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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अल फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक जावेद अहमद सिद्दीकी की जमानत याचिका खारिज

नई दिल्ली, 3 मई (आईएएनएस)। दिल्ली के साकेत कोर्ट का एक अहम फैसला सामने आया है। साउथ ईस्ट डिस्ट्रिक्ट की एडिशनल सेशंस जज-02 की अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी जावेद अहमद सिद्दीकी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत दर्ज केस से जुड़ा है।
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अल फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक जावेद अहमद सिद्दीकी की जमानत याचिका खारिज

नई दिल्ली, 3 मई (आईएएनएस)। दिल्ली के साकेत कोर्ट का एक अहम फैसला सामने आया है। साउथ ईस्ट डिस्ट्रिक्ट की एडिशनल सेशंस जज-02 की अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी जावेद अहमद सिद्दीकी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत दर्ज केस से जुड़ा है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि शुरुआती जांच में ही ऐसे कई ठोस सबूत सामने आए हैं, जो बताते हैं कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी के जरिए बड़े स्तर पर धोखाधड़ी की गई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुताबिक, इस पूरे मामले में करीब 493.24 करोड़ रुपये की प्रोसीड्स ऑफ क्राइम, यानी अवैध कमाई का पता चला है।

कोर्ट ने जिन सबूतों पर भरोसा किया, उनमें व्हाट्सएप चैट, बैंक खातों का विश्लेषण, शेयर ट्रांसफर से जुड़े दस्तावेज और कई डिजिटल रिकॉर्ड शामिल हैं।

जांच में सामने आया कि जावेद अहमद सिद्दीकी अल-फलाह यूनिवर्सिटी, उससे जुड़े ट्रस्ट और अन्य संस्थाओं को कंट्रोल करता था। आरोप है कि यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर फर्जी मान्यताएं दिखाई गईं, जैसे एनएएसी और यूजीसी की, जबकि वे या तो खत्म हो चुकी थीं या थीं ही नहीं। इतना ही नहीं, एनएएसी की नोटिस के बाद सबूत मिटाने के निर्देश भी दिए गए।

आरोप यह भी है कि आरोपी ने फर्जी फैकल्टी रिकॉर्ड दिखाकर एनएमसी और हरियाणा सरकार को गुमराह किया, जिससे जरूरी अनुमति और सर्टिफिकेट हासिल किए गए। इसके जरिए एडमिशन के नाम पर भारी रकम वसूली गई, जिसे बाद में अलग-अलग कंपनियों के जरिए घुमाया गया।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह पैसा आमला एंटरप्राइजेज एलएलपी', 'करकुन कंस्ट्रक्शन डेवलपर्स' और 'दियाला कंस्ट्रक्शन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड' के माध्यम से हेरफेर किया गया, जो आरोपी और उसके परिवार के नियंत्रण में थीं। इन फंड्स को निजी खातों, बाजार और यहां तक कि दुबई में निवेश तक पहुंचाया गया।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि आरोपी का आपराधिक इतिहास भी गंभीर है। उसके खिलाफ पहले से ही धोखाधड़ी, जालसाजी और भरोसे के उल्लंघन जैसे कई मामले दर्ज रहे हैं। साथ ही, हाल के कुछ मामलों में भी उसका नाम सामने आया है।

अदालत ने कहा कि पीएमएलए की धारा 45 के तहत जमानत के लिए जरूरी शर्तें आरोपी पूरी नहीं कर पाया। न तो यह साबित हो पाया कि वह निर्दोष है और न ही यह भरोसा दिला सका कि बाहर आने पर दोबारा अपराध नहीं करेगा। इसके अलावा सीआरपीसी की धारा 439 के तहत भी ट्रिपल टेस्ट में वह फेल रहा। इसका मुख्य कारण विदेश में संपत्ति होने के चलते उसके देश छोड़कर भाग जाने का खतरा, सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की आशंका और उसके सीधे नियंत्रण में काम करने वाले कर्मचारियों व लेखाकारों जैसे संस्थागत गवाहों को प्रभावित करने की क्षमता थे।

--आईएएनएस

पीआईएम/पीएम

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