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'बदलाव बेहतर भविष्य के लिए जरूरी, देश को परिवर्तन की जरूरत', मोहन भागवत के बयान पर विपक्ष का तंज

'बदलाव बेहतर भविष्य के लिए जरूरी, देश को परिवर्तन की जरूरत', मोहन भागवत के बयान पर विपक्ष का तंज
'बदलाव बेहतर भविष्य के लिए जरूरी, देश को परिवर्तन की जरूरत', मोहन भागवत के बयान पर विपक्ष का तंज

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के सत्ता परिवर्तन से जुड़े बयान पर विपक्षी नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है। शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी, संजय राउत और अरविंद सावंत के साथ-साथ राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज कुमार झा और पंजाब सरकार में मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी।

विपक्षी नेताओं ने रोजगार, महंगाई, किसानों की स्थिति और निजीकरण जैसे मुद्दों को उठाते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। वहीं, नेताओं ने महात्मा गांधी के विचारों और देश में राजनीतिक बदलाव की जरूरत पर भी जोर दिया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि सत्ता परिवर्तन का मुद्दा किसी के निजी स्वार्थ से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य बेहतर भविष्य और बेहतर देश का निर्माण करना है।

उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग को बेहतर जीवन, रोजगार के अवसर और महंगाई से राहत मिलनी चाहिए। साथ ही, महिलाओं को सम्मान मिलना चाहिए, युवाओं को बेरोजगारी से मुक्ति मिलनी चाहिए और किसानों को उनका उचित सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में बदलाव का उद्देश्य आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए।

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश में एक ऐसा आंदोलन चल रहा है, जिसका उद्देश्य समाधान तलाशना है। उन्होंने दावा किया कि यह आंदोलन उसी दिशा में काम कर रहा है, जिसकी जरूरत देश को है।

राउत ने कहा कि भागवत भी सत्ता परिवर्तन चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में देश को नुकसान हुआ है। राउत ने कहा कि उनके नेतृत्व में चल रहा आंदोलन देश और समाज के हित में है।

शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने दशहरे की शुभकामनाएं देते हुए मोहन भागवत से आत्ममंथन करने की अपील की। उन्होंने भगवान राम की रावण पर विजय और पांडवों द्वारा शमी के पेड़ से हथियार उठाने की परंपरा का उल्लेख किया।

सावंत ने सवाल उठाया कि क्या देश के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का निजीकरण नहीं किया जा रहा है और क्या बेरोजगारी लगातार नहीं बढ़ रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि देश की संपत्तियों को बेचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सलाह देने वालों को मंच पर बैठे लोगों के कामकाज पर भी विचार करना चाहिए।

राजद सांसद मनोज कुमार झा ने मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भागवत को चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि भारत गांधी का देश है।

मनोज झा ने कहा कि संभव है कि कुछ लोग गांधी के विचारों में विश्वास न करते हों, क्योंकि उनकी विचारधारा गांधी की विचारधारा के विपरीत है। उन्होंने गांधी के असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि ये आंदोलन आज भी उनके लिए आदर्श हैं।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के विचार भारत की लोकतांत्रिक और राजनीतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

पंजाब सरकार में मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भी मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि युवा बदलाव चाहते हैं और दुनिया के कई हिस्सों में परिवर्तन के प्रयास किए जा रहे हैं।

चीमा ने आरोप लगाया कि मोहन भागवत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुश करने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की आकांक्षाओं और देश में बदलाव की मांग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि भारत को 'तोड़ने' की कोशिशें सफल नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि यह सोचना गलत है कि सत्ता बदलने से परिस्थितियां बदल जाएंगी। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है और आगे भी ऐसा नहीं होगा।

--आईएएनएस

एसएके/एएस

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