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मेरे करियर में एक समय ऐसा रहा, जब बहुत दबाव महसूस कर रहा था: एन. जगदीशन

मेरे करियर में एक समय ऐसा रहा, जब बहुत दबाव महसूस कर रहा था: एन. जगदीशन
मेरे करियर में एक समय ऐसा रहा, जब बहुत दबाव महसूस कर रहा था: एन. जगदीशन

नई दिल्ली, 21 सितंबर (आईएएनएस)। एन. जगदीशन हर घरेलू सीजन की शुरुआत अपने दिमाग में आंकड़ों का हिसाब लगाकर किया करते थे। वह सोचते थे कि पहले मैच और दूसरे मुकाबले में कितने रन बनाने होंगे, ताकि सीजन के अंत तक उनके आंकड़े इतने प्रभावशाली हों कि चयनकर्ताओं के लिए उन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल हो जाए। भारत के लिए खेलने की चाह में यह तरीका भले ही सही लग रहा था, लेकिन लगातार आंकड़ों और चयन की चिंता उन्हें अंदर ही अंदर परेशान कर रही थी।

मंगलवार से भारत-ए और ऑस्ट्रेलिया-ए के बीच अनाधिकारिक टेस्ट मैच शुरू होगा, जिससे पहले जगदीशन ने 'आईएएनएस' के साथ खास बातचीत में कहा, "मैं भारतीय टीम का हिस्सा बनने के लिए बहुत प्रेरित था और टीम में जगह बनाने के लिए, घरेलू सर्किट में मुझे क्या करना है, यह मैंने सीजन शुरू होने से पहले ही सोच लिया था। मेरे अपने लक्ष्य थे कि पहले और दूसरे मैच में कितने रन बनाने हैं, कितना स्कोर करना है? लेकिन जब आप असल में ऐसा कोई योजना बनाते हैं, तो अक्सर चीजें योजना के मुताबिक नहीं होतीं और अचानक, जब काम योजना के हिसाब से नहीं होता, तो आप पर बहुत दबाव आ जाता है। एक बार जब दबाव हावी हो जाता है, तो आप अपना स्वाभाविक खेल नहीं खेल पाते और खेल का लुत्फ भी नहीं उठा पाते।"

उन्होंने कहा, "आप बस बहुत ज्यादा दबाव लेने लगते हैं और मैदान पर खुलकर नहीं खेल पाते। मेरे करियर में एक समय ऐसा था जब मैं बहुत दबाव महसूस कर रहा था - चयन, अपने नतीजों, कितने रन बना रहा हूं, इन सब चीजों के बारे में सोच रहा था। तो, यह मेरे लिए बहुत मुश्किल समय था और यह कोई अच्छा एहसास नहीं था, क्योंकि खेल के लिए जो प्यार था, वह कहीं खो गया था। इसलिए, मैं बस खेल के लिए अपना प्यार वापस पाना चाहता था, क्योंकि जिस दिन मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया था, मेरा मकसद बस खेल का लुत्फ उठाना था, न कि किसी और चीज के बारे में सोचना।"

जगदीशन को भारत के पूर्व बल्लेबाज और चेन्नई सुपर किंग्स में उनके साथी रहे रॉबिन उथप्पा के रूप में एक मेंटॉर मिला। एक समय, उथप्पा ने जगदीशन के स्टांस और वजन के ट्रांसफर के बारे में कुछ कहा था। हालांकि, सीएसके से रिलीज होने के बाद वे दोनों अलग हो गए, लेकिन जगदीशन को वह बात याद रही, जिसे अपनी बल्लेबाजी में उसे लागू किया।

विजय हजारे ट्रॉफी 2022/23 में जगदीशन ने 8 मुकाबलों में पांच शतकों के साथ 830 रन कूट दिए। पांचवां शतक लगाने के बाद, उन्हें उथप्पा का फोन आया। उथप्पा ने पूछा कि उन्होंने अपनी बैटिंग में ऐसा क्या बदलाव किया है जिससे इतने सारे रन बन रहे हैं? जगदीशन को समझ नहीं आ रहा था कि इतने बड़े खिलाड़ी को इसमें दिलचस्पी क्यों होगी? फिर भी उन्होंने उथप्पा की दी हुई उस सलाह के बारे में बताया जिसे अपनाया था।

