भारत त्योहारों का देश है और यहां मनाए जाने वाले हर पर्व में मिठाइयों का विशेष महत्व होता है। चाहे होली, दीपावली, ईद, रक्षाबंधन हो या क्रिसमस — हर अवसर पर अपनों का मुंह मीठा कराने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। जैसे-जैसे होली और ईद की तारीखें नजदीक आती हैं, वैसे-वैसे बाजारों में चहल-पहल बढ़ने लगती है। मिठाई की दुकानों पर रंग-बिरंगी पारंपरिक मिठाइयां सजी दिखाई देती हैं और खरीदारों की भीड़ उमड़ पड़ती है।
इन दिनों खासतौर पर बाजारों में सेवईं और सूतफेनी की मांग काफी बढ़ जाती है। कई लोग इन्हें एक जैसा समझ लेते हैं, लेकिन वास्तव में दोनों में काफी अंतर है। आइए जानते हैं कि सेवईं और सूतफेनी में क्या फर्क होता है।
🔸 क्या होती है सेवईं?
सेवईं (Vermicelli) पतली, लंबी और सूखी मैदे या गेहूं के आटे से बनी होती है। इसे खासतौर पर ईद के मौके पर बनाया जाता है। मुस्लिम परिवारों में ईद की सुबह “शीर खुरमा” या दूध वाली मीठी सेवईं बनाना एक परंपरा है।
सेवईं की खासियतें:
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यह पतली और सीधी डंडीनुमा होती है।
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इसे घी में हल्का भूनकर दूध और चीनी के साथ पकाया जाता है।
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इसमें मेवे, इलायची और कभी-कभी केसर डाली जाती है।
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यह नरम और हल्की होती है, जिसे गरम या ठंडा दोनों तरह से खाया जा सकता है।
होली पर भी कई घरों में मीठी सेवईं बनाई जाती हैं, हालांकि इसका धार्मिक महत्व ईद से ज्यादा जुड़ा माना जाता है।
🔸 क्या होती है सूतफेनी?
सूतफेनी देखने में सेवईं जैसी जरूर लगती है, लेकिन यह उससे काफी अलग होती है। सूतफेनी दरअसल बहुत बारीक धागों जैसी बनी हुई एक मिठाई है, जिसे घी और चीनी की मदद से तैयार किया जाता है। यह खासतौर पर उत्तर भारत और गुजरात के कुछ इलाकों में ज्यादा लोकप्रिय है।
सूतफेनी की खासियतें:
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यह बेहद बारीक धागों की जाल जैसी होती है।
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इसे सीधे दूध में भिगोकर या हल्का सा मीठा दूध डालकर खाया जाता है।
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इसमें पहले से ही मिठास मौजूद होती है।
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इसकी बनावट कुरकुरी और हल्की होती है।
सूतफेनी को अक्सर “ड्राई स्वीट” की श्रेणी में रखा जाता है, जबकि सेवईं को पकाकर तैयार किया जाता है।
🔍 सेवईं और सूतफेनी में मुख्य अंतर
| आधार | सेवईं | सूतफेनी |
|---|---|---|
| बनावट | पतली, सीधी | जाल जैसी, बहुत बारीक |
| स्वाद | पकाने के बाद मीठी | पहले से मीठी |
| बनाने का तरीका | दूध में पकाई जाती है | दूध में भिगोकर खाई जाती है |
| बनावट का अनुभव | नरम | हल्की कुरकुरी |
🎉 त्योहारों में क्यों बढ़ जाती है मांग?
होली और ईद जैसे त्योहार आपसी भाईचारे और खुशियों का प्रतीक हैं। इन मौकों पर रिश्तेदारों और दोस्तों को घर बुलाकर मीठा खिलाने की परंपरा है। ऐसे में सेवईं और सूतफेनी जैसे पारंपरिक व्यंजन त्योहारों की मिठास को और बढ़ा देते हैं।
बाजारों में इनकी बढ़ती मांग यह दर्शाती है कि आज भी लोग पारंपरिक स्वाद को उतना ही महत्व देते हैं जितना पहले दिया करते थे।

