मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, रवि शंकर तिवारी गिरफ्तार
नई दिल्ली, 16 जुलाई (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुख्यालय जांच इकाई ने रवि शंकर तिवारी उर्फ रवि तिवारी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत 14 जुलाई 2026 को लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी (एलयूसीसी) और अन्य के मामले में चल रही जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया है।
उन्हें 15 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश - 7 के समक्ष पेश किया गया और न्यायालय ने उन्हें 10 दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया है।
ईडी ने उत्तर प्रदेश के ललितपुर और मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी (एलयूसीसी), लस्टनेस जनहित क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (एलजेसीसी), और ऑप्शन वन इंडस्ट्रीज लिमिटेड के खिलाफ जांच शुरू की।
इन कंपनियों ने जनता को हाई रिटर्न का वादा करके जमा योजनाओं में निवेश करने के लिए प्रेरित किया और निवेश की गई राशि का गबन किया।
इन संस्थाओं और इनके सहयोगियों के खिलाफ देश भर के विभिन्न राज्यों में कई एफआईआर दर्ज की गई हैं। यह धोखाधड़ी और निवेशित धन के गबन का मामला है, जिसमें अन्य आपराधिक अपराधों के अलावा, 30.51 लाख से अधिक निवेशकों के लगभग 10,314 करोड़ रुपए का गबन शामिल है। उपर्युक्त संस्थाओं ने अखिल भारतीय स्तर पर काम किया।
ईडी की जांच में पता चला कि रवि शंकर तिवारी 2009 से समीर अग्रवाल के नेतृत्व वाले सागा ग्रुप नेटवर्क से एक वरिष्ठ पदाधिकारी के रूप में जुड़े हुए थे। वे एडवांटेज ट्रेडकॉम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ऑप्शन वन इंडस्ट्रीज लिमिटेड, एलयूसीसी और अन्य सागा ग्रुप कंपनियों के टीम लीडर भी थे, और एलयूसीसी और एलजेसीसी के संचालन में समीर अग्रवाल (जो वर्तमान में विदेश में रहते हैं) की सक्रिय रूप से सहायता करते थे। पीएमएलए, 2002 की धारा 50 के तहत दर्ज किए गए उनके बयानों से अपराध में उनकी संलिप्तता और उक्त सागा ग्रुप कंपनियों में उनकी भूमिका का पता चला। जांच में यह भी पता चला कि रवि शंकर तिवारी और उनके परिवार के सदस्यों को सागा ग्रुप कंपनियों से विभिन्न बैंक खातों में भारी जमा राशि प्राप्त हुई, जिसके लिए वे कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाए।
जांच में यह भी पता चला कि रवि शंकर तिवारी की कई संस्थाओं में हिस्सेदारी थी, जिनका इस्तेमाल अपराध से प्राप्त धन की प्राप्ति, हस्तांतरण और निकासी के लिए किया जाता था।
उन्होंने अपराध से प्राप्त धन से अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर कई आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियां भी हासिल की थीं। इस मामले में पहले ही ईडी द्वारा अचल संपत्तियों की कुर्की की जा चुकी है। आगे की जांच जारी है।
--आईएएनएस
एमएस/