जगदीशन के पास आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट नहीं था। उन्हें एक ऐसे मेंटॉर की तलाश थी जो भारतीय टीम का हिस्सा रहा हो और उनके लक्ष्य को पाने में मदद कर सके। ऐसे में टी20 वर्ल्ड कप 2007 जीतने वाली टीम के सदस्य उथप्पा का साथ मिला। जगदीशन ने बताया, "हम बस जिंदगी के बारे में बात कर रहे थे और अचानक मैंने उनसे कहा कि मैं सच में चाहता हूं कि कोई मुझे मेंटर करे। मैं भारत के लिए खेलना चाहता हूं – यही मेरा लक्ष्य है। मैं चाहता हूं कि कोई भारत के लिए खेलने के सफर में मेरा मार्गदर्शन करे और अचानक उन्होंने कहा, 'पता है दोस्त? मैं भी असल में किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश में हूं और खेल को कुछ वापस देना चाहता हूं।' "

अगले ही दिन उथप्पा ने उन्हें फोन किया और लगभग एक हफ्ते तक नियमित रूप से बात करते रहे। जगदीशन ने बताया, "अपना प्रोसेस बनाना, चीजें तैयार करना, रोजाना जिंदगी को किस नजरिए से देखना है - इन चीजों पर मेरी मजबूत नींव बनी और फिर तकनीकी बातें आईं। तो, इस तरह से, रॉबिन का मेरी जिंदगी में आना बीते 3 वर्षों में एक वरदान साबित हुआ है, उन्होंने सच में मुझे पूरी तरह से एक अलग इंसान बना दिया है।"

अब वह उथप्पा के लिए 'मेंटॉर' शब्द का इस्तेमाल नहीं करते। उन्होंने कहा, "वह अब मेरे परिवार जैसे हैं और हम बहुत करीब हैं। बात चाहे जो भी हो, सिर्फ क्रिकेट की ही नहीं, बल्कि अगर मेरी जिंदगी में कुछ भी होता है, तो मैं पक्का उनके पास ही जाऊंगा।"

जगदीशन ने 2023/24 और 2024/25 रणजी ट्रॉफी सीजन में तमिलनाडु के लिए क्रमशः 816 और 674 रन बनाकर इंडिया 'ए' और टारगेटेड प्लेयर्स पूल में जगह बनाई थी। साल 2025 में वह कोयंबटूर में अपने घर पर लंच कर रहे थे, तभी एक बीसीसीआई अधिकारी ने उन्हें उनके पासपोर्ट की जानकारी के लिए फोन किया। जगदीशन को बताया गया कि मैनचेस्टर में दाहिने पैर में फ्रैक्चर होने के कारण ऋषभ पंत की जगह उन्हें इंग्लैंड में ओवल में होने वाले पांचवें टेस्ट के लिए बुलाया जा सकता है।

जगदीशन ने इस वाकये को याद करते हुए बताया, "यह अचानक हुआ, लेकिन ऐसा नहीं था कि उस समय मैं आराम कर रहा था। मैं अभी भी अपनी प्रक्रिया का पालन कर रहा था और अभ्यास कर रहा था। यह मेरे लिए लगातार चलने वाली प्रक्रिया थी। रोजाना अभ्यास करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। चाहे कोई टूर्नामेंट हो या न हो, मेरे लिए तैयार रहना बहुत जरूरी है, क्योंकि आपको कभी नहीं पता होता कि कब मौका आपके दरवाजे पर दस्तक देगा। हमेशा की तरह, मेरी दिनचर्या वैसी ही थी और अचानक मुझे किसी का फोन आया। इससे पहले कि मुझे कुछ पता चलता, मैं भारतीय टीम का हिस्सा बन चुका था।"

हालांकि, जगदीशन ओवल टेस्ट नहीं खेल सके, क्योंकि प्लेइंग इलेवन में पंत की जगह ध्रुव जुरेल को शामिल किया गया था, लेकिन मैच का पलड़ा इंग्लैंड की तरफ झुका हुआ था। फिर मोहम्मद सिराज की अगुवाई में भारतीय तेज गेंदबाजों ने अंतिम दिन मैच में वापसी कराई और एक यादगार जीत हासिल की।

