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2026 का मानसून रहा 13वां सबसे सूखा, दो मिनट के वीडियो में जाने राजस्थान में 22% कम बारिश

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देशभर में इस साल का मानसून सीजन बारिश के लिहाज से कमजोर रहा। 2026 का मानसून सामान्य से 12.6 प्रतिशत कम बारिश के साथ समाप्त हुआ। इसे देश के अब तक के 13 सबसे सूखे मानसून सीजन में शामिल किया गया है। खास बात यह है कि पिछले 11 वर्षों में यह सबसे कम बारिश वाला मानसून रहा। हालांकि, मानसून सीजन के अंतिम दौर में कई इलाकों में हुई तेज बारिश के कारण कुल बारिश की कमी में करीब 2.5 प्रतिशत का सुधार दर्ज किया गया।मौसम के आंकड़ों के मुताबिक, इस बार देश के कई हिस्सों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई। करीब 43 प्रतिशत जिलों में 20 से 72 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई। इसका असर खेती, जल स्रोतों और ग्रामीण क्षेत्रों की गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। मानसून भारत की कृषि व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, ऐसे में बारिश में बड़ी कमी का असर कई क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है।

पंजाब में सबसे ज्यादा बारिश की कमी

राज्यों की बात करें तो पंजाब इस साल मानसून की कमी के मामले में सबसे आगे रहा। यहां सामान्य से करीब 41 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। इसके बाद राजस्थान में भी मानसून कमजोर रहा और राज्य में करीब 22 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई। राजस्थान जैसे बड़े और कई हिस्सों में कम बारिश वाले राज्य के लिए मानसून की यह कमी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।पंजाब और राजस्थान के अलावा देश के नौ अन्य राज्यों में भी औसत से कम बारिश रिकॉर्ड की गई। बारिश के असमान वितरण के कारण कुछ क्षेत्रों में पानी की कमी की स्थिति बनी, जबकि दूसरी तरफ कुछ राज्यों में सामान्य से अधिक बारिश हुई।

ओडिशा में सामान्य से 30% ज्यादा बारिश

जहां देश के कई राज्यों में बारिश की कमी रही, वहीं पूर्वी भारत के ओडिशा में तस्वीर अलग रही। राज्य में सामान्य से करीब 30 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। इससे पता चलता है कि इस मानसून के दौरान देशभर में बारिश का वितरण एक समान नहीं रहा।एक तरफ कुछ राज्यों में मानसून कमजोर रहा, वहीं दूसरी तरफ कुछ क्षेत्रों में सामान्य से काफी अधिक बारिश हुई। इससे कई जगह बाढ़ और जलभराव जैसी स्थितियां भी सामने आईं।

पूर्वोत्तर में 1901 के बाद सबसे कम बारिश

पूर्वोत्तर भारत में इस साल मानसून का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा। बारिश के लिए प्रसिद्ध माने जाने वाले पूर्वोत्तर राज्यों में 1901 के बाद इस साल सबसे कम बारिश दर्ज की गई। इस क्षेत्र के लिए यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पूर्वोत्तर भारत आमतौर पर देश के अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में शामिल रहा है।कुल मिलाकर 2026 का मानसून देश के लिए बारिश के लिहाज से कमजोर रहा। सीजन के अंतिम दिनों में हुई तेज बारिश ने बारिश की कुल कमी को कुछ हद तक कम जरूर किया, लेकिन इसके बावजूद मानसून सामान्य स्तर से काफी नीचे रहा। अब आने वाले महीनों में कम बारिश का असर जलाशयों, भूजल स्तर, कृषि और अन्य क्षेत्रों पर कितना पड़ता है, इस पर नजर रहेगी।

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