मैपिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद ओडिशा में होगी एसआईआर: अतिरिक्त सीईओ सुशांत कुमार मिश्रा
भुवनेश्वर, 13 जनवरी (आईएएनएस)। ओडिशा में मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए एसआईआर होगी। राज्य के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी सुशांत कुमार मिश्रा ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी पात्र और वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची में शामिल हों, जबकि अपात्र लोगों को बाहर रखा जाए।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि आम नागरिकों और मतदाताओं के लिए यह पूरी प्रक्रिया सरल और बिना किसी परेशानी के होगी।
सुशांत कुमार मिश्रा के अनुसार, एसआईआर की तैयारियां पिछले पांच महीनों से लगातार चल रही हैं। इस दौरान कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। सबसे पहले मतदान व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कूलिंग स्टेशनों का युक्तिकरण किया गया। पहले से मौजूद लगभग 36,000 कूलिंग स्टेशनों के अलावा करीब 7,000 नए कूलिंग स्टेशन जोड़े गए हैं।
इन सभी स्टेशनों के लिए बीएलओ नियुक्त किए गए हैं। इन अधिकारियों की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण और दिशा-निर्देश दिए गए हैं तथा उन्हें नियुक्ति पत्र भी सौंप दिए गए हैं। यानी जमीनी स्तर पर पूरी टीम तैयार है।
इसके साथ ही एक और बेहद अहम काम पूरा किया गया है। वर्ष 2002 की मतदाता सूची के आंकड़ों को डिजिटल रूप में परिवर्तित कर 2025 की मतदाता सूची से जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य यह है कि 2025 की सूची में दर्ज मतदाताओं को 2002 की सूची से मिलान किया जा सके। अब तक इस प्रक्रिया में करीब 70 प्रतिशत मतदाताओं का मैपिंग सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। अधिकारियों का कहना है कि यह एसआईआर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसमें तेजी लाई जा रही है।
अतिरिक्त सीईओ ने बताया कि एसआईआर को सुचारु रूप से लागू करने के लिए कई तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी की गई हैं। ऑनलाइन आवेदन मॉड्यूल तैयार किए गए हैं, प्रक्रियाओं में जरूरी बदलाव किए गए हैं और यह तय किया गया है कि चुनाव फॉर्म कैसे वितरित होंगे, दस्तावेज कैसे एकत्र किए जाएंगे और डेटा का सत्यापन कैसे होगा। इन सभी तैयारियों के कारण उन्हें पूरा भरोसा है कि एसआईआर के दौरान मतदाताओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।
चुनौतियों के सवाल पर सुशांत कुमार मिश्रा ने आईएएनएस से कहा कि इसे वह चुनौती नहीं मानते। यह प्रक्रिया 23 वर्षों बाद हो रही है, इसलिए कुछ नए पहलू जरूर सामने आए हैं, लेकिन भारत निर्वाचन आयोग के सहयोग से लगातार प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया गया है, जिससे अधिकारी और कर्मचारी नई प्रणाली के साथ आसानी से तालमेल बैठा रहे हैं। काम का दबाव जरूर बढ़ा है, लेकिन इससे कोई बड़ी समस्या नहीं आएगी।
उन्होंने कहा कि जिस तरह की रूपरेखा और प्रक्रिया अपनाई गई है, उससे यह काम तय समय में पूरा हो जाएगा। पिछले पांच महीनों में सभी काम निर्वाचन आयोग द्वारा तय समय-सीमा के भीतर पूरे किए गए हैं और आगे भी ऐसा ही होगा।
समय-सीमा को लेकर उन्होंने बताया कि 2002 और 2025 की मतदाता सूचियों के एकीकरण के लिए कोई सख्त अंतिम तारीख तय नहीं की गई है, लेकिन जनवरी के अंत या फरवरी के पहले-दूसरे सप्ताह तक यह प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। इसके बाद एसआईआर की औपचारिक शुरुआत की जाएगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह काम एसआईआर के साथ-साथ भी किया जा सकता है और इससे एसआईआर पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कई अन्य राज्यों में यह प्रक्रिया समानांतर रूप से चल रही है।
अतिरिक्त सीईओ ने यह भी बताया कि प्रशासन संवेदनशील और कमजोर वर्गों को लेकर विशेष रूप से सतर्क है। इनमें पीवीटीजी समुदाय, दूरदराज के क्षेत्र और वे लोग शामिल हैं, जिन्हें ऑनलाइन सुविधाओं तक पहुंच कम है। ऐसे क्षेत्रों के लिए अलग रणनीति बनाई गई है। अधिकारियों को लगातार निर्देश दिए गए हैं ताकि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए।
विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन को लेकर पूछे गए सवाल पर सुशांत कुमार मिश्रा ने कहा कि यह विषय उनके कार्यक्षेत्र से बाहर है। इस पर फैसला निर्वाचन आयोग करेगा और जब भी आयोग निर्देश देगा, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
--आईएएनएस
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