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एमएफ हुसैन संघर्षों से उभरकर बने भारत के सबसे बड़े चित्रकार, विवादों की वजह से छोड़ दिया था देश

नई दिल्ली, 8 जून (आईएएनएस)। एमएफ हुसैन के नाम से मशहूर मकबूल फ़िदा हुसैन भारत के सबसे प्रसिद्ध और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त चित्रकारों में से एक थे। उन्होंने भारतीय आधुनिक कला को नई पहचान दी और अपनी अनूठी चित्रकला शैली से विश्वभर में सम्मान प्राप्त किया। हुसैन को अक्सर “भारत का पिकासो” कहा जाता है। हुसैन का जन्म 17 सितंबर 1915 को महाराष्ट्र के पंढरपुर में एक सुलेमानी बोहरा परिवार में हुआ था। 9 जून 2011 को लंदन में 95 वर्ष की आयु में उनकी मौत हो गई थी।
एमएफ हुसैन संघर्षों से उभरकर बने भारत के सबसे बड़े चित्रकार, विवादों की वजह से छोड़ दिया था देश

नई दिल्ली, 8 जून (आईएएनएस)। एमएफ हुसैन के नाम से मशहूर मकबूल फ़िदा हुसैन भारत के सबसे प्रसिद्ध और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त चित्रकारों में से एक थे। उन्होंने भारतीय आधुनिक कला को नई पहचान दी और अपनी अनूठी चित्रकला शैली से विश्वभर में सम्मान प्राप्त किया। हुसैन को अक्सर “भारत का पिकासो” कहा जाता है। हुसैन का जन्म 17 सितंबर 1915 को महाराष्ट्र के पंढरपुर में एक सुलेमानी बोहरा परिवार में हुआ था। 9 जून 2011 को लंदन में 95 वर्ष की आयु में उनकी मौत हो गई थी।

एमएफ हुसैन का बचपन आर्थिक कठिनाइयों में बीता। उनकी माता का निधन तब हो गया था जब वे बहुत छोटे थे। बड़ौदा के एक मदरसे में रहते हुए उन्होंने सुलेख का अध्ययन करके कला में रुचि विकसित की। हुसैन ने मुंबई के सर जमशेदजी जीजेभोय कला विद्यालय में दाखिला लिया, लेकिन शिक्षा पूरी नहीं कर सके। हुसैन ने अपने करियर के शुरुआती दौर में मुंबई में सिनेमा के पोस्टर बनाए। अधिक पैसा कमाने के लिए उन्होंने एक खिलौना कंपनी में खिलौनों के डिजाइन और निर्माण का काम किया। वे अक्सर गुजरात की यात्रा करते थे और वहां के परिदृश्यों को चित्रित करते थे।

हुसैन 1940 के दशक में भारतीय आधुनिकतावाद से जुड़ गए। उनका कोई स्टूडियो नहीं था, बल्कि वे जिस भी होटल में ठहरते थे, उसके फर्श पर ही अपने कैनवस फैला देते थे और चेक आउट करते समय हमेशा नुकसान की भरपाई करते थे।

हुसैन भारतीय आधुनिक कला आंदोलन के प्रमुख स्तंभों में से थे। वे 1947 में स्थापित प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। उनकी चित्रकला में भारतीय संस्कृति, पौराणिक कथाएं, ग्रामीण जीवन, घोड़े, महात्मा गांधी, मदर टेरेसा तथा महाभारत और रामायण जैसे विषय प्रमुख रूप से दिखाई देते हैं। उनकी शैली में चमकीले रंग, सशक्त रेखाएं, और आधुनिकतावादी दृष्टिकोण देखने को मिलता है। 20वीं सदी के सबसे प्रसिद्ध और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त भारतीय कलाकारों में से एक, उन्हें प्रिंटमेकर, फोटोग्राफर और फिल्म निर्माता के रूप में भी पहचान मिली।

एमएफ हुसैन की पेंटिंग्स को लेकर विवाद भी हुआ। हिंदू देवी-देवताओं की विवादित तस्वीर बनाकर हिंदुओं की भावना को ठेस पहुंचाई। विवादित पेंटिंग्स 1970 में बनाई गई थीं, लेकिन तब कोई विवाद नहीं हुआ। जब पेंटिंग्स हिंदी मासिक पत्रिका में छपीं तब विवाद शुरू हुआ। इसके बाद हुसैन के खिलाफ आठ आपराधिक शिकायतें दर्ज की गईं। 2004 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने शिकायतों को हुए खारिज कर दिया था। 1998 में बजरंग दल ने हुसैन के घर पर हमला किया और कलाकृतियों को तोड़फोड़ कर नुकसान पहुंचाया। राजनीतिक दल शिवसेना के नेतृत्व ने हमले का समर्थन किया। पुलिस ने बजरंग दल के 26 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। हुसैन के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के कारण इंग्लैंड में एक प्रदर्शनी भी बंद कर दी गई थी।

वे 2006 से 2011 में अपनी मृत्यु तक स्वेच्छा से निर्वासन में रहे और 2010 में कतर की नागरिकता स्वीकार कर ली। वे आम तौर पर दोहा में रहते थे और गर्मियों में लंदन में समय बिताते थे। अपने जीवन के अंतिम वर्षों में हुसैन दोहा और लंदन में रहे, भारत से दूर रहे लेकिन मुकदमा चलाए जाने के डर के बावजूद भारत लौटने की प्रबल इच्छा व्यक्त करते रहे।

हुसैन ने अपने जीवनकाल के अंत तक लगभग 40,000 चित्र बनाए थे। उनकी 1954 की कृति 'अनटाइटल्ड (ग्राम यात्रा)' मार्च 2025 में 13.75 मिलियन डॉलर में बिकी, जो उस समय आधुनिक भारतीय कला के किसी भी काम के लिए अब तक की सबसे अधिक कीमत थी। 'ग्राम यात्रा' एक विशाल बहु-पैनल वाली पेंटिंग है, जिसमें भारत के ग्रामीण जीवन को दर्शाने वाले 13 छोटे-छोटे चित्र शामिल हैं। उन्होंने फिल्म 'मोहब्बत' के एक दृश्य में अभिनय किया, जिसमें माधुरी दीक्षित मुख्य भूमिका में थीं। फिल्म में जिन चित्रों को माधुरी द्वारा बनाया गया बताया गया था, वे वास्तव में हुसैन के थे। उन्होंने गजा गामिनी (2000) सहित कई फिल्मों का निर्देशन भी किया है।

मक़बूल फ़िदा हुसैन केवल एक चित्रकार नहीं, बल्कि भारतीय आधुनिक कला के प्रतीक थे। उनकी रचनाओं ने भारतीय संस्कृति और परंपरा को आधुनिक कला के माध्यम से विश्व मंच तक पहुंचाया। आज भी उनकी कलाकृतियां कला प्रेमियों और कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। भारत सरकार ने एमएफ हुसैन को 1966 में पद्मश्री, 1973 में पद्म भूषण और 1991 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया। 1986 में उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया था।

--आईएएनएस

ओपी/पीएम

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