मतदाता सूची पुनरीक्षण पर डीके शिवकुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखा पत्र, योग्य मतदाताओं को बाहर नहीं करने की अपील
बेंगलुरु, 25 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के सत्यापन के लिए पर्याप्त समय देने और निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने की मांग की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक के कुल 5.54 करोड़ मतदाताओं में से करीब 1.08 करोड़ मतदाताओं को एएसडीडीओ (अनुपस्थित, कहीं और चले गए, मृत, जाली या अन्य) श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा, 24 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची जारी होने के बाद लगभग 43.8 लाख मतदाताओं को 'तार्किक विसंगतियों' या वर्ष 2002 की मतदाता सूची से जुड़े नहीं होने के कारण सत्यापन नोटिस मिलने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि अकेले बेंगलुरु में 46.88 लाख मतदाता एएसडीडीओ श्रेणी में रखे गए हैं। उनके अनुसार, राज्य में कुल मिलाकर लगभग 1.5 करोड़ मतदाता ऐसे हैं, जिन्हें अपना नाम मतदाता सूची में बनाए रखने या दोबारा शामिल कराने के लिए दावा प्रस्तुत करना पड़ सकता है। एएसडीडीओ श्रेणी में शामिल कई लोग वास्तविक और पात्र मतदाता हो सकते हैं, जो बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) के घर-घर सत्यापन के दौरान नौकरी, स्वास्थ्य या अन्य कारणों से घर पर मौजूद नहीं थे।
उन्होंने यह भी कहा कि कई ऐसे मतदाता, जो एक मतदान केंद्र क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित हुए हैं, उन्हें नए पते पर नाम दर्ज कराने का मौका नहीं मिला, जबकि पुराने पते से उनका नाम हटा दिया गया। खासकर बेंगलुरु जैसे शहरों में सड़क के एक तरफ से दूसरी तरफ जाने पर भी मतदान केंद्र बदल सकता है।
मुख्यमंत्री ने आशंका जताई कि बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाता मतदान अधिकार से वंचित हो सकते हैं। 'अनुपस्थित' और 'स्थानांतरित' श्रेणी के मतदाताओं को नोटिस भी नहीं मिलते, जिससे उन्हें यह जानकारी तक नहीं हो पाती कि उनका नाम सूची से हट चुका है।
शिवकुमार ने चुनाव आयोग से दावों एवं आपत्तियों की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि पात्र मतदाताओं को अपना नाम जांचने और आवश्यक फॉर्म भरने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि 2023 के चुनावी रोल मैनुअल के प्रावधानों के अनुसार चुनाव आयोग इस अवधि को अधिसूचना जारी कर बढ़ा सकता है। निकट भविष्य में कर्नाटक में कोई चुनाव प्रस्तावित नहीं है, इसलिए समय सीमा बढ़ाना संभव है।
मुख्यमंत्री ने निर्धारित प्रक्रिया को पूरी तरह लागू करने की मांग करते हुए कहा कि जिला निर्वाचन अधिकारियों को ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम सभा तथा शहरी क्षेत्रों में वार्ड समिति बैठकों के आयोजन के स्पष्ट निर्देश दिए जाने चाहिए। इन बैठकों में प्रारूप मतदाता सूची पढ़कर सुनाई जानी चाहिए और संभावित त्रुटियों एवं छूटे हुए नामों की पहचान की जानी चाहिए। वर्तमान प्रस्ताव के अनुसार नोटिस जारी करने और मामलों के निपटारे के लिए उपलब्ध समय बेहद कम है। कामकाजी लोगों, प्रवासी श्रमिकों और बुजुर्गों के लिए दस्तावेज जुटाने और जवाब देने में अधिक समय लग सकता है।
उन्होंने मांग की कि सत्यापन का सामना कर रहे प्रत्येक मतदाता को जवाब देने और जरूरी दस्तावेज जमा करने के लिए कम से कम तीन से चार सप्ताह का समय दिया जाए, ताकि किसी भी प्रतिकूल निर्णय से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिल सके। मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग से अतिरिक्त निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों और अधिक मामलों वाले जिलों में अतिरिक्त जिला निर्वाचन अधिकारियों की नियुक्ति करने का भी अनुरोध किया।
उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में आने वाले दावों और आपत्तियों को मौजूदा संसाधनों के साथ समय पर निपटाना मुश्किल होगा। यदि पर्याप्त जनशक्ति उपलब्ध नहीं कराई गई तो अनावश्यक त्रुटियां और पात्र मतदाताओं के नाम हटने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। कर्नाटक सरकार चुनाव आयोग को हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है। इसमें ग्राम सभा और वार्ड समिति बैठकों के आयोजन, व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने जैसे कदम शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि लक्ष्य ऐसी मतदाता सूची तैयार करना होना चाहिए, जिस पर जनता को भरोसा हो, जिसमें हर पात्र नागरिक का नाम शामिल हो, अपात्र नाम हटाए जाएं और कोई भी व्यक्ति केवल समय, सूचना या अवसर की कमी के कारण अपने मताधिकार से वंचित न हो।
--आईएएनएस
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