एमएलसी नतीजों के बाद विपक्ष ने कसा तंज, मतदान के अधिकार और चुनावी निष्पक्षता पर उठाए सवाल
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। एमएलसी चुनाव के नतीजों को लेकर विपक्षी नेताओं ने भाजपा पर निशाना साधा है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने मतदान के अधिकार का मुद्दा उठाते हुए भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा पर सवाल खड़े किए। वहीं, समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं ने चुनाव में कथित अनियमितताओं, प्रशासनिक दबाव और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोप लगाए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भाजपा की पदयात्रा पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्ष मतदान के अधिकार के लिए लड़ रहा है। उन्होंने कहा कि 13 करोड़ लोगों से मतदान का अधिकार छीन लिया गया है। यदि इन लोगों को उनका अधिकार वापस दे दिया जाए, तो ऐसी रैलियां निकालने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
एमएलसी चुनाव के नतीजों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी को लेकर भी मनीष तिवारी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हर चुनाव का अपना अलग संदर्भ और दायरा होता है। एमएलसी चुनावों में मतदाता वर्ग और चुनावी क्षेत्र भी अलग होते हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह की टिप्पणी करना शोभा नहीं देता। चुनावी परिणामों का आकलन करते समय उनकी परिस्थितियों और संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों की विशेषताओं को ध्यान में रखना चाहिए।
सपा प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने कहा कि चुनाव परिणामों ने उत्तर प्रदेश के शिक्षित वर्ग और युवाओं की भावनाओं को दर्शाया है। जिन सीटों पर सपा ने चुनाव लड़ा, वहां पिछले चुनाव की तुलना में पार्टी का वोट प्रतिशत कई गुना बढ़ा है। पार्टी ने कई नई सीटें जीतीं जबकि प्रशासनिक दबाव और पक्षपात के कारण कुछ सीटों पर उसे कम अंतर से हार का सामना करना पड़ा।
दिल्ली में सपा सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि कांग्रेस क्या कहती है, यह उसका अपना मामला है। उन्होंने एमएलसी चुनावों में विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सपा के प्रदर्शन की सराहना की और दावा किया कि पार्टी ने 11 में से पांच सीटें जीती हैं। मलिक ने आरोप लगाया कि उनके जिले में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों से हजारों नाम हटा दिए गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार कुल मतदान पिछले चुनाव की तुलना में कम रहा।
विपक्षी नेताओं के इन बयानों से स्पष्ट है कि एमएलसी चुनाव के नतीजों के बाद मतदान के अधिकार, मतदाता सूची और चुनावी निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। वहीं, चुनाव में कथित अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की पुष्टि संबंधित तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर होनी बाकी है।
--आईएएनएस
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