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सवाई माधोपुर में नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म: पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई 20-20 साल की कठोर कारावास की सजा

सवाई माधोपुर में नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म: पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई 20-20 साल की कठोर कारावास की सज

राजस्थान के सवाई माधोपुर में नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के मामले में पॉक्सो कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दो आरोपियों को दोषी मानते हुए 20-20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों पर 66-66 हजार रुपये का अर्थदण्ड भी लगाया गया।  मामले के अनुसार, नाबालिग बच्ची के साथ यह जघन्य अपराध एक बाड़े में बने कमरे में किया गया। आरोपियों ने बच्ची के साथ बारी-बारी से दुष्कर्म किया, जबकि एक आरोपी कमरे के बाहर पहरा दे रहा था। इस घटना ने पूरे इलाके में सन्नाटा और आक्रोश फैला दिया था।  कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अपराधियों के इस घिनौने कृत्य ने समाज और पीड़िता के जीवन को गहरा आघात पहुँचाया है। अदालत ने कहा कि इस तरह के मामलों में सख्त और निर्णायक कार्रवाई आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसे अपराधियों के लिए कड़ा संदेश जाए।  विशेष रूप से, अदालत ने एक आरोपी के खिलाफ पहले ही आजीवन कारावास और 75 हजार रुपये के अर्थदण्ड की सजा सुनाई थी। इसके बाद मामले के अन्य दो आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें 20-20 साल की कठोर कारावास और 66-66 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।  अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला न केवल पीड़िता और उसके परिवार के लिए न्याय की भावना को सशक्त करता है, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी संदेशपूर्ण है। अदालत ने इस मामले में यह स्पष्ट किया कि नाबालिगों के खिलाफ अपराध को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।  विशेषज्ञों का कहना है कि पॉक्सो अधिनियम के तहत नाबालिगों से जुड़े अपराधों में सख्त कारावास और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य अपराधियों को कड़ा संदेश देना और समाज में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।  स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने कहा कि उन्हें इस फैसले का पूरा समर्थन है और भविष्य में भी वे नाबालिगों के खिलाफ अपराधों के मामलों में तेजी और पारदर्शिता से जांच और कार्रवाई करेंगे। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई की अनुमति नहीं दी जाएगी।  सवाई माधोपुर के नागरिकों ने अदालत के फैसले की सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पीड़िता के साथ न्याय और समाज में सुरक्षा की भावना को मजबूत करता है। नागरिकों का कहना है कि ऐसे कठोर निर्णयों से भविष्य में बच्चों के खिलाफ अपराधों में कमी आएगी।  इस घटना ने यह भी स्पष्ट किया कि नाबालिगों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त कानूनी कदम उठाना कितना जरूरी है। कोर्ट का यह निर्णय बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए सुरक्षा और न्याय का संदेश है।  इस प्रकार, सवाई माधोपुर में पॉक्सो कोर्ट द्वारा सुनाई गई यह सजा नाबालिगों के खिलाफ अपराधों पर जीरो टॉलरेंस नीति को रेखांकित करती है और अपराधियों के लिए कड़ी चेतावनी भी है।

राजस्थान के सवाई माधोपुर में नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के मामले में पॉक्सो कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दो आरोपियों को दोषी मानते हुए 20-20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों पर 66-66 हजार रुपये का अर्थदण्ड भी लगाया गया।

मामले के अनुसार, नाबालिग बच्ची के साथ यह जघन्य अपराध एक बाड़े में बने कमरे में किया गया। आरोपियों ने बच्ची के साथ बारी-बारी से दुष्कर्म किया, जबकि एक आरोपी कमरे के बाहर पहरा दे रहा था। इस घटना ने पूरे इलाके में सन्नाटा और आक्रोश फैला दिया था।

कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अपराधियों के इस घिनौने कृत्य ने समाज और पीड़िता के जीवन को गहरा आघात पहुँचाया है। अदालत ने कहा कि इस तरह के मामलों में सख्त और निर्णायक कार्रवाई आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसे अपराधियों के लिए कड़ा संदेश जाए।

विशेष रूप से, अदालत ने एक आरोपी के खिलाफ पहले ही आजीवन कारावास और 75 हजार रुपये के अर्थदण्ड की सजा सुनाई थी। इसके बाद मामले के अन्य दो आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें 20-20 साल की कठोर कारावास और 66-66 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।

अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला न केवल पीड़िता और उसके परिवार के लिए न्याय की भावना को सशक्त करता है, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी संदेशपूर्ण है। अदालत ने इस मामले में यह स्पष्ट किया कि नाबालिगों के खिलाफ अपराध को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि पॉक्सो अधिनियम के तहत नाबालिगों से जुड़े अपराधों में सख्त कारावास और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य अपराधियों को कड़ा संदेश देना और समाज में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने कहा कि उन्हें इस फैसले का पूरा समर्थन है और भविष्य में भी वे नाबालिगों के खिलाफ अपराधों के मामलों में तेजी और पारदर्शिता से जांच और कार्रवाई करेंगे। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई की अनुमति नहीं दी जाएगी।

सवाई माधोपुर के नागरिकों ने अदालत के फैसले की सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पीड़िता के साथ न्याय और समाज में सुरक्षा की भावना को मजबूत करता है। नागरिकों का कहना है कि ऐसे कठोर निर्णयों से भविष्य में बच्चों के खिलाफ अपराधों में कमी आएगी।

इस घटना ने यह भी स्पष्ट किया कि नाबालिगों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त कानूनी कदम उठाना कितना जरूरी है। कोर्ट का यह निर्णय बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए सुरक्षा और न्याय का संदेश है।

इस प्रकार, सवाई माधोपुर में पॉक्सो कोर्ट द्वारा सुनाई गई यह सजा नाबालिगों के खिलाफ अपराधों पर जीरो टॉलरेंस नीति को रेखांकित करती है और अपराधियों के लिए कड़ी चेतावनी भी है।

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