मराठी को अनिवार्य बनाने की जरूरत नहीं, सरकार लोगों को सीखने के लिए प्रोत्साहित करे: देवेश चंद्र ठाकुर
मुंबई, 7 सितंबर (आईएएनएस)। जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने हिंदी-मराठी भाषा विवाद, सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने और दिल्ली में इमारत गिरने की घटना समेत कई मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने हिंदी-मराठी भाषा विवाद में किसी भी तरह की जबरदस्ती को उचित नहीं बताया और स्थानीय भाषा सीखने के लिए लोगों को स्वेच्छा से प्रोत्साहित करने की बात कही।
भाषा विवाद पर जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि मराठी को अनिवार्य बनाने की कोई जरूरत नहीं थी और इसे अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए था। हालांकि, उन्होंने कहा कि रिक्शा और टैक्सी चालकों को स्वेच्छा से मराठी सीखने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। महाराष्ट्र में रहने वाले ऐसे लोगों को, जिन्हें मराठी नहीं आती या जो स्थानीय नहीं हैं, स्थानीय लोगों से बातचीत में परेशानी हो सकती है। ऐसे में हिंदी के साथ मराठी सीखना भी उपयोगी होगा।
उन्होंने कहा कि भाषा किसी पर थोपी नहीं जा सकती। उनका तर्क था कि अगर किसी स्थानीय व्यक्ति से तीन महीने के भीतर अच्छी हिंदी सीखने के लिए कहा जाए तो उसके लिए भी यह आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मुंबई में कई लोगों को हिंदी नहीं आती, इसलिए संवाद की समस्या हो सकती है। लोगों को हिंदी के साथ मराठी भी सीखनी चाहिए और दो-तीन महीने में सामान्य बातचीत के स्तर पर भाषा सीखी जा सकती है।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अनुपस्थिति को लेकर पूछे गए सवाल पर ठाकुर ने कहा कि बिहार के लोग नीतीश कुमार के काम करने के तरीके और उनकी मौजूदगी के आदी हो चुके थे। लोगों को भरोसा था कि नीतीश कुमार केवल मुख्यमंत्री नहीं बल्कि उनके अभिभावक की भूमिका में हैं। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर उनकी अनुपस्थिति महसूस होती है लेकिन कोई व्यक्ति हमेशा किसी पद पर नहीं रहता। उन्होंने मौजूदा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के काम की भी सराहना करते हुए कहा कि समय के साथ वह भी उतने ही लोकप्रिय हो जाएंगे।
दिल्ली में इमारत गिरने की घटना पर सांसद ने प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि उस इमारत में लोग रह रहे थे तो प्रशासन को इसकी जानकारी होनी चाहिए थी। अब यदि सामने आ रहा है कि इमारत अवैध थी, तो सरकार को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं हो पाई, यह गंभीर सवाल है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी घटनाओं से सबक लेते हुए आगे निगरानी और कार्रवाई पर ध्यान देना चाहिए, ताकि भविष्य में लोगों की जान-माल का नुकसान न हो।
--आईएएनएस
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