एयरलाइंस के 25% से ज्यादा फ्लाइट क्रू का होगा रैंडम ड्रग टेस्ट, वीडियो में जाने DGCA सख्त करने जा रहा नियम
देश में हवाई यात्रियों की सुरक्षा को लेकर DGCA फ्लाइट क्रू की ड्रग टेस्टिंग व्यवस्था को और सख्त करने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी DGCA सभी भारतीय एयरलाइंस के फ्लाइट क्रू के 25% से ज्यादा सदस्यों की हर साल रैंडम जांच अनिवार्य कर सकता है। इस जांच में यूरिन सैंपल के जरिए साइकोएक्टिव पदार्थों की स्क्रीनिंग की जाएगी। फिलहाल लागू व्यवस्था में हर साल कम से कम 10% संबंधित क्रू की रैंडम यूरिन टेस्टिंग जरूरी है।
DGCA का प्रस्तावित कदम ऐसे समय सामने आया है, जब फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स यानी FIP ने भी नियमों में बदलाव की मांग की है। FIP ने एक दिन पहले DGCA से वार्षिक रैंडम ड्रग टेस्टिंग का दायरा बढ़ाकर कम से कम 25% करने का सुझाव दिया था। संगठन ने यूरिन टेस्ट के साथ ओरल-फ्लूड टेस्टिंग को भी शामिल करने की मांग की है।
एयर इंडिया की फ्लाइट घटना के बाद बढ़ी सख्ती
फ्लाइट क्रू की जांच को लेकर यह सख्ती 4 अगस्त को एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट AI-2379 से जुड़ी घटना के बाद बढ़ी है। इस उड़ान के दौरान विमान ने ओडिशा के ऊपर अचानक करीब 300 फीट की ऊंचाई खो दी थी। घटना में 20 यात्री और चार केबिन क्रू सदस्य घायल हुए थे। विमान में आई तकनीकी समस्या, जिसमें ट्रिपल हाइड्रोलिक फेल्योर की रिपोर्ट भी सामने आई, की जांच DGCA और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो यानी AAIB कर रहे हैं।
घटना के बाद फ्लाइट के पायलट को ड्यूटी से हटा दिया गया था। रिपोर्ट्स में पायलट के ड्रग टेस्ट को लेकर भी गंभीर जानकारी सामने आई। हालांकि, किसी टेस्ट में पदार्थ की मौजूदगी अपने आप यह साबित नहीं करती कि पायलट उड़ान के समय नशे के प्रभाव में था। FIP ने भी इसी वजह से टेस्टिंग के बाद मेडिकल जांच और कन्फर्मेटरी लैब टेस्ट की प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया है।
एयर इंडिया ने सभी ग्रुप पायलटों की जांच शुरू की
AI-2379 घटना के बाद एयर इंडिया ने अपने पूरे ग्रुप के पायलटों की व्यापक ड्रग और प्रतिबंधित पदार्थों की जांच शुरू कर दी है। यह भियान 13 अगस्त से शुरू हुआ और इसके तहत एयर इंडिया तथा एयर इंडिया एक्सप्रेस के हजारों पायलटों की स्क्रीनिंग की जा रही है। टेस्ट के परिणाम DGCA को भी सौंपे जा रहे हैं।इस दौरान कुछ पायलटों की शुरुआती ड्रग स्क्रीनिंग में नॉन-नेगेटिव परिणाम भी सामने आए हैं। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष कन्फर्मेटरी टेस्ट और संबंधित जांच के बाद ही निकाला जाएगा।
FIP ने ओरल-फ्लूड टेस्ट का भी दिया सुझाव
FIP ने DGCA को दिए प्रस्ताव में कहा है कि यूरिन टेस्ट के साथ ओरल-फ्लूड टेस्ट को भी शामिल किया जा सकता है। संगठन के मुताबिक, इससे एयरपोर्ट और अन्य जगहों पर बड़ी संख्या में क्रू की तेजी से जांच संभव होगी।पायलट संगठन ने 12 महीने का नियंत्रित पायलट प्रोग्राम शुरू करने का भी सुझाव दिया है, ताकि ओरल-फ्लूड टेस्ट की सटीकता, लागत, जांच की गति और व्यावहारिकता का आकलन किया जा सके। साथ ही संगठन ने यह भी कहा है कि किसी पदार्थ का टेस्ट में मिलना अकेले पायलट के नशे में होने का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।DGCA की प्रस्तावित सख्ती लागू होने पर हर साल पहले के मुकाबले ढाई गुना से ज्यादा फ्लाइट क्रू की रैंडम जांच हो सकेगी। इससे एविएशन सेक्टर में सुरक्षा मानकों को मजबूत करने और यात्रियों का भरोसा बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

