Samachar Nama
×

मोहिनी एकादशी पर बन रहा खास संयोग, जानें क्या-क्या अर्पित करने से भगवान विष्णु होंगे प्रसन्न

नई दिल्ली, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। सनातन धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। हर महीने आने वाली एकादशी श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आस्था और भक्ति का प्रतीक होती है, लेकिन वैशाख माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली मोहिनी एकादशी का महत्व सबसे अलग है। मान्यता है कि मोहिनी एकादशी का व्रत करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सकारात्मकता आती है।
मोहिनी एकादशी पर बन रहा खास संयोग, जानें क्या-क्या अर्पित करने से भगवान विष्णु होंगे प्रसन्न

नई दिल्ली, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। सनातन धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। हर महीने आने वाली एकादशी श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आस्था और भक्ति का प्रतीक होती है, लेकिन वैशाख माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली मोहिनी एकादशी का महत्व सबसे अलग है। मान्यता है कि मोहिनी एकादशी का व्रत करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सकारात्मकता आती है।

वैदिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में मोहिनी एकादशी का व्रत 27 अप्रैल, सोमवार को रखा जाएगा। एकादशी तिथि की शुरुआत 26 अप्रैल की शाम 6 बजकर 6 मिनट से होगी और इसका समापन 27 अप्रैल की शाम 6 बजकर 15 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर यह व्रत 27 अप्रैल को रखा जाएगा। इस दिन भक्त भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए उपवास रखेंगे।

धार्मिक मान्यताओं में मोहिनी एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन और नियमों के साथ यह व्रत करता है, उसके जीवन के दुख और परेशानियां दूर होती हैं। इतना ही नहीं, मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति भी प्राप्त होती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

मोहिनी एकादशी के दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 9 बजकर 2 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। इस दौरान पूजा करना बेहद शुभ माना गया है। श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और साफ वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। पूजा में भगवान विष्णु को चंदन, फूल, तुलसी के पत्ते और भोग अर्पित किया जाता है। माना जाता है कि इन चीजों को अर्पित करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते है।

मोहिनी एकादशी का संबंध समुद्र मंथन की कथा से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया था। समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत निकला तो असुर उसे पाने के लिए लालायित हो गए। तब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप लेकर देवताओं को अमृत पिलाया और असुरों से अमृत की रक्षा की। इसी वजह से इस एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है।

माना जाता है कि मोहिनी एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियमों के साथ करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

--आईएएनएस

पीके/एएस

Share this story

Tags