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मनरेगा से नफरत थी तो केंद्र सरकार बजट क्यों बढ़ाती थी : मनीष तिवारी

चंडीगढ़, 19 जनवरी (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने मनरेगा को लेकर केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि जिस तरह से मनरेगा को खत्म करने की साजिश रची गई, इसके दूरगामी परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि अगर मनरेगा स्कीम से इतनी ज्यादा दिक्कत केंद्र सरकार को हो रही थी तो बजट क्यों बढ़ाया गया।
मनरेगा से नफरत थी तो केंद्र सरकार बजट क्यों बढ़ाती थी : मनीष तिवारी

चंडीगढ़, 19 जनवरी (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने मनरेगा को लेकर केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि जिस तरह से मनरेगा को खत्म करने की साजिश रची गई, इसके दूरगामी परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि अगर मनरेगा स्कीम से इतनी ज्यादा दिक्कत केंद्र सरकार को हो रही थी तो बजट क्यों बढ़ाया गया।

चंडीगढ़ में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अज्ञानता और अहंकार किसी भी व्यक्ति को नीचे ले जाता है, ऊपर नहीं। उन्होंने कहा कि मनरेगा इस देश की सबसे बड़ी योजना थी। जब कोविड आया था, तो यह मनरेगा ही गरीबों का सहारा बनी थी। भारत सरकार ने जिस तरह से मनरेगा को खत्म करने की कोशिश की है, जो बदलाव किए गए, उसके दूरगामी परिणाम आएंगे, जो इस देश के गरीबों के लिए ठीक नहीं होंगे।

उन्होंने कहा कि मनरेगा ऐसी स्कीम थी, जो करोड़ों वंचित लोगों, जो गरीबी रेखा से नीचे रहते हैं, उन्हें यह रोजगार देती थी। अगर मनरेगा इतनी खराब थी, तो 2014 से 2025 तक इस स्कीम का बजट क्यों लगातार बढ़ाया जाता रहा। कोविड के दौरान जब लाखों लोग पलायन करके अपने घरों की ओर लौटे, तो मनरेगा ही ऐसी योजना थी जिसने उन्हें जान की सुरक्षा के साथ रोजगार दिया। जिस तरह से मनरेगा को खत्म करने का बिल राज्यसभा और लोकसभा में पारित किया गया है, इसके दूरगामी नकारात्मक परिणाम नजर आएंगे। यह कदम भारत के सबसे गरीब और शोषित वर्ग के साथ क्रूर घात है।

चंडीगढ़ में एक कार्यक्रम में पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि हमारे युवा साथी ने बहुत अच्छी पहल की है। उन्होंने एक खास वेबसाइट बनाई है, जो खासकर उन युवाओं की मदद करती है जो पब्लिक लाइफ और सामाजिक कार्यों में दिलचस्पी रखते हैं, लेकिन उन्हें अक्सर पता नहीं होता कि कहां जाना है या किस संगठन/एनजीओ के साथ वॉलंटियर करना है। यह प्लेटफॉर्म उन्हें अपने पैशन को पूरा करने और समाज में रचनात्मक तरीके से योगदान देने का मौका देता है। यह एक बहुत अच्छी और यूनिक पहल है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के भारत को दिए गए न्योते पर मनीष तिवारी ने कहा कि आखिरी फैसला भारत सरकार को लेना है। यह न्योता भारत में नए अमेरिकी राजदूत ने सार्वजनिक तौर पर शेयर किया है। इसलिए, सही जवाब पहले भारत सरकार की तरफ से आना चाहिए, और उसके बाद ही दूसरों के लिए इस पर कमेंट करना सही होगा।

--आईएएनएस

डीकेएम/एबीएम

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