Monsoon 2026: देश में 12.6% कम बारिश के साथ मानसून सीजन खत्म, पंजाब-राजस्थान समेत कई राज्यों में कमी
देश में इस साल का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से 12.6% कम बारिश के साथ समाप्त हुआ। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, यह पिछले करीब 11 वर्षों में सबसे कम बारिश वाला मानसून सीजन रहा। हालांकि, सितंबर के आखिरी सप्ताह में हुई तेज बारिश से बारिश की कुल कमी में करीब 2.5 प्रतिशत की भरपाई हुई।
देश के करीब 43% जिलों में सामान्य से 20% से 72% तक कम बारिश दर्ज की गई। पंजाब में सबसे ज्यादा करीब 41% बारिश की कमी रही, जबकि राजस्थान में करीब 22% कम बारिश हुई। इसके अलावा नौ अन्य राज्यों में भी औसत से कम बारिश रिकॉर्ड की गई।
पूर्वी भारत में ओडिशा में ज्यादा बारिश
देश के अलग-अलग हिस्सों में मानसून का प्रदर्शन अलग रहा। पूर्वी भारत में ओडिशा में सामान्य से करीब 30% अधिक बारिश दर्ज की गई।
वहीं, पूर्वोत्तर भारत में इस साल बारिश की स्थिति कमजोर रही। क्षेत्र में 1901 के बाद सबसे कम मानसूनी बारिश दर्ज होने की बात सामने आई है। मेघालय में भी सामान्य से करीब 60% कम बारिश हुई।
10 अक्टूबर तक मानसून की पूरी विदाई
दक्षिण-पश्चिम मानसून की देश से वापसी 19 सितंबर से शुरू हो चुकी थी। आने वाले दिनों में राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बाकी हिस्सों के अलावा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात और मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों से भी मानसून की विदाई होने की संभावना है।
बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों से भी मानसून वापस लौटेगा। हालांकि, दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में बारिश का दौर जारी रह सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार, 10 अक्टूबर तक दक्षिण-पश्चिम मानसून के पूरे देश से विदा होने की संभावना है। इसके बाद 15 अक्टूबर के बाद दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों में उत्तर-पूर्व मानसून सक्रिय हो सकता है।
सितंबर की बारिश ने सुधारा आंकड़ा
मानसून की विदाई से पहले सितंबर के आखिरी सप्ताह में देश में सामान्य से करीब 50% अधिक बारिश हुई। इससे पहले बारिश की कमी करीब 15% थी, जो सीजन खत्म होने तक घटकर 12.6% रह गई।
पूरे 122 दिन के मानसून सीजन के दौरान करीब 77 दिनों में कोई न कोई मौसमी सिस्टम सक्रिय रहा। इसके कारण अलग-अलग हिस्सों में बारिश होती रही और कुल कमी कुछ हद तक कम हुई।
282 जिलों में सामान्य से कम बारिश
देश के करीब 38% हिस्से यानी 282 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। बारिश में कमी का असर जलाशयों के जलस्तर पर भी दिखाई दिया।
24 सितंबर तक देश के 150 प्रमुख जलाशयों में करीब 130 अरब घन मीटर (BCM) पानी उपलब्ध था। इन जलाशयों की कुल क्षमता 182.4 BCM है, यानी वे करीब 71% भरे हुए थे। हालांकि, पिछले साल की समान अवधि की तुलना में इस बार जल भंडार कम बताया गया है।
अल नीनो और IOD पर नजर
मानसून के दौरान अल नीनो को लेकर पहले से चिंता जताई जा रही थी। हालांकि, पूरे देश में बारिश की स्थिति एक समान खराब नहीं रही।
ICICI बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) इंडेक्स 0.76 के पॉजिटिव जोन में पहुंचा है। सकारात्मक IOD से अल नीनो के प्रतिकूल प्रभावों की कुछ हद तक भरपाई होने की संभावना जताई गई है। हालांकि, अल नीनो अभी भी मानसून के लिए एक प्रमुख मौसमी जोखिम बना हुआ है।

