वैश्विक तनावों और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच सपाट खुला बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी पर दबाव, आईटी शेयरों ने किया सपोर्ट
मुंबई, 19 (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में जारी तनावों के बीच कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को भी भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला। यह लगातार सातवां दिन है जब प्रमुख बेंचमार्कों सेंसेक्स और निफ्टी में बिकवाली का दबाव बना रहा, लेकिन आईटी शेयरों में खरीदारी से प्रमुख सूचकांकों को कुछ समर्थन मिला।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और बॉन्ड प्रतिफल (यील्ड) में उछाल के बीच, बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,235.46 से 17.41 अंक यानी 0.02 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 77,218.05 पर सपाट खुला। हालांकि, बाद में गिरावट और बढ़ गई, और एक समय इसने 0.31 प्रतिशत यानी 244 अंक गिरकर 76,991.28 का इंट्रा-डे लो छुआ, जबकि 77,347.81 का स्तर दिन का हाई रहा।
वहीं, एनएसई निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 24,154.90 से 0.01 प्रतिशत यानी 2.85 अंक की मामूली गिरावट के साथ 24,152.05 पर सपाट खुला। हालांकि बाद के सत्र में गिरावट और बढ़ गई, और एक समय इसने 0.37 प्रतिशत या करीब 90 अंक फिसलकर 24,065.10 का दिन का लो और 24,172.85 का दिन का हाई छुआ।
खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 222.87 अंक यानी 0.29 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,012.59 पर कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी 50 74.00 (0.31 प्रतिशत) अंक गिरकर 24,080.90 पर ट्रेड करता नजर आया।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप क्रमशः 0.39 प्रतिशत और 0.37 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए।
क्षेत्रवार प्रदर्शन में आईटी शेयरों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी आईटी सूचकांक 0.82 प्रतिशत की बढ़त के साथ शीर्ष पर रहा। इसके अलावा, निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम में 0.59 प्रतिशत की तेजी और निफ्टी एफएमसीजी में 0.2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। रियल्टी और रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट्स) से जुड़े सूचकांकों में भी लगभग 0.2 प्रतिशत तक की बढ़त देखने को मिली, जबकि वहीं, ऑयल एंड गैस में 0.08 प्रतिशत की मामूली बढ़त देखने को मिली।
दूसरी ओर, मेटल और ऑटो शेयरों में दबाव बना रहा। निफ्टी मेटल 0.35 प्रतिशत टूट गया, जबकि निफ्टी ऑटो में 0.14 प्रतिशत की गिरावट रही। हेल्थकेयर, फार्मा और केमिकल्स से जुड़े सूचकांकों में भी हल्की कमजोरी दर्ज की गई।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा कमजोरी का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और वैश्विक बॉन्ड यील्ड का ऊंचे स्तर पर बने रहना है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष को लेकर अनिश्चितता के कारण तेल कीमतों में तेजी बनी हुई है। इससे महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं और बॉन्ड यील्ड पर भी दबाव पड़ा है।
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड वर्ष 2007 के बाद के उच्चतम स्तरों पर पहुंच गई है, जिससे वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हो रही है। इसके बावजूद भारतीय बाजार अपेक्षाकृत मजबूती दिखा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि की बेहतर संभावनाएं, वित्त वर्ष 2026-27 में कॉरपोरेट आय में सुधार की उम्मीद और घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी बाजार को सहारा दे रही है।
उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक निवेशकों के लिए मौजूदा गिरावट गुणवत्तापूर्ण वृद्धि वाले शेयरों में निवेश बढ़ाने का अवसर हो सकती है। विशेष रूप से मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अभी भी अपेक्षाकृत बेहतर गति बनी हुई है।
इस बीच एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। सेमीकंडक्टर शेयरों में दबाव और पश्चिम एशिया की परिस्थितियों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड लगभग 92 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया, जो पिछले तीन सप्ताह का उच्चतम स्तर है।
ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने के संकेत और अमेरिका द्वारा युद्धविराम अवधि बढ़ाने से इनकार किए जाने के बाद ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया की स्थिति में स्पष्ट सुधार नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक भारतीय शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतक बाजार को बड़े नुकसान से बचाए रख सकते हैं।
--आईएएनएस
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