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मानव अंडाणु निकालने के अवैध रैकेट पर ईडी की कार्रवाई, 29 लाख रुपये नकद जब्त

मानव अंडाणु निकालने के अवैध रैकेट पर ईडी की कार्रवाई, 29 लाख रुपये नकद जब्त
मानव अंडाणु निकालने के अवैध रैकेट पर ईडी की कार्रवाई, 29 लाख रुपये नकद जब्त

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मानव अंडाणु निकालने के अवैध रैकेट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में महाराष्ट्र के ठाणे, बारामती और नासिक में 10 ठिकानों पर छापेमारी की। 16 अक्टूबर को की गई इस कार्रवाई के दौरान 29 लाख रुपये नकद जब्त किए गए, जबकि बैंक लॉकर और म्यूचुअल फंड निवेश फ्रीज कर दिए गए।

ईडी के मुंबई जोनल कार्यालय-II ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत यह तलाशी अभियान चलाया। जांच के दौरान मामले से जुड़े आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी बरामद किए गए हैं। इसके अलावा, जांच एजेंसी ने कई नए डोनर एजेंटों की पहचान की है। बड़ी रकम से जुड़ी कई अचल संपत्तियों और निवेश का भी पता चला है।

ईडी ने महाराष्ट्र के ठाणे जिले के बदलापुर पूर्व पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर और बाद में दाखिल आरोपपत्र के आधार पर जांच शुरू की थी। इसमें मंजुषा वानखेड़े और 16 अन्य लोगों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप लगाए गए हैं। साथ ही, सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) अधिनियम, 2021 और औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के प्रावधानों के उल्लंघन का भी आरोप है।

ईडी की जांच के अनुसार, इस मामले में एक संगठित नेटवर्क के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को मानव अंडाणु दान के लिए तैयार किया जाता था। इसके बाद विभिन्न डोनर-सप्लाई एजेंटों के माध्यम से इन महिलाओं को आईवीएफ केंद्रों और सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) बैंकों तक पहुंचाया जाता था। ये एजेंट अलग-अलग प्रोपराइटरशिप फर्मों के माध्यम से काम कर रहे थे।

जांच में सामने आया कि आईवीएफ केंद्रों और एआरटी बैंकों की ओर से एजेंटों के माध्यम से महिलाओं को अंडाणु दान के बदले पैसे दिए जाते थे। इस प्रक्रिया में एजेंटों को भी कमीशन मिलता था।

ईडी की जांच में कथित तौर पर अंडाणु दान करने वाली महिलाओं की पहचान छिपाने और बार-बार अंडाणु दान की प्रक्रिया को संभव बनाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने का खुलासा हुआ है। इनमें आधार कार्ड, हलफनामे, सहमति पत्र, जन्म प्रमाणपत्र, पैन कार्ड, रक्त जांच रिपोर्ट और बीमा संबंधी दस्तावेज शामिल हैं।

जांच एजेंसी के मुताबिक, इन दस्तावेजों का इस्तेमाल महिलाओं की पहचान छिपाने और उन्हें चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ दिखाने के लिए किया जाता था। आरोप है कि महिलाओं को अंडाणु निकालने की प्रक्रिया के लिए महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के विभिन्न केंद्रों पर भेजा जाता था। ईडी का कहना है कि इस कथित गतिविधि से महिलाओं को संभावित चिकित्सकीय जोखिमों का सामना करना पड़ सकता था। साथ ही, निर्धारित चिकित्सकीय सुरक्षा मानकों को दरकिनार किए जाने की आशंका भी सामने आई है।

तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की जांच की जा रही है। एजेंसी ने मामले में कई नए डोनर एजेंटों की पहचान करने के साथ ही अन्य संपत्तियों और निवेश का भी पता लगाया है। ईडी के अनुसार, मामले में आगे की जांच जारी है।

--आईएएनएस

डीएससी

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