एमसीडी टोल टेंडर पर सियासत तेज, 'आप' ने 680 करोड़ रुपए घोटाले का लगाया आरोप, सीबीआई जांच की मांग
नई दिल्ली, 5 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के टोल टैक्स टेंडर को लेकर राजधानी की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। आम आदमी पार्टी (आप) ने भाजपा शासित एमसीडी पर टोल टैक्स के ठेके में करीब 680 करोड़ रुपए के कथित घोटाले का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराने और टेंडर को तत्काल रद्द करने की मांग की है।
पार्टी नेताओं का आरोप है कि एमसीडी ने अधिक बोली लगाने वाली कंपनी को तकनीकी आधार पर बाहर कर कम बोली लगाने वाली एक ऐसी कंपनी को ठेका दे दिया, जिसे राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है। कोंडली से विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि दिल्ली में भाजपा की 'चार इंजन' वाली सरकार का हर इंजन भ्रष्टाचार में लिप्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि दवा और साइकिल खरीद से जुड़े कथित मामलों के बाद अब एमसीडी के टोल टैक्स टेंडर में भी बड़ा घोटाला सामने आया है। उनके अनुसार, एमसीडी ने करीब 5500 करोड़ रुपए के टोल कलेक्शन का टेंडर जारी किया, लेकिन नियमानुसार स्टैंडिंग कमेटी की मंजूरी लिए बिना पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
कुलदीप कुमार ने दावा किया कि टेंडर की शर्तों में जानबूझकर ऐसे प्रावधान जोड़े गए, जिससे केवल एक विशेष कंपनी को लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक 5500 करोड़ रुपए की बोली लगाने वाली कंपनी को तकनीकी कारणों का हवाला देकर बाहर कर दिया गया, जबकि 4820 करोड़ रुपए की बोली लगाने वाली कंपनी सहकार ग्लोबल लिमिटेड को ठेका दे दिया गया। इससे एमसीडी को सीधे 680 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सहकार ग्लोबल लिमिटेड पिछले कई वर्षों से एमसीडी में टोल कलेक्शन का कार्य कर रही है और हाल ही में एनएचएआई द्वारा ब्लैकलिस्ट एवं डिबार किए जाने के बावजूद उसे नया ठेका दे दिया गया। आप नेताओं का कहना है कि इस संबंध में पहले भी एमसीडी को पत्र लिखकर चेतावनी दी गई थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
एमसीडी के सह-प्रभारी प्रवीण कुमार ने आरोप लगाया कि भाजपा ने टेंडर में दोबारा 122 लेन के सिंगल कॉन्ट्रैक्ट और 24 महीने की अवधि जैसी शर्तें जोड़ दीं, जिससे प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई। उन्होंने कहा कि पहले इन शर्तों को हटाया गया था ताकि अधिक कंपनियां भाग ले सकें और निगम को बेहतर राजस्व प्राप्त हो। उनका यह भी आरोप है कि टेंडर में मौजूद नेगोशिएशन क्लॉज का उपयोग नहीं किया गया और अधिक राजस्व प्राप्त करने की संभावनाओं को नजरअंदाज कर दिया गया।
वहीं, पार्टी की सह-प्रभारी प्रीति डोगरा ने कहा कि एमसीडी पहले से ही वित्तीय संकट से जूझ रही है और कर्मचारियों के वेतन तक के लिए धन की कमी है। ऐसे में अधिक राजस्व देने वाली बोली को छोड़कर कम बोली लगाने वाली कंपनी को ठेका देना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने निगम पर कब्जा केवल भ्रष्टाचार के लिए किया है और पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों व नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
निगम पार्षद राजीव चौधरी ने भी दावा किया कि एमसीडी में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार के कारण पार्षदों को विकास कार्यों के लिए पर्याप्त फंड नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि निगम को टेंडर से अधिक राजस्व मिलता तो विकास कार्यों के लिए धन की कमी नहीं होती। आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि एमसीडी के टोल टैक्स टेंडर को तत्काल रद्द किया जाए, पूरे मामले की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
--आईएएनएस
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