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मस्जिद तोड़ने से पहले हाईकोर्ट जाने का मौका तक नहीं दिया, ये लोकशाही नहीं तानाशाही: अबू आजमी

मस्जिद तोड़ने से पहले हाईकोर्ट जाने का मौका तक नहीं दिया, ये लोकशाही नहीं तानाशाही: अबू आजमी
मस्जिद तोड़ने से पहले हाईकोर्ट जाने का मौका तक नहीं दिया, ये लोकशाही नहीं तानाशाही: अबू आजमी

मुंबई, 7 सितंबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने, धार्मिक आयोजनों पर आरएसएस, दिल्ली में इमारत गिरने और टीपू सुल्तान विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

दिल्ली में सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे पर सपा विधायक अबू आसिम आजमी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "दिल्ली में बिल्डिंग गिरी, सात लोगों की मौत हो गई, अफसोस की बात है। अभी मैं किसी देश में गया था तो उन्होंने कहा कि ये बिल्डिंग 50 साल की हो गई, ये बिल्डिंग अब तोड़ दी जाएगी। बिल्डिंग मजबूत बहुत है लेकिन ये कानून बन गया है कि बिल्डिंग इतनी पुरानी हो जाए तो बिल्डिंग नहीं रह सकती।"

उन्होंने कहा कि हमारे यहां क्या कानून है? 100-100, 150-150 साल की बिल्डिंगें हैं, जो क्रैक हो चुकी हैं और इमारतें हिल रही हैं। गरीब बेचारे बिल्डिंग छोड़ इसलिए नहीं रहे हैं कि उनके पास रहने की कोई जगह ही नहीं है। तो मैं समझता हूं कि सरकार को अवैध निर्माण रोकने के लिए बहुत ही सख्त कानून बनाना चाहिए। ये हाल मुंबई में हो रहा है, ये दिल्ली में हो रहा है, पूरे देश में हो रहा है। इस पर सरकार को कोई कड़ी नीति बनाने की बहुत जरूरत है।

सहारनपुर मस्जिद मामले पर उन्होंने कहा, "आरएसएस मोहब्बत फैलाने का काम कर रही है। सहारनपुर में सौ साल पुरानी मस्जिद को सत्ता में बैठे लोगों ने रात में जाकर तोड़ दिया। उन्होंने हाईकोर्ट जाने का मौका भी नहीं दिया। मैं समझता हूं कि जब ये देश आजाद नहीं था, उस वक्त की बनी हुई मस्जिद को इस तरह से या किसी इमारत को भी इस तरह से तोड़ना, मैं समझता हूं बिल्कुल गलत है और उनको कोर्ट जाने का टाइम देना चाहिए था। यहां लगता है कि इस देश में जो है लोकशाही खत्म हो गई है और डिक्टेटरशिप शुरू हो चुकी है।"

मुंबई के मलाड इलाके में टीपू सुल्तान के नाम पर पार्क का नाम रखने पर चल रहे विवाद पर अबू आजमी ने कहा, "ऐसा है कि जो लोग सत्ता में बैठे हैं वो आजादी की लड़ाई में भारतवर्ष को आजाद कराने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के साथ हैं लेकिन उस वक्त टीपू सुल्तान का क्या रोल था, दुनिया जानती है। इसके पहले टीपू सुल्तान का नाम बहुत सारी जगहों पर रखा गया है। आज भी अगर आप बेंगलुरु से आगे मैसूर के रास्ते पर जाएंगे तो टीपू सुल्तान की दी हुई जमीन पर मंदिर भी बने हैं और मस्जिद भी बनी है। ये सिर्फ और सिर्फ मुसलमानों को इस देश में नीचा दिखाने के लिए की जा रही हैं, मैं इसकी खुली निंदा करता हूं।"

--आईएएनएस

एसएके/पीएम

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