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ममता बनर्जी ने बंगाल की संस्कृति और परंपराओं का अपमान किया: बिप्लब कुमार देब

कोलकाता, 13 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के प्रोटोकॉल विवाद के बीच भाजपा सांसद बिप्लब कुमार देब ने टीएमसी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि टीएमसी के मुंह से राष्ट्रपति का नाम लेना शोभा नहीं देता है।
ममता बनर्जी ने बंगाल की संस्कृति और परंपराओं का अपमान किया: बिप्लब कुमार देब

कोलकाता, 13 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के प्रोटोकॉल विवाद के बीच भाजपा सांसद बिप्लब कुमार देब ने टीएमसी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि टीएमसी के मुंह से राष्ट्रपति का नाम लेना शोभा नहीं देता है।

मीडिया से बातचीत के दौरान भाजपा सांसद बिप्लब कुमार देब ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से एक दिन पहले देश की प्रथम नागरिक ने राज्य का दौरा किया, लेकिन उनके स्वागत के लिए केवल एक मेयर को भेजा गया। यह उनके रवैये को दर्शाता है। यह बंगाल की संस्कृति और परंपराओं का अपमान है।

भाजपा सांसद का यह बयान उस वक्त आया है, जब टीएमसी के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का समय मांगा। राष्ट्रपति कार्यालय से ‘समय की कमी' का हवाला देते हुए इनकार कर दिया।

गैस संकट पर राहुल गांधी के बयान पर भाजपा सांसद ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और उनके नेता प्रतिपक्ष कई बातें जानने का दावा करते हैं, लेकिन हमें नहीं पता है कि वे असल में क्या जानते हैं। जो बातें उन्हें नहीं जाननी चाहिए, वे उन्हें जानने लगते हैं और जो बातें उन्हें जाननी चाहिए, वे उन्हें नहीं जानते। यही समस्या है।

जब सरकार पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी हैकि जो भी स्थिति बनी हुई है, वह एक अंतरराष्ट्रीय संकट के कारण है, न कि भारत से जुड़े किसी खास संकट के कारण। अमेरिका, रूस, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों में भी ऐसी ही स्थितियां देखने को मिल रही हैं। भारत में किसी चीज की कोई कमी नहीं है। हमें व्यवस्थित रहने के लिए कहा गया है। भारत 80 प्रतिशत कच्चा तेल बाहर से इम्पोर्ट करता है। राहुल गांधी को यह पता होना चाहिए कि कल रात दो जहाज भारत आ चुके हैं। भारत के साथ ईरान की बातचीत हो रही है, सभी जहाज हमारे यहां पहुंच जाएंगे। राहुल गांधी के लोगों को यह बात भी उन्हें बतानी चाहिए।

चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने का नोटिस लाने पर भाजपा सांसद ने कहा कि यह सब अपनी बाधा डालने की क्षमता बढ़ाने और संसद का समय बर्बाद करने के लिए करते हैं। पहले भी, स्पीकर के खिलाफ मुद्दे सिर्फ समय बर्बाद करने के लिए उठाए गए थे और देश की जनता ने यह देखा है। वे बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं। जब वे आवेदन देते हैं, तो वे भी खारिज हो जाते हैं। यहां तक कि स्पीकर को भी बार-बार उनसे आगे बढ़ने के लिए कहना पड़ा। आपने देखा ही होगा कि जब गृह मंत्री बोल रहे थे, तो उन्होंने वोटिंग की मांग नहीं की। यह भी खारिज हो जाएगा।

--आईएएनएस

डीकेएम/वीसी

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