ममता बनर्जी के मार्गदर्शन में लोकतंत्र, संवैधानिक मूल्यों के लिए लड़ाई जारी रहेगी: अभिषेक बनर्जी
नई दिल्ली, 9 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार बनने के बाद टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के मार्गदर्शन में लोकतंत्र, संवैधानिक मूल्यों और लोगों के अधिकारों के लिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी।
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि हमने एक बेहद मुश्किल चुनाव लड़ा है, जिसमें कथित तौर पर लगभग 30 लाख असली वोटरों को वोटर लिस्ट से बाहर कर दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, हमने देखा कि कई सरकारी एजेंसियों और भारत के चुनाव आयोग का रवैया कितना पक्षपातपूर्ण था।
लोकतांत्रिक संस्थाएं, जिन्हें निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए, वे भी सवालों के घेरे में दिखीं। इससे पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
वोटों की गिनती से लेकर ईवीएम को लाने-ले जाने और उनके रखरखाव से जुड़े आरोपों तक जैसे कि कंट्रोल यूनिट का मेल न खाना कई ऐसी परेशान करने वाली घटनाएं हुईं, जिनसे लाखों लोगों के मन में यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या लोगों के असली जनादेश का सम्मान किया गया है। मैंने पहले ही वोटों की गिनती वाले केंद्रों से सीसीटीवी फुटेज जारी करने और वीवीपैट पर्चियों की पारदर्शी तरीके से गिनती कराने की मांग की है, ताकि सच लोगों के सामने आ सके और हर शक-शुबहे का जवाब खुले और ईमानदारी से दिया जा सके।
उन्होंने लिखा कि लोकतंत्र तभी जिंदा रह सकता है, जब चुनावी संस्थाएं नागरिकों के मन में भरोसा और विश्वास जगाएं। दुर्भाग्य से, हमने जो कुछ देखा है, उसने उस भरोसे को बुरी तरह से तोड़ दिया है। इसके साथ ही चुनाव के बाद हुई हिंसा, पार्टी दफ्तरों पर हमले, हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं को डराना-धमकाना और समर्थकों को धमकियां देना। ये सभी बातें एक लोकतांत्रिक समाज में बेहद चिंताजनक और कतई बर्दाश्त न करने लायक हैं। तृणमूल के कई ऐसे समर्पित कार्यकर्ता और समर्थक, जिन्होंने जमीन पर उतरकर दिन-रात मेहनत की, उन पर कथित तौर पर जानबूझकर हमले किए गए। डर और असुरक्षा के चलते उन्हें अपने घर-बार छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ा। लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक कार्यकर्ता को कभी भी अपनी जान की सुरक्षा और अपने राजनीतिक विचारों में से किसी एक को चुनने की मजबूरी का सामना नहीं करना पड़ना चाहिए।
इस महान राष्ट्र की लोकतांत्रिक परंपराओं को सबसे ऊपर रखते हुए, मैं और तृणमूल कांग्रेस में मेरे साथी हम सभी पश्चिम बंगाल की जनता के साथ और तृणमूल के हर उस कार्यकर्ता के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे, जिसने उस चुनावी तंत्र के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ाई लड़ी, जिसे हम एक 'दागदार' चुनावी तंत्र मानते हैं।
हम दिल्ली और पश्चिम बंगाल दोनों ही जगहों पर एक मजबूत, मुखर और अपने सिद्धांतों पर अडिग विपक्ष की भूमिका निभाते रहेंगे। ममता बनर्जी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में लोकतंत्र, संवैधानिक मूल्यों और लोगों के अधिकारों व सम्मान के लिए हमारी लड़ाई बिना किसी डर और बिना किसी समझौते के जारी रहेगी।
अभिषेक ने आगे लिखा कि मैं तृणमूल के हर समर्थक और कार्यकर्ता से अपील करता हूं कि इस मुश्किल घड़ी में वे मजबूत और एकजुट रहें। अगर किसी को भी चुनाव के बाद हुई हिंसा, डराने-धमकाने या धमकियों का सामना करना पड़ा है, तो मैं उनसे गुजारिश करता हूं कि वे मुझसे संपर्क करें और अपनी पूरी जानकारी मेरे साथ साझा करें या मुझे सीधे मैसेज भेजें। उनकी सुरक्षा और हिफाजत सुनिश्चित करने के लिए और हर मुमकिन कानूनी व लोकतांत्रिक रास्ता अपनाने के लिए मैं अपनी पूरी ताकत लगा दूंगा। इस लड़ाई में यह सुनिश्चित करने के लिए कि सत्य की जीत हो और दोनों सरकारें अब सचमुच पश्चिम बंगाल की जनता के हित में काम करें, मैं तृणमूल के हर कार्यकर्ता और समर्थक के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहूंगा।
--आईएएनएस
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