'मन की बात' में पीएम मोदी ने योग, पर्यावरण संरक्षण समेत कई मुद्दों पर प्रेरक विचार साझा किए: धमेंद्र प्रधान
नई दिल्ली, 28 जून (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 135वें एपिसोड का रविवार को देशभर में प्रसारण हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा के केंद्रपाड़ा की यात्रा के बीच मोबाइल पर प्रधानमंत्री का संबोधन सुना। शिक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा कर यह जानकारी दी।
एक्स पोस्ट में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा, "आज केंद्रपाड़ा प्रवास के दौरान सामाजिक कार्यक्रम में सम्मिलित होने जाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम को ओडिशा के उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज, झारसुगुड़ा विधायक टंकाधर त्रिपाठी, छेंडीपदा विधायक अगस्ती बेहरा और बालासोर विधायक मानस कुमार दत्ता के साथ सुना।"
उन्होंने लिखा, "कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने योग, पर्यावरण संरक्षण के लिए जनभागीदारी, नालंदा विश्वविद्यालय की ज्ञान परंपरा, महिलाओं द्वारा प्लास्टिक कचरे से इको-ब्रिक्स निर्माण और गणेश उत्सव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रेरक विचार साझा किए। ‘मन की बात’ आज जनभागीदारी का एक सशक्त माध्यम बन चुका है, जो समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए नागरिकों को प्रेरित करता है।"
इससे पहले, पीएम मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि यह कार्यक्रम देशभर में हो रही सकारात्मक पहलों को एक मंच प्रदान करता है। इस बार प्रधानमंत्री ने 'कैच द रेन' अभियान के माध्यम से वर्षा जल संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश दिया है। इसे जलवायु संरक्षण और जल संकट से निपटने की दिशा में बेहद अहम पहल बताया। 'मन की बात' हर बार नई जानकारी, नया उत्साह और नई प्रेरणा लेकर आता है, जिससे भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के लोग भी नागरिकों के स्वैच्छिक प्रयासों से परिचित होते हैं। उनके अनुसार ये पहल समाज को प्रेरित करने का कार्य करती हैं।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी 'मन की बात' की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम देश के हर नागरिक को प्रेरित करता है और उनमें आत्मविश्वास जगाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संबोधन में आम लोगों के उल्लेखनीय कार्यों को सामने लाते हैं, जिससे समाज में सकारात्मक सोच और जनभागीदारी को बढ़ावा मिलता है। साथ ही, यह कार्यक्रम वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा को भी दर्शाता है।
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