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बाढ़ के बाद अज्ञात शवों का सामूहिक दफन शुरू, वीडियो में जाने देवघाट जंगल में खोदी गईं सैकड़ों कब्रें; 3 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता

बाढ़ के बाद अज्ञात शवों का सामूहिक दफन शुरू, वीडियो में जाने देवघाट जंगल में खोदी गईं सैकड़ों कब्रें; 3 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता

नेपाल में भीषण बाढ़ और तबाही के बाद अब प्रशासन के सामने एक नई और बेहद दर्दनाक चुनौती खड़ी हो गई है। बाढ़ में मारे गए ऐसे लोगों के शव, जिनकी अब तक पहचान नहीं हो सकी है और जो लंबे समय तक पड़े रहने के कारण खराब होने लगे हैं, उनका सामूहिक दफन शुरू कर दिया गया है। चितवन जिले के देवघाट जंगल में प्रशासन ने सैकड़ों कब्रें खोदी हैं। पिछले दो दिनों में यहां 196 अज्ञात शवों को दफनाया जा चुका है।

अधिकारियों के मुताबिक कई शव बेहद खराब हालत में मिले हैं। लगातार कई दिनों तक पानी और मलबे में पड़े रहने के कारण शवों की स्थिति ऐसी हो गई है कि परिजनों के लिए उन्हें पहचानना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में प्रशासन ने शवों को सुरक्षित तरीके से दफनाने का फैसला लिया है, ताकि स्वास्थ्य संबंधी खतरे को भी कम किया जा सके।

हर शव को दिया जा रहा पहचान नंबर

अज्ञात शवों के दफन के दौरान प्रशासन खास सावधानी बरत रहा है। प्रत्येक शव के साथ एक अलग पहचान नंबर और उससे संबंधित जरूरी रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में यदि किसी परिवार को अपने लापता सदस्य की तलाश हो या किसी शव की पहचान को लेकर दावा किया जाए, तो DNA जांच के जरिए मिलान किया जा सकेगा।इस व्यवस्था से उन परिवारों को भविष्य में अपने परिजनों के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है, जो अभी भी उनकी तलाश में जुटे हैं। प्रशासन के सामने चुनौती यह भी है कि बड़ी संख्या में लोग अब तक लापता हैं और उनके परिजनों को यह पता नहीं है कि उनके साथ वास्तव में क्या हुआ।

3 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता

इस प्राकृतिक आपदा में नेपाल में भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नेपाल में अब तक 788 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3 हजार से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों के परिवार राहत शिविरों, अस्पतालों और प्रशासनिक केंद्रों में अपनों की जानकारी जुटा रहे हैं।आपदा के बाद कई इलाकों में सड़क और संपर्क व्यवस्था प्रभावित होने से राहत एवं बचाव अभियान भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। बड़ी संख्या में लोगों के मलबे और बाढ़ के पानी में बह जाने की आशंका के बीच लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है।

26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने से आई थी अचानक बाढ़

इस भयावह तबाही की शुरुआत 26 अगस्त को तिब्बत में ग्लेशियर टूटने के बाद हुई। इसके चलते नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में अचानक पानी का तेज बहाव आया और कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई। अचानक बढ़े जलस्तर ने लोगों को संभलने का मौका तक नहीं दिया।नेपाल के साथ तिब्बत में भी इस आपदा ने भारी नुकसान पहुंचाया है। तिब्बत में मृतकों की संख्या 16 तक पहुंच गई है। कई इलाकों में बाढ़ और मलबे के कारण बड़ी संख्या में घर, सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं।

चीन से पहले सूचना देने की मांग का मुद्दा उठा

आपदा से पहले नेपाल और चीन के अधिकारियों के बीच 27 मई को बैठक भी हुई थी। नेपाली अधिकारियों के मुताबिक उन्होंने ग्लेशियरों में शुरुआती हलचल और जलस्तर में संभावित बदलाव की जानकारी पहले से उपलब्ध कराने की मांग की थी।

नेपाली अधिकारियों का कहना है कि उन्हें चीन की ओर से उतनी जानकारी नहीं मिल सकी, जितनी वे चाहते थे। उनका मानना है कि अगर ग्लेशियरों में होने वाली गतिविधियों और जलस्तर की जानकारी समय रहते मिलती, तो प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहले से चेतावनी देकर नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता था।

फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान के साथ-साथ अज्ञात शवों की पहचान का काम भी जारी है। देवघाट में दफनाए गए शवों के रिकॉर्ड और पहचान नंबर भविष्य में DNA जांच के जरिए लापता लोगों के परिवारों को उनके अपनों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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