मनोज झा ने यूसीसी को बताया 'डॉग व्हिसल पॉलिटिक्स', सरकार पर साधा निशाना
नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यूसीसी उनके लिए संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं, बल्कि राजनीति का हिस्सा बन गया है।
मनोज झा ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "मैं लगातार इस पर लिख और बोल रहा हूं, लेकिन मुझे पता है कि यूसीसी इनके लिए कॉन्स्टिट्यूशनल प्रोविजन अंडर आर्टिकल 44 नहीं हुई है, बल्कि डॉग व्हिसल पॉलिटिक्स का हिस्सा है। बच्चे रोजगार मांगें तो यूसीसी ले लो, बच्चे ईमानदार परीक्षा व्यवस्था मांगें तो गृहमंत्री कहें कि यूसीसी ले लो।"
दरअसल डॉग व्हिसल पॉलिटिक्स वह राजनीतिक भाषा है, जिसमें छिपे हुए संकेतों के जरिए किसी खास समूह तक संदेश पहुंचाया जाता है, जबकि सतही तौर पर वह संदेश सामान्य और स्वीकार्य दिखाई देता है।
राजद के सांसद ने गृह मंत्री को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के एक बयान की याद दिलाई। मनोज झा ने कहा, "मैं याद कराना चाहूंगा गृहमंत्री को, शायद आर्काइव में चला गया होगा। अभी मोहन भागवत ने विदेश में कहा था कि यूनिटी के लिए यूनिफॉर्मिटी आवश्यक नहीं है। यह किसके लिए कहा था? विदेश की धरती पर बड़ा हृदय दिखाने के लिए या अपने लोगों को कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं। मेरी चिंता वहां है और कहीं नहीं।"
एलएसी पर चीन द्वारा सैनिकों की संख्या कम करने की खबरों पर पूछे गए सवाल पर मनोज झा ने कहा कि उन्होंने ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं देखी है। उन्होंने कहा, "सूत्रों के हवाले से जो खबरें प्लांट होती हैं उस पर प्रतिक्रिया देना उचित नहीं है।"
उन्होंने कहा कि भारत-चीन रिश्तों के बीच असली मुद्दा यह है कि प्रधानमंत्री ने गलवान के बारे में क्या बात की। क्या अभी भी कहते हैं कि न कोई घुसा है, न कोई घुसेगा? अरुणाचल और लद्दाख के बारे में क्या बात की? मेरे लिए यह महत्वपूर्ण है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर के आतंकवाद को लेकर दोहरे मापदंड नहीं होने वाले बयान पर मनोज झा ने कहा कि यह पहली बार नहीं है, जब देश के किसी विदेश मंत्री ने ऐसी बात कही हो। यह तो लगातार भारत कहता आ रहा है, लेकिन पुलवामा क्यों हुआ, आज तक नहीं पता चला। आप दूसरे विभाग से बात करके संसद को और जनता को बताइए। पहलगाम क्यों हुआ? कहां अकाउंटेबिलिटी फिक्स की जाए? इसका जवाब बेहद महत्वपूर्ण है।"
उन्होंने आगे कहा कि ईरान में जब बच्चियों के स्कूल पर हमला हुआ तो हमारी ओर से उसकी निंदा क्यों नहीं की गई। कम से कम मानवता के आधार पर तो ऐसा करना ही चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
--आईएएनएस
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