जगदीशन ने बताया, "यह अविश्वसनीय था, क्योंकि भारतीय टीम के साथ यह मेरा पहला अनुभव था और शुरू से अंत तक रोमांचक रहे मैच का हिस्सा बनना एक ऐसा पल है जिसे मैं निश्चित रूप से लंबे समय तक याद रखूंगा। अंतिम दिन, अचानक जिस तरह से तेज गेंदबाजों, सिराज, आकाश दीप, प्रसिद्ध और अन्य सभी ने खेल में वापसी करते हुए विकेट लिए - खासकर जो रूट को आउट करके हमें खेल में वापस लाए - वह वाकई बहुत खास था। इसमें बहुत मजा आया और निश्चित रूप से यह सबसे बेहतरीन जीतों में से एक थी।"

हालांकि, जगदीशन इंडिया-ए के साथ श्रीलंका में रेड-बॉल मैच खेलने गए थे, जिसमें टीम 1-0 से जीती थी, लेकिन वे दोनों मैच नहीं खेले। उन्होंने बताया, "जाहिर है, जब आप प्लेइंग इलेवन में नहीं चुने जाते तो बुरा लगता है, लेकिन यह आपके वश में नहीं होता, क्योंकि आप वही कर सकते हैं जो आपके वश में है। असल में, मैं अपनी ट्रेनिंग, प्रैक्टिस, डाइट और अपने काम करने के तरीके पर ध्यान देता हूं। जब मैंने इन चीजों का मजा लेना शुरू किया, तो चुने न जाने पर मुझे दुख नहीं होता।"

"जब मेरा चयन होता है, तो मैं बहुत खुश भी नहीं होता। आपको एक ऐसी स्थिति में आना होता है जहां आप प्रत्येक चीज को लेकर तटस्थ महसूस करें। मैं उसी स्थिति में था। हां, मैं श्रीलंका में था। सबसे पहली बात, करोड़ों लोग हैं जो भारत, भारत-ए वगैरह के लिए खेलना चाहते हैं। इसलिए, शुक्रगुजार होना बहुत जरूरी है और मैं शुक्रगुजार हूं कि मैं इंडिया-ए सेटअप का हिस्सा था। मैं उन लाखों लोगों में से एक था। तो, यह मेरे लिए बहुत खास था और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैं खेला या नहीं।"

रेड-बॉल टीम में जगह बनाने के बाद, उन्होंने यूएई के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप के वॉर्म-अप मैच में इंडिया 'ए' के लिए शतक लगाया, जिसे वह आज भी किसी सपने जैसा मानते हैं। उन्हें यह अपनी कोई बड़ी कामयाबी नहीं लगी, लेकिन उनके परिवार, बचपन के कोच, नरसिम्हा और उथप्पा जैसे लोगों को ही पता था कि वहां तक पहुंचने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ी।

जगदीशन के घर पर फ्रेम में टेस्ट जर्सी लगी हुई है, जिससे उन्हें और उनके पिता को बहुत खुशी मिलती है। इस पर गर्व जताते हुए जगदीशन ने कहा, "यह मेरे लिए बहुत कीमती है और जो जर्सी मुझे पहली बार मिली थी, वह मेरे दिल के बहुत करीब रहेगी। जो भी खिलाड़ी क्रिकेट खेलना चाहता है, उसका सबसे बड़ा सपना भारतीय टीम का हिस्सा बनना होता है। ओवल टेस्ट और वेस्टइंडीज सीरीज का हिस्सा रहने के कारण मुझे भारतीय क्रिकेट का अनुभव मिला है। मेरी इच्छा होती है कि जब भी टीम कोई सीरीज खेले, तो मैं उस सेटअप का हिस्सा रहूं। जब आपके पास अपने नंबर और नाम वाली जर्सी होती है, तो वह आपको प्रेरित करती है और आप यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि लगातार टीम का हिस्सा बने रहें।"

--आईएएनएस

आरएसजी

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