श्राद्ध भोज में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान नाव नदी में पलट गई और उसमें सवार लोग पानी में डूबने लगे। हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय लोग बचाव के लिए पहुंचे। प्रशासन और आपदा राहत दलों ने भी रेस्क्यू अभियान चलाया। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, 13 बच्चों की मौत हुई, जबकि कई लोगों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। 

चांदनी ने दिखाई बहादुरी, तीन बच्चों को बचाया

इस बड़े हादसे के बीच 17 वर्षीय चांदनी की हिम्मत की कहानी सामने आई है। खबरों के मुताबिक, नाव पलटने के बाद उसने संकट में फंसे बच्चों को बचाने की कोशिश की और तीन बच्चों की जान बचाई। लेकिन इस हादसे में उसकी अपनी बहन पिंकी की मौत हो गई।एक तरफ चांदनी की बहादुरी लोगों के लिए मिसाल बनी, तो दूसरी तरफ अपनी बहन को खोने का दर्द इस घटना को और भी हृदयविदारक बना देता है। गांव में पसरा मातम, परिवारों का रो-रोकर बुरा हालहादसे में कई बच्चों की मौत के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। परिवार अपने बच्चों को खोने के गम में डूबे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, मृतकों में एक ही परिवार के कई बच्चे भी शामिल थे, जिससे परिजनों का दुख और बढ़ गया है।

मुआवजे का ऐलान, बचाव और जांच पर नजर

इस घटना के बाद बिहार सरकार ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से भी मृतकों के परिवारों के लिए दो-दो लाख रुपये की सहायता घोषित किए जाने की खबर है। हादसे के कारणों और नाव की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि नदी में यात्रा के दौरान नाव की स्थिति, क्षमता और सुरक्षा नियमों का पालन कितना जरूरी है। हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों के परिवारों के प्रति संवेदना और संकट के बीच दूसरों को बचाने की कोशिश करने वाली चांदनी के साहस को सलाम।

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