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राजस्थान में मानसून पड़ा धीमा: 24 जिलों में सामान्य से कम बारिश, वीडियो में जाने 34 जिलों में खरीफ बुआई पिछड़ी; 15 जुलाई से फिर रफ्तार पकड़ने की उम्मीद

राजस्थान में मानसून पड़ा धीमा: 24 जिलों में सामान्य से कम बारिश, वीडियो में जाने 34 जिलों में खरीफ बुआई पिछड़ी; 15 जुलाई से फिर रफ्तार पकड़ने की उम्मीद

राजस्थान में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है। प्रदेश में बारिश की गतिविधियां कम होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। मौसम विभाग ने शनिवार को कुछ जिलों में बारिश की संभावना जताई है, लेकिन राज्य के कई हिस्सों में अभी भी पर्याप्त बारिश का इंतजार है।

मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार को श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूं, कोटपूतली-बहरोड़, अलवर, डीग, भरतपुर और धौलपुर जिलों में बारिश होने की संभावना है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

बीते 24 घंटे में अलवर-श्रीगंगानगर में सबसे ज्यादा बारिश

पिछले 24 घंटे में प्रदेश के कुछ जिलों में बारिश दर्ज की गई। अलवर, श्रीगंगानगर और चूरू में सबसे ज्यादा बारिश हुई। हालांकि, राज्य के कई अन्य जिलों में मानसून की सक्रियता कमजोर रही।मौसम विभाग का अनुमान है कि 15 जुलाई से प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो सकता है। इसके बाद कई इलाकों में बारिश का दौर तेज होने की संभावना जताई गई है।

24 जिलों में सामान्य से कम बारिश, खरीफ बुआई प्रभावित

कम बारिश का सीधा असर खेती पर देखने को मिल रहा है। राजस्थान के 24 जिले ऐसे हैं, जहां अब तक सामान्य या उससे कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश की कमी के कारण प्रदेश के 34 जिलों में खरीफ फसलों की बुआई पिछड़ गई है।आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में इस साल अब तक करीब 30 प्रतिशत कम बुआई हुई है। किसान अब अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, ताकि खरीफ फसलों की बुआई में तेजी लाई जा सके।

पूर्वी राजस्थान में 16 जुलाई तक बारिश के आसार

मौसम विभाग ने पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान के लिए अलग-अलग पूर्वानुमान जारी किया है। पूर्वी राजस्थान के जयपुर, भरतपुर, कोटा और उदयपुर संभागों में 16 जुलाई तक कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना जताई गई है।इसके अलावा बीकानेर संभाग में भी बारिश के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार, सिरोही, उदयपुर, झालावाड़ और बारां जिलों में भी बारिश हो सकती है।

किसानों को मानसून की वापसी का इंतजार

राजस्थान की खेती काफी हद तक मानसून पर निर्भर है। ऐसे में बारिश की कमी से किसानों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। खासतौर पर खरीफ फसलों के लिए समय पर बारिश बेहद जरूरी होती है।मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून सिस्टम के दोबारा सक्रिय होने के बाद प्रदेश में बारिश की स्थिति बेहतर हो सकती है। फिलहाल प्रशासन और मौसम विभाग लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

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