मदर्स डे विशेष : चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के व्यक्तित्व को गढ़ने में मां के संस्कारों की अहम भूमिका
बीजिंग, 10 मई (आईएएनएस)। रविवार, 10 मई को 'मदर्स डे' के अवसर पर जारी एक विशेष रिपोर्ट में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और उनकी माता छि शिन के बीच के गहरे और हृदयस्पर्शी संबंधों को उजागर किया गया है।
वर्ष 1969 में, मात्र 16 वर्ष की आयु में, शी चिनफिंग पश्चिमोत्तर चीन के शैनशी प्रांत के उत्तरी क्षेत्र में स्थित लियांगच्याहे नामक गांव में रहने चले गए। उस समय उनकी माता छि शिन ने उनके लिए एक छोटा सिलाई थैला बनाया, जिस पर चीनी भाषा में 'मां का दिल' शब्द कढ़ाई किए गए थे। यह थैला सात वर्षों तक शी चिनफिंग के साथ रहा और उनके संघर्ष, मेहनत तथा विकास का साक्षी बना।
शी चिनफिंग की मां स्वयं एक क्रांतिकारी सेनानी थीं। उन्होंने शैनशी-कांसू-निंग्श्या सीमा क्षेत्र में दशकों तक जमीनी स्तर पर काम किया। उन्होंने कभी किसी विशेष सुविधा की अपेक्षा नहीं की और हमेशा दूसरों के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके संस्कारों का शी चिनफिंग के व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव पड़ा।
बचपन में उनकी मां उन्हें देशभक्ति से जुड़ी कहानियां सुनाया करती थीं। इनमें प्रसिद्ध देशभक्त योद्धा य्वे फेई की कहानी भी शामिल थी, जिनकी मां ने उनकी पीठ पर देशभक्ति के अक्षर गुदवाए थे। शी चिनफिंग ने एक बार कहा था कि तभी से 'देश की पूर्ण निष्ठा से सेवा' करने का भाव उनके मन में गहराई से बस गया और वही उनके जीवन का लक्ष्य बन गया।
वर्ष 2001 में चीनी नव वर्ष के दौरान, शी चिनफिंग फूच्येन प्रांत के तत्कालीन राज्यपाल के रूप में कार्यरत थे। काम की व्यस्तता के कारण वह घर नहीं लौट सके। उस समय उनकी मां ने फोन पर उनसे कहा, ''बेटा, तुम्हारा काम सबसे महत्वपूर्ण है। मुझे तुम पर गर्व है। तुम्हारे घर आने से अधिक जरूरी है कि तुम अपने कर्तव्यों का अच्छे से पालन करो। अपने दायित्व निभाना ही माता-पिता के प्रति सबसे बड़ी संतानोचित भक्ति है। मैं हमेशा तुम्हारा समर्थन करूंगी।''
जब शी चिनफिंग ने देश का सर्वोच्च पद संभाला, तब भी उनकी मां ने उन्हें विनम्रता और अनुशासन का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा, ''जितनी ऊंचाई, उतनी अधिक सतर्कता'' आवश्यक होती है। उनका जीवन मंत्र था, ''काम ईमानदारी से करो, लगातार अध्ययन करो और हर चीज को व्यवस्थित रखो।''
मां के दिए संस्कार और 'मां का दिल' वाला वह छोटा थैला आज भी शी चिनफिंग के जनसेवा के समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
